दूध की हडताल: दूधियों ने शहर के प्रवेश पर तैनात किए लोग, 40 रूपए की रेट पर अडे दूधियों

शिवपुरी। दूध के दाम बढ़ाने को लेकर दूधियों ने आज हड़ताल शुरू कर दी है जिससे शहर में दूध की आवक पर रोक लग गई। हड़ताली दूधियों ने शहर में दूध की सप्लाई रोकने को लेकर शहर के  सभी प्रवेश द्वारों पर अपने लोगों को तैनात कर दिया है जो शहर में दूध की सप्लाई करने वाले दूधियों को पकडऩे का काम कर रहे  हैं।

दूधिया संघ के अध्यक्ष कोकसिंह गुर्जर का कहना है कि जो भी दूधिया दूध की सप्लाई हड़ताल के बावजूद करता है तो उसके खिलाफ दूधिया संघ कार्यवाही करेगा। दूध न आने से आज डेयरियों पर बंदी जैसे हालत नजर आए। वहीं शहर के सांची, अमूल और सारस के दूध की काफी बिक्री देखी गई। जहां 50 रू. लीटर दूध लोग खरीदते देखे गए। हड़ताल की जानकारी लगने पर उक्त पार्लर  संचालकों ने कंपनी से अतिरिक्त दूध के पैकेट मांगने की मांग की थी जो उन्हें कंपनी ने उपलब्ध करा दिए हैं जिससे लोगों को दूध के लिए परेशान नहीं होना पड़ा।

हालांकि शहरवासियों  की जेब पर अतिरिक्त खर्च का भार अवश्य पड़ा, क्योंकि अभी तक 40 रू. लीटर में उन्हें डेयरियों से दूध उपलब्ध हो जाता था, लेकिन हड़ताल के कारण वह 50 रू. लीटर का दूध खरीद रहे हैं। हड़ताली दूधियों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से आज से लेकर 20 अक्टूबर तक हड़ताल करने की मांग की थी और आज से उनकी हड़ताल भी शुरू हो गई है जो 11 दिन तक चलेगी और इस दौरान शहर में दूध की सप्लाई नहीं हो सकेगी। ऐसी स्थिति में लोगों को बड़ी हुई दर का दूध खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

जानकारी के अनुसार बुधवार को दूधिए और डेयरी संचालकोंं के बीच दूध के दाम बढ़ाने को लेकर हुई चर्चा असफल हो जाने के बाद दूधियों ने एसडीएम ऑफिस पहुंचकर दूधिया संघ के बैनर तले 10 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक हड़ताल करने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद उन्होंने चिंताहरण मंदिर पर बैठक आयोजित कर हड़ताल की रूपरेखा तय की और आज सुबह से ही शहर में दूध की आवक बंद कर दी।

इसका असर यह हुआ कि डेयरियों पर जो कल का दूध बचा था वह कुछ ही समय में समाप्त हो गया। इसके बाद लोग दूध के लिए भटकते रहे, लेकिन सांची के पार्लरों पर पर्याप्त  दूध उपलब्ध होने के कारण लोगों को आसानी से दूध उपलब्ध हो गया। हड़ताल  को देखकर सांची पार्लरों के संचालकों ने अतिरिक्त दूध की मांग की थी जो उन्हें आज उपलब्ध करा दी गई।

हड़ताल को लेकर दूध विक्रेता व्यापारी संघ समिति ने भी आज बैठक करने का निर्णय लिया है और आए दिन दूधियों द्वारा दूध के दाम बढ़ाने को लेकर हड़ताल करने पर डेयरी संचालकों ने इस स्थिति से निबटने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। डेयरी संचालक दीपेश राठौर का कहना है कि दूधिए उन्हें ब्लैकमेल करने का काम कर रहे हैं और हर बार वह हड़ताल कर घटिया दूध के रूपए बढ़वाने का प्रयास कर लेते हैं और प्रशासन भी इन लोगों का ही साथ देता है जिससे दूधियों की मनमानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

दूध के दाम दूधियों के अनुसार बढ़े तो 45 रूपए लीटर तक बिकेगा दूध

डेयरी संचालक दीपेश राठौर का कहना है कि दूधिए 35 रूपए लीटर दूध के दाम 40 रूपए करने पर अड़ा हुआ है अगर प्रशासन ने डेयरी संचालकों का सहयोग नहीं किया तो लोगों को 45 रूपए लीटर दूध मिलेगा जिससे आमजन की जेब पर इसका असर पड़ेगा।

65 फैट का दूध दें दूधिया, हम 40 नहीं 45 रूपए लीटर के दाम देंगे : राठौर

दूध के व्यवसाय से काफी लंबे समय से जुड़े डेयरी संचालक दीपेश राठौर का कहना है कि दूधिए मनमानी पर उतारू हैं। जो अभी तक 45 फैट का दूध शहर में सप्लाई करते हैं और उसी दूध का प्रति लीटर दाम वह 40 रूपए करने की मांग कर रहे हैं जो अनुचित है। दूधिए अगर 65 फैट का दूध शहर में सप्लाई करें तो हम 40 नहीं उन्हें 45 रूपए लीटर दूध का दाम देने के लिए तैयार हैं, लेकिन दूधिए इतनी फैट का दूध देने के लिए राजी नहीं है, क्योंकि वह दूध में पानी मिलाकर दूध की सप्लाई कर रहे हैं जिससे उन्हें मुनाफा अधिक हो रहा है और वह अपने मुनाफे के लिए शहर में यह दूध सप्लाई कर रहे हैं।

100 डेयरियों के माध्यम से 70 हजार लीटर दूध की होती है खपत

शहर मेें छोटी बड़ी सभी डेयरियां मिलाकर लगभग 100 डेयरियंा संचालित हैं जिनके माध्यम से 70 हजार लीटर दूध प्रतिदिन की खपत होती है। जबकि शहर में 2 लाख लीटर दूध आता है जिनमें से शेष बचा दूध का उपयोग पनीर मावा सहित नौवा, सांची और सारस को सप्लाई किया जाता है।

2017 में बढ़ाए गए थे तीन रूपए

दूधियों ने वर्ष 2017 में भी दूध के दाम बढ़ाने को लेकर हड़ताल की थी उस  समय दूध की कीमत 30 रूपए थी और दाम बढ़ाकर यह कीमत 33 रूपए पहुंच गई थी इसके बाद लोगों को दूध 38 रूपए लीटर उपलब्ध हो रहा था और इसी वर्ष अप्रैल माह में दूधियों के कहने पर 2 रूपए लीटर दूध के दाम बढ़ाए गए थे जो 33 से बढक़र 35 रूपए हो गया था।

चारा महंगा, कैसे उठाएं जानवरों का खर्च इसलिए दाम बढ़ाना उचित : कोकसिंह

दूधिया संघ के अध्यक्ष कोक सिंह गुर्जर का कहना है कि चारा काफी महंगा हो गया है ऐसी स्थिति में वर्तमान में दूध की कीमतों से जानवरों के चारे का खर्च भी नहीं निकल रहा है इसलिए वह दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जानवरों को दिया जाने वाला चारा जिसमें पीना 40 रू. किलो, बाजरा 22 रू. किलो, गुड़ 35 रू. किलो और भूसा 8 रू. किलो है जिसके दाम लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं ऐसी स्थिति में जानवरों को उचित आहार देना मुश्किल हो रहा है और आहार न मिलने पर जानवर दूध कम दे रहे हैं।

ग्वालियर, झांसी और गुना में दूध के दाम 50 से 55 रूपए लीटर

कोकसिंह का कहना है कि ग्वालियर में डेयरियों पर दूध 42 रूपए में खरीदकर 50 रूपए बेचा जाता है वही झांसी में 48 रूपए में दूध खरीदने के बाद 55 रूपए में लोगों को उपलब्ध हो रहा है वहीं गुना में दूध की कीमत 45 रूपए है जिसे 50 रूपए में डेयरियों से बेचा जा रहा है, लेकिन शिवपुरी में उनसे 35 रूपए में दूध खरीदकर 40 रूपए में बेचा जा रहा है और इतने कम दामों उनके खर्चे भी नहीं निकल पा रहे हैं।

सांची के 15 से 20 पार्लर शहर मे हैं संचालित

दूधियों की हड़ताल का असर लोगों को तो नहीं हुआ, लेकिन उनकी जेब पर अतिरिक्त खर्च का भार अवश्य पड़ गया है। सर्वाधिक नुकसान डेयरी संचालकों को हो रहा है जिनका हड़ताल के दौरान धंधा चौपट हो गया है। शहर में दूध की किल्लत से निपटने के लिए सांची के पार्लर हैं जिनकी संख्या 15 से 20 है और इन पार्लरों के माध्यम से दूध की सप्लाई शहर में हो रही है।