शिवपुरी। कांग्रेस को सिंधिया का नमस्ते भारी पड गया। सिंधिया समर्थक कांग्रेसी भाजपा में कनवर्ड हो गए,इसी बीच अपनी स्थिती क्लीयर करने के लिए पोहरी के पूर्व विधायक हरिबल्लभ शुक्ला ने आज एक प्रेसवार्ता ली। इस प्रेस वार्ता में हरिबल्लभ शुक्ला ने स्पष्ट किया वे सिंधिया के साथ नही बल्कि कांग्रेस के साथ है। पत्रकार वार्ता में हरिबल्लभ शुक्ला ने काग्रेंस को अलविदा करने वाले सिंधिया पर जमकर जुबानी हमला किया।
प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक शुक्ला ने कहा कि महाराज कह रह है की मेरे को कांग्रेस ने मान सम्मान नही दिया,इस कारण भाजपा की सदस्यता ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस के चौथे दिन ज्वाईन करने के बाद ही लोकसभा का टिकिट दिया,चार बार लोकसभा का टिकिट दिया। जीताकर लाए। और केन्द्र की सत्ता में दो बार मंत्री बनाया।
कांग्रेस की सबसे बडी पावरफुल कमेटी कांग्रेस वर्किग कमेटी का सदस्य बनाया। इसके सदस्य दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जी भी नही हैं। ग्वालियर चंबल के लगभग 10 जिलो में पाषर्द से लेकर विधायक और सांसद तक का टिकिट वही तय करते थे। सरकार रहते हुए ग्वालियर चंबल संभाग में जिलो में चरारासी से लेकर कमिश्नर तक की पोस्टिंग सिंधिया जी की एनओसी से हुई और सिपाही से लेकर आईजी तक की पोस्टिंग भी वही से होती थी।
कुल मिलाकर वह ग्वालियर चंबल संभाग के लीडर भी थे और सरकार थे। इतना मान सम्मान कांग्रेस ने ही दिया। अब 40 साल बाद एक वायरस चला गया। हम अपनी स्वतंत्रता से काम कर सकते थे। हम भाजपा के खिलाफ नही बोल सकते थे। अब हम स्वतंत्र हैं। ईमानदारी से कांग्रेस में रहकर अपना काम कर सकते थे।
मैं जब सिंधिया जी की जय-जयकार करता जब भाजपा उन्है सीएम बनाती । रिटायर्ट मेंट जैसा राज्यसभा में जाने के लिए भाजपा का रास्ता चुना बडा ही दुर्गभाग्य हैं। वे हमारे परिवार मुखिया थे। मुखिया वह होता है जो अपने-अपने छोटे से कार्यकर्ता के संकट भी स्वंय झेल लेता हैं,लेकिन यह सिंधिया जी ने क्या किया।
अपने समर्थक 22 विधायको का पॉलिटिक्स कैरियर दाव पर लगा दिया। वह भी अपने को राज्यसभा में जाने के लिए। उन्होने कहा कि मुझे जनसेवा करने में परेशानी आ रही हैं। भाजपा के 2 घंटे के जाने के बाद राज्यसभा के लिए उनका नाम आ गया। अभी तो सेवा शुरू ही नही हुई थी। फिर कैसे राज्यसभा के लिए नाम आ गया।
मेरा दावा हैं कि अभी तक जो भी बडे से बडा लीडर कांग्रेस छेाडकर भाजपा में गया हैं। उसे वह सम्मान नही मिला हैं। उसे पार्टी को छोडकर आना ही पडा है। क्या भाजपा उनको इतना सम्मान और अधिकार देगी जो कांग्रेस ने दिया। क्या उन्है 34 टिकिटो का मुखिया बना सकती हैं बिल्कुल नही।
हम तो छेाटे से नेता हैं,पिछले 18 साल ने कांग्रेस ने मुझेे टिकिट नही दिया। फिर भी मैने कांग्रेस नही छोडी उन्है भी इ्ंतजार करना था। सडको पर आना था। हम भी उनके साथ आते। सिंधिया जैसे बडे और उर्जावान नेता को बैक डोर इंट्री वाला पद के लिए कांगेेस नही छोडनी थी,अब ज्यादा ज्यादा भाजपा उन्है मंत्री बना देंगी।
मंत्री तो कांग्रेस ने उन्है 2 बार बना दिया था। आप सभी जानते है कि मोदी जी के मंत्री केवल बाबू जैसे है उन्है इतनी ही पावर हैं। इस देश में नरेन्र्द सिंह तोमर चौथे नंबर के सबसे ज्यादा ताकतवर मंत्री हैं उन्होने अपने क्षेत्र में कितना विकास कर दिया हैं।
प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक शुक्ला ने कहा कि महाराज कह रह है की मेरे को कांग्रेस ने मान सम्मान नही दिया,इस कारण भाजपा की सदस्यता ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस के चौथे दिन ज्वाईन करने के बाद ही लोकसभा का टिकिट दिया,चार बार लोकसभा का टिकिट दिया। जीताकर लाए। और केन्द्र की सत्ता में दो बार मंत्री बनाया।
कांग्रेस की सबसे बडी पावरफुल कमेटी कांग्रेस वर्किग कमेटी का सदस्य बनाया। इसके सदस्य दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जी भी नही हैं। ग्वालियर चंबल के लगभग 10 जिलो में पाषर्द से लेकर विधायक और सांसद तक का टिकिट वही तय करते थे। सरकार रहते हुए ग्वालियर चंबल संभाग में जिलो में चरारासी से लेकर कमिश्नर तक की पोस्टिंग सिंधिया जी की एनओसी से हुई और सिपाही से लेकर आईजी तक की पोस्टिंग भी वही से होती थी।
कुल मिलाकर वह ग्वालियर चंबल संभाग के लीडर भी थे और सरकार थे। इतना मान सम्मान कांग्रेस ने ही दिया। अब 40 साल बाद एक वायरस चला गया। हम अपनी स्वतंत्रता से काम कर सकते थे। हम भाजपा के खिलाफ नही बोल सकते थे। अब हम स्वतंत्र हैं। ईमानदारी से कांग्रेस में रहकर अपना काम कर सकते थे।
मैं जब सिंधिया जी की जय-जयकार करता जब भाजपा उन्है सीएम बनाती । रिटायर्ट मेंट जैसा राज्यसभा में जाने के लिए भाजपा का रास्ता चुना बडा ही दुर्गभाग्य हैं। वे हमारे परिवार मुखिया थे। मुखिया वह होता है जो अपने-अपने छोटे से कार्यकर्ता के संकट भी स्वंय झेल लेता हैं,लेकिन यह सिंधिया जी ने क्या किया।
अपने समर्थक 22 विधायको का पॉलिटिक्स कैरियर दाव पर लगा दिया। वह भी अपने को राज्यसभा में जाने के लिए। उन्होने कहा कि मुझे जनसेवा करने में परेशानी आ रही हैं। भाजपा के 2 घंटे के जाने के बाद राज्यसभा के लिए उनका नाम आ गया। अभी तो सेवा शुरू ही नही हुई थी। फिर कैसे राज्यसभा के लिए नाम आ गया।
मेरा दावा हैं कि अभी तक जो भी बडे से बडा लीडर कांग्रेस छेाडकर भाजपा में गया हैं। उसे वह सम्मान नही मिला हैं। उसे पार्टी को छोडकर आना ही पडा है। क्या भाजपा उनको इतना सम्मान और अधिकार देगी जो कांग्रेस ने दिया। क्या उन्है 34 टिकिटो का मुखिया बना सकती हैं बिल्कुल नही।
हम तो छेाटे से नेता हैं,पिछले 18 साल ने कांग्रेस ने मुझेे टिकिट नही दिया। फिर भी मैने कांग्रेस नही छोडी उन्है भी इ्ंतजार करना था। सडको पर आना था। हम भी उनके साथ आते। सिंधिया जैसे बडे और उर्जावान नेता को बैक डोर इंट्री वाला पद के लिए कांगेेस नही छोडनी थी,अब ज्यादा ज्यादा भाजपा उन्है मंत्री बना देंगी।
मंत्री तो कांग्रेस ने उन्है 2 बार बना दिया था। आप सभी जानते है कि मोदी जी के मंत्री केवल बाबू जैसे है उन्है इतनी ही पावर हैं। इस देश में नरेन्र्द सिंह तोमर चौथे नंबर के सबसे ज्यादा ताकतवर मंत्री हैं उन्होने अपने क्षेत्र में कितना विकास कर दिया हैं।

