सिंधिया सडक पर,आ सकते है, जगह और झंडा अभी निश्चित नही EX-rey@Lalit Mudgal

शिवपुरी। मप्र की राजनीति प्रतिदिन बदल रही हैं। ग्वालियर राज घराने के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया और मप्र के नाथ कमलनाथ के 3 शब्द तो उतर जाए के बाद मप्र की सरकार पर ही संकट आ गया। सिंधिया के समर्थको ने इस इन 3 शब्दो के बाद सिंधिया को नई पार्टी बनाने का सुझाव दे डाला।

मप्र में सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं सिंधिया
मप्र के विधानसभा चुनावो में ग्वालियर के महाराजा सिंधिया के चेहरे को कांग्रेस ने आगे किया था,कांग्रेस समझती थी कि एक मात्र चेहरा ही सत्ता का वनवास खत्म कर सकता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण भाजपा ने दिया था भाजपा ने अपनी चुनाव प्रचार में बस करो महाराज का विज्ञापन चला कर सिंधिया को ही टारगेट किया था।

अब कांग्रेस के कारण आज सिंधिया के हाथ खाली
यह शब्द किस शायर या लेखक ने लिखे होंगेे जानकारी नही हैं कि हमको हराने वाले भी शायद आज रोएगें होगें। सिंधिया का लोकसभा का चुनाव हारना इस लोकसभा चुनाव की 10 सबसे बडी खबरो में से एक थी। मोदी के राष्ट्रवाद की प्रचंड लहर में जब कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहूल गांधी भी हारे और ग्वालियर राजघराने के महाराज ज्योतिरादित्य भी हार गए।

अब सिंधिया जब भी शिवपुरी—गुना लोकसभा के दौरे पर आते है तो उनके स्वागत में उमडता हुआ जनमानस का हुजुम इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि आज भी सिंधिया की लोकप्रियता में कमी नही आई हैं।

पल—पल हाथ खाली होते गए सिंधिया के हाथ
विधानसभा में कांग्रेस की जब सरकार बनाने की बारी आई तो कांग्रेस ने सीएम की कुर्सी सरका दी,काफी उठा पटक के बाद प्रदेश का नाथ कमलनाथ को बनाया गया। सिंधिया समर्थको ओर प्रदेश में पंसद करने वाली जनता निराश हुई।

इसके बाद सिंधिया को मप्र का कांग्रेस की चीफ बनाने की कवायद शुरू हुई। वह इस पद के लिए सबसे योग्य चेहरा थे,लेकिन मतिभ्रष्ट कांग्रेस के दिल्ली दरवार का यह निर्णय भी अधूरा हैं। कांग्रेस के चाणक्य दिग्गी राजा और कमलनाथ का एक ही ऐजेंडा था सिंधिया नही कोई भी। मप्र कांग्रेस के चीफ की कुर्सी से भी सिंधिया के हाथ खाली रहे।

तीसरा अवसर था कि सिंधिया को मप्र से राज्यसभा भेजा जा सकता हैं। यहां भी सिंधिया के खिलाफ हवा उडाना शुरू कर दी। कही मीनाक्षी नटराजन तो कभी प्रियंका गांधी का नाम की हवाए मप्रं के कांग्रेसी नेता चलाने लगते हैं,कुल मिलाकर कांग्रेस को सबकुछ देने वाले सिंधिया के हाथ कुछ भी नही आना चाहिए।

सिंधिया ने इस विधानसभा में ब्रांड चेहरा थे। पूरे प्रदेश में प्रचार किया जनता से वादे भी किए,जनता ने सिंधिया के वादो पर भरोसा कर कांग्रेस के हाथ का थामा,जिससे कांग्रेस की सत्ता में वापिसी हुई अगर सिंधिया अपने द्धारा किए गए जनता से वादो की बात कांग्रेस सरकार से करते हैं तो इसमें क्या गलत था।

जनता के हक के लिए कोई भी सरकार से सवाल पूछ सकता हैं। कमलनाथ के 3 शब्द तो उतर जाए  इन शब्दो से मप्र में कांग्रेस सरकार का कुल नष्ट को सकता हैं अर्थात सिंधिया सरके तो सरकार संकट में आ सकती है।

बार—बार सिंधिया को हाशिए पर लाया जा रहा हैं,लेकिन इस बार कहानी कुछ भी हो सकती हैं। सूत्रो का कहना है कि टीम सिंधिया में आत्ममंथन का दौर जारी हैं। ऐसे बयान सिंधिया के समर्थक में निराशा के भाव पैदा करते है। समर्थको के बिना कोई नेता नही बनता।

कभी—कभी इतिहास अपने आप को दोहरता हैं। सिंधिया के दादी कैलाश वासी राजमाता ने एक बार ऐसे ही बायानो के विवाद पर मप्र में कांग्रेस की सरकार को पटक दिया था,अब इतिहास मप्र विकास कांग्रेस के रूप में भी दोहराया जा सकता हैं। ज्योतिरादित्य के पिता कैलाश वासी माधवराव सिंधिया ने मप्र विकास कांग्रेस का गठन किया था।

सूत्रो का कहना हैं कि सिंधिया सडको पर 3 मार्च को उतर सकते हैं। सिंधिया दरवार से ऐसे सकेंत अपने समर्थक नेताओ के पास आने लगे हैं। लेकिन अभी जगह और झंडा निश्चित नही हैं।