पूर्वानुमान: ज्योतिरादित्य की जिद से फिर उदय होगी मप्र विकास कांग्रेस | Shivpuri News

शिवपुरी। मप्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के खींचतान की खबरों के बीच एक पूर्वानुमान सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष नही बनाया गया तो वे कांग्रेस को बाय-बाय कर सकते हैं, और अपने पिता कैलाशवासी माधवराव सिंधिया के द्वारा बनाई गई पार्टी मप्र विकास कांग्रेस को जिंदा कर सकते है।

पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के चेहरे को मप्र के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने आगे किया था। भाजपा ने भी अपने प्रचार में सिंधिया पर ही हमला किया 'माफ करो महाराज' पंच लाइन के साथ चला विज्ञापन अभियान ज्योतिरादित्य सिंधिया को टारगेट करके ही चलाया गया था। भाजपा का यही भी गणित था कि अगर कांग्रेस से कोई सीएम बनेगा तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ही बनेंगें। प्रदेश के जनता के साथ—साथ भाजपा का गणित फैल हो गया और प्रदेश के नाथ बन गए कमलनाथ। 

सीएम कमल नाथ और पूर्व सीएम दिग्विजय की चाणक्य नीति ने प्रदेश के सीएम की कुर्सी ज्योतिरादित्य सिंधिया से छीन ली। सिंधिया समर्थक नेताओं को ऐसा लग हरा था कि सीएम नही तो प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर हमारे महाराज की ताजपोशी तय होगी। अभी दिल्ली में कांग्रेस के अध्यक्ष सोनिया गांधी मप्र काग्रेस के अध्यक्ष का फैसला करने वाली थी उसी दिन यह खबर भी आ गई कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना नाम स्वयं आगे बढ़ा दिया हैं उन्होने स्वंय कह दिया कि अध्यक्ष मुझे बनाओ।

लेकिन यहां भी सीएम कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अपनी चाले चलते हुए मप्र के अध्यक्ष के नाम की घोषणा नही होने दी। इस घोषणा के रूक जाने के बाद मप्र में सिंधिया समर्थको में उबाल आ गया और बयान भी आने लगे की अगर हमारे महाराज को प्रदेश अध्यक्ष नही बनाया गया तो हम कांग्रेस से इस्तीफा दे देंगें। 

ऐसे ही कुछ घटनाक्रमों के बाद सोशल मीडिया पर अनुमान लगाए जा रहजे हैं कि मप्र कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा रूक जाने के बाद कांग्रेस के नेताओं के दवारा उन्हे मनाया जा रहा हैं लेकिन सिंधिया अपनी जिद पर अडे हैं, और कभी भी कांग्रेस का दामन छोड सकते हैं। अगर इन वायरल खबरों को सत्य माना जाए तो लोगों का कहना कि वे अपने कैलाश वासी पिता के द्वारा बनाई गई मप्र विकास कांग्रेस को पुन:जिंदा कर सकते है।

ज्ञात हो की कैलाश वासी माधवराव सिंधिया ने मप्र विकास कांग्रेस पार्टी का गठन किया था जिसका चुनाव चिन्ह उगता सूरज था। वे इस पार्टी से ग्वालियर संसदीय सीट से चुनाव भी लडे थे और विजय भी हुए थे। इसके बाद इस पार्टी का विलय कांग्रेस में ही हो गया था। वायरल खबरों की माने तो सिंधिया कभी भी अपनी पार्टी की घोषणा कर सकत हैं, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा हैं कि सिंधिया के साथ उनके समर्थक विधायक भी अपना इस्तीफा कांग्रेस को दे सकते है। जिनकी संख्या 30 से 35 बताई जा रही हैं। अगर ऐसा होता हैं तो प्रदेश में कभी भी चुनाव हो सकते हैं। 

इस मामले में अपने राम का कहना हैं कि ऐसा ही कुछ घटनाक्रम मप्र की राजनीति में पूर्व भी हुआ था। मप्र की पूर्व सीएम सुश्री उमा भारती ने भाजपा को छोडकर जनशक्ति पार्टी बनाई थी। सुश्री उमा भारती को भी शायद ऐसा लगा था कि मेरे इस्तीफा देने से मेरे समर्थक विधायक इस्तीफा देंगें, लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ था सिर्फ भाजपा के कुछेक नेताओं ने इस्तीफा दिया था बाद में जनशक्ति पार्टी का विलय भाजपा में हो गया। 

उमा भारती ने दिग्गी राजा से अपनी दम पर सत्ता की कुर्सी छीनी थी। सिंधिया को उमा भारती प्रकरण अवश्य याद कर लेना उचित होगा। इस्तीफा देने की आवाजें आ रही हैं अभी तक किसी ने इस्तीफा नही दिया है। और अत: में यह खबर भी आ रही हैं कि मप्र कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा अब दिल्ली के विधानसभा चुनाव के बाद होगा।