प्रंसगवश@ललित मुदगल/शिवपुरी। आज रंगो का त्यौहार हैं। आज कांग्रेस के पूरे बदरंग हो गए हैं हर रंग में काला नजर आ रहा हैं। किसी भी किमत पर आज कांग्रेस के लिए हैप्पी होली नही हो सकती। कांग्रेस के साफ ईमानदार और स्वच्छ छवि लोकप्रिय नेता ग्वालियर के महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का त्याग कर दिया ओर दूसरी ओर मप्र में कांग्रेस सरकार पर संकट खडा हो गया।
पल-पल खाली होते गए सिंधिया के हाथ
विधानसभा में कांग्रेस की जब सरकार बनाने की बारी आई तो कांग्रेस ने सीएम की कुर्सी सरका दी,काफी उठा पटक के बाद प्रदेश का नाथ कमलनाथ को बनाया गया। सिंधिया समर्थको ओर प्रदेश में पंसद करने वाली जनता निराश हुई।
इसके बाद सिंधिया को मप्र का कांग्रेस का चीफ बनाने की कवायद शुरू हुई। वह इस पद के लिए सबसे योग्य चेहरा थे,लेकिन मतिभ्रष्ट कांग्रेस के दिल्ली दरवार का यह निर्णय भी अधूरा हैं। कांग्रेस के चाणक्य दिग्गी राजा और कमलनाथ का एक ही ऐजेंडा था सिंधिया नही कोई भी सही। मप्र कांग्रेस के चीफ की कुर्सी से भी सिंधिया के हाथ खाली रहे।
तीसरा अवसर था कि सिंधिया को मप्र से राज्यसभा भेजा जा सकता हैं। यहां भी सिंधिया के खिलाफ हवा उडाना शुरू कर दी। कही मीनाक्षी नटराजन तो कभी प्रियंका गांधी का नाम की हवाए मप्रं के कांग्रेसी नेता चलाने लगते हैं,कुल मिलाकर कांग्रेस को सबकुछ देने वाले सिंधिया के हाथ कुछ भी नही आना चाहिए।
सिंधिया ने इस विधानसभा में ब्रांड चेहरा थे। पूरे प्रदेश में प्रचार किया जनता से वादे भी किए,जनता ने सिंधिया के वादो पर भरोसा कर कांग्रेस के हाथ का थामा,जिससे कांग्रेस की सत्ता में वापिसी हुई। कमलनाथ के 3 शब्द तो उतर जाए इन शब्दो से मप्र में कांग्रेस सरकार का कुल नष्ट हो गया अब तो उतर गए कमलनाथ सीएम की कुर्सी से।
कभी-कभी इतिहास अपने आप को दोहरता हैं। सिंधिया के दादी कैलाश वासी राजमाता ने एक बार ऐसे ही विवादित बायानो के विवाद पर मप्र में कांग्रेस की सरकार को पटक दिया था। आज कुछ ऐसा ही पोते ने किया कांग्रेस से अपने 18 साल के संबंध खत्म करते हुए कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस ने भी सिंधिया को निष्काषित कर दिया।
सिंधिया अपने साथ अपने समर्थक मंत्रीयो और विधायको को भी साथ ले गए। पूरे प्रदेश से लगभग 24 विधायको के इस्तीफा देने खबर हा रही हैं। कुल मिलाकर सिंधिया के कारण प्रदेश में सरकार बनी और मिटती भी दिख रही हैं। कारण सिंधिया ही दिखाई दे रहे हैं।
क्यो बागी हुए महाराज यह सवाल भी उठ रहा हैं इसके पीछे सिर्फ एक ही कारण हैं कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले नेता दिग्गी राजा। दिग्विजय सिंह कमलनाथ के साथ मिलकर सिंधिया के राहो में काटे बिछा रहे थे। पहले सीएम की कुर्सी,फिर पीसीसी चीफ पर रोडा अब राज्यसभा के रास्ते पर रूकावट,और तो उतर जाए वाला बयान भी बडा कारण बना बागी होने का।
कहने का सीधा-सीधा सा अर्थ हैं कि एक कहावत यह सौ प्रतिशत सिद्ध हो गई, कि सौ सुनार की एक लोहार की। सिंधिया को रोकने के लिए सो जतन दिग्गी कंपनी रही थी। आज सिंधिया की एक चाल ने कमलनाथ की कुर्सी पर तो संकट खडा कर दिया। साथ ही दिग्गी राजा के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह भी लगा दिया। अब शायद दिग्गी
आज सोशल पर एक मैसेस तेजी से वायरल हो रहा हैंं इस पूरे घटनक्रम के लिए कांग्रेस नेता दिग्गी राजा को लोग अपने-अपने अंदाज में धन्यवाद दे रहा हैं। कोई प्रदेश में भाजपा सरकार को पुन:बनवाने के लिए बधाई दे रहा हैं तो कोई प्रदेश में कांग्रेस का सूफडा साफ करने के लिए। ऐसी स्थिती को देखकर लिखा जा सकता हैं कि दिग्गी राजा के लिए भी राज्यसभा के रास्ते गायब हो सकते हैं सिंधिया तो राज्यसभा लगभग पहुंच ही गए।

