शिवपुरी। अभी हाल ही में प्रशिक्षण के लिए शिक्षा महाविद्यालय में भेजे गए सहायक अध्यापकों की चयन प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़ा हो गया हैं। क्योंकि यह प्रक्रिया जिले भर के शिक्षकों को बगैर सूचना आनन फानन में अपने चहेते शिक्षकों के तत्काल में आवेदन बुलाकर और एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों का चयन करके तत्काल उन्हें पदाकिंत शाला और संकुल से कार्र्यमुक्त कर दिया गया।
इससे तो यह साफ जाहिर होता हैं कि कहीं न कहीं शिक्षकों भेजने के लिए उन्हीं शिक्षकों के आवेदन लिए जो पूर्व से वरिष्ठ अधिकारियों या फिर जिला कार्यालय के बाबूओं के संपर्क में थे। यहां सवाल यह खड़ा होता हैं कि क्या इन्हें प्रशिक्षण में भेजते समय छात्रों की सुविधाओं का ध्यान और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के सुचारू संचालन का ध्यान रखा गया, नहीं तो क्यों नहीं ?
इतना ही नहीं जिले के कई शिक्षक प्रशिक्षण की पात्रता में आ रहे हैं और उनका कहना हैं कि हमारे आवेदन क्यों नहीं लिए गए और हमारे पास कोई सूचना तक नहीं भेजी गई ऐसा क्या कारण रहा। जहां आयुक्त लोक शिक्षण द्वारा हायर सेकण्डरी एवं हाईस्कूल के परीक्षा परिणामों पर एक तरफ चिंता व्यक्त की जा रही हैं वहीं दूसरी तरफ इनके गुणात्मक सुधार हेतु अध्यापक वर्ग 1, वर्ग 2 एवं वरिष्ठ शिक्षकों को प्रशिक्षण में न भेजना जिला स्तरीय अधिकारियों की मनमानी साफ रूप से दिखाई दे रही हैं।
शासन की योजना का लाभ दो-दो बार क्यों?
मध्य प्रदेश शासन शिक्षकों को शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए डीएड प्रशिक्षण अनिवार्य मानते हुए उन्हें प्रशिक्षण दिलाया गया। जो प्राथमिक शालाओं के शिक्षकों को अनिवार्य माना गया था। जिसकी प्रष्ठ भूमि में शासन की मंशा थी कि बुनियादी कक्षाओं के छात्रों को व्यवहारिक शिक्षा नैतिक मूल्यों के अनुरूप दी जा सकेगी। लेकिन डीएण्ड उत्तीर्ण शिक्षकों को बीएड कराए जाने की शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कौन सी आवश्यकता पड़ गई?
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (एआईसीटीई) द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को प्राथमिक शालाओं में ही पदस्थ किया जा सके जिससे प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके तथा बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को मीडिल से हायर सेकण्डरी विद्यालयों में पदस्थ किया जाता है। लेकिन डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को ही बीएड के लिए ही उपयुक्त मानते हुए उनका ही चयन क्यों किया गया? अधिकारियों द्वारा अपनाई गई नीति की बजह से शासन को दोहरी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा हैं।
इन शिक्षकों भेजा ग्वालियर प्रशिक्षण के लिए
प्रतिज्ञा लक्ष्यकार प्राथमिक विद्यालय विलोकला, राकेश सिंह नरवरिया शासकीय प्राथमिक विद्यालय कुशवाह का पुरा, बरखा त्रिपाठी शासकीय प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर, जितेन्द्र सिंह चौहान शाप्रावि विलूखो, जितेन्द्र सिंह चौहान शाप्रावि सेबढ़ा, बृजलता शर्मा शाप्रावि पडाव मजरा, रेखा यादव शाप्रावि ढीमर, रामकुमार जोशी शाप्रावि दशहेरिया, कृपाल सिंह लोधी शाप्रावि पारेका ताल, सुनीता सेंगर शाप्रावि विजयपुर, रामकुमार लोधी शाप्रावि. फूलपुर, आशा परिहार शाप्रावि धुवानी उक्त शिक्षकों को पूर्व में शासन द्वारा डीएड का प्रशिक्षण दिलाया जा चुका हैं इन्हीं शिक्षकों को बीएड के प्रशिक्षण हेतु पुन: ग्वालियर भेजा गया हैं।
वर्ष 2018-19 के वोर्ड परीक्षा परिणाम
गत वर्ष 2018-19 में आए न्यूनतम परीक्षा परिणामों को दृष्टिगत रखते हुए उन विद्यालयों के शिक्षकों को बीएड प्रशिक्षण के लिए क्यों नहीं भेजा गया। जबकि इसके विपरीत डीएड प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को बीएड के प्रशिक्षण हेतु भेज दिया गया। डीएड प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों से बीएड प्रशिक्षण के लिए भेज दिए गए।
ऐसी स्थिति में क्या अन्य डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को उन विद्यालयों में पदस्थ किया गया हैं जिन विद्यालयों से डीएड प्रशिक्षित शिक्षक बीएड शिक्षण के लिए भेजे गए हैं। तब उन प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कौन कर रहा है?

