शर्म करने वाली खबर: स्वास्थ्य और महिला बाल विकास की नाकामी लील गई पिछले 3 माह में 65 नवजात

शिवपुरी। पडौसी राज्य राजस्थान में बच्चो की मौत पर देश की राजनीति में बबाल मच रहा हैं।शिवपुरी जिले में कुछ ऐसे ही आकडे आ रहे हैं। जहां करोडो रूपए का बजट और हजारो कर्मचारी होते हुए भी बच्चो की मौत का आंकडा लगातार बड रहा हैं।

बताया जा रहा हैं कि महिला बाल विकास विभाग की नाकामी और स्वास्थय विभाग की लापरवाही के कारण शिवपुरी में प्रसूताओ की उचित देखरेख और दोनो विभाग की लापरवाही के कारण प्री-मैच्योर डिलीवरी से जन्मे बच्चों की लगातार मौत हो रही हैं।

जिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिट) में ही तीन महीने के अंदर 65 बच्चों की मौत हाे चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अनजान बने हुए हैं। यह आंकडा सरकारी अस्पताल से आया हैं। यह आकडा बड सकता हैं। डिलेवरी होने के बाद जन्मे कमजोर बच्चे घर जाकर मौत का शिकार हुए हैं इस आकडे का अनुमान नही हैं।

इसका मुख्य कारण गर्भधारण के साथ प्रसूताओं की समय पर जांच, टीकाकरण नहीं हो रहा है। ठीक से देखभाल नहीं होने के कारण 50% से अधिक प्रसूताओं में खून की कमी सामने आई है। यही प्री-मैच्योर डिलीवरी का सबसे बड़ा कारण है। एेसे में महिला एवं बाल विकास विभाग पर भी सवाल खड़े हाेते हैं।

जिला अस्पताल में पिछले तीन महीनों में 65 बच्चों की मौत हो गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अनजान हैं। जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें अधिकतर प्री-मैच्योर डिलीवरी से हुए हैं। प्री-मैच्योर डिलीवरी रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग विशेष ध्यान नहीं दे रहा है। प्रसूताओं की समय पर देखभाल और खानपान का जिम्मा इन्हीं दोनों विभागों के पास है।

प्रसूताओं में खून की कमी के कारण 9 महीने पूरे होने से पहले 7 या 8 महीने में ही प्रसव हो रहे हैं। इसी वजह से ज्यादातर बच्चों की मौत हो रही हैं क्याेंकि कम समय में डिलीवरी से बच्चा गर्भ पूरी तरह विकसित नहीं हाे पाता।

दाे उदाहरण: प्री मैच्याेर डिलीवरी, 9 दिन के बच्चे का वजन मात्र 700 ग्राम
1. नीरो पाल निवासी करही बारां की आठ महीने में प्री-मैच्योर डिलीवरी हुई है। 28 दिसंबर 2019 को जन्मे उनके बच्चे का वजन मात्र 700 ग्राम है। अभी उनका बच्चा जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती है।

2. खोड़ क्षेत्र की प्रसूता राजवती अादिवासी को आठ महीने का गर्भ था। 4 दिसंबर 2019 को उसे अस्पताल लाया गया। मेटरनिटी की जगह ड्यूटी डॉक्टर ने ट्राॅमा सेंटर में भर्ती कर दिया था। यहीं प्री-मैच्योर डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत हो गई।
जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती बच्चे 80% प्री-मैच्योर डिलीवरी वाले
जिला अस्पताल में मौजूदा समय में 25 बच्चे भर्ती हैं। इनमें 20 बच्चे प्री-मैच्योर डिलीवरी से जन्मे हैं।

वहीं अक्टूबर 2019 को एसएनसीयू में भर्ती 162 में से 23 (14.19%), नवंबर 2019 में भर्ती 172 में से 23 (13.37%) और दिसंबर 2019 में भर्ती 132 में से 19 (14.39%) बच्चों की मौत हो चुकी है।

प्री-मैच्योर डिलीवरी वाले बच्चों के फेंफड़े हाेते हैं कमजोर
शिशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार प्री-मैच्योर डिलीवरी वाले बच्चों के फेंफड़े कमजोर होते हैं। इसलिए सांस लेने में परेशान होती है। बीमारियां भी तुरंत लग जाती हैं। इसी वजह से प्री-मैच्योर बच्चों की मौत हो जाती है। प्रसव काल के दौरान मां का समय पर चेकअप नहीं होना, टीकाकरण और खान-पान ठीक नहीं हाेने से प्री-मैच्योर डिलीवरी होती हैं।

पोषण आहार नहीं मिलने से गर्भवती महिलाओं में कमजोरी
जिला अस्पताल में अधिकतर प्री-मैच्योर डिलीवरी हो रही हैं। पूछताछ से पता चला कि ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूताओं की प्री-मैच्योर डिलीवरी ज्यादा हो रही हैं। पोषण आहार नहीं मिलने से कमजोरी और जांचें समय पर नहीं होने से 50 प्रतिशत प्रसूताओं में खून की कमी है। खून की कमी ही प्री-मैच्योर डिलीवरी का बड़ा कारण है।

अंचल के अस्पतालाें में शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी: बदरवास, पोहरी और पिछोर में एनबीसीयू (न्यू बॉर्न केयर यूनिट) हैं लेकिन पिछोर को छोड़कर दोनों जगह एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। पिछोर अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ भी मेटरनिटी लीव पर हैं। सभी डिलीवरी सेंटरों पर न्यू बाॅर्न केयर कॉर्नर (एनबीसीसी) हैं, जहां बेबी हीट वार्मर की व्यवस्था होती है लेकिन यहां भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है।

चाइल्ड डेथ रिव्यू कर रहे हैं
 प्री-मैच्योर डिलीवरी के बाद बच्चों की मौत को लेकर हम हर महीने सीडीआर (चाइल्ड डेथ रिव्यू) कर रहे हैं। प्री-मैच्योर डिलीवरी के मामलों की जांच कराएंगे। 2019 में टीकाकरण में लापरवाही के कारण 25 लोगाें के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं।
डॉ. एएल शर्मा, सीएमएचओ

बच्चों की मौत की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को देंगे
प्री-मैच्योर बच्चों की मौत को लेकर वरिष्ठ अधिकारियाें को अवगत कराएंगे। अभी छुट्‌टी पर हूं। वापस लौटकर इस दिशा में कार्रवाई करेंगे।
डॉ. एमएल अग्रवाल, सिविल सर्जन, शिवपुरी

टीकाकरण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की
हमारे विभाग की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से प्रसूताओं को टीएचआर हर मंगलवार को दिया जा रहा है। जांचें व टीकाकरण आदि की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।
देवेंद्र संदुरया, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिवपुरी

बच्चों की मौतों को लेकर जांच कराएंगे
प्री-मैच्योर डिलीवरी के कारण बच्चों की मौत को लेकर संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे। बच्चों की मौतों को लेकर जांच कराएंगे। कहीं लापरवाही है तो कार्रवाई करेंगे। अनुग्रहा पी., कलेक्टर, शिवपुरी