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बच्चो को उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा देना ही मेरे जीवन का टारगेट: सुरेन्द्र सिंह धाकड | Shivpuri News

शिवपुरी। बच्चो को उच्च गुणवत्ता शिक्षा के साथ आदर्श संस्कारो को उनकी जीवन में भरना ही मेरे जीवन की टारगेट हैं। बच्चो को हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढे ऐसे ही उन्है मानसिक रूप से तैयार हमारे स्कूल का लक्ष्य हैं,ऐसा कहना हैं जोंईट इंटरनेश्नल आक्सपोर्ड पब्लिक स्कूल के संचालक सतेन्द्र सिंह धाकड का।

शिवपुरी समाचार डॉट कॉम की संवाददाता खुशबु शिवहरे ने सुरेन्द्र सिंह धाकड से शिक्षा के विषय पर बातचीत की। इससे पहले इनका पूरा परिचय करते हैं नाम सुरेन्द्र सिंह धाकड पिता का नाम मुन्नालाल धाकड शिक्षा एमएससी,बीएड,पीजीडीसीए।

शिक्षा के क्षेत्र में आने के कारण पर सुरेन्द्र सिंह धाकड का कहना कि मैं जब स्टूडेंट था जब मुझे पढने में ज्यादा रूचि नहीं थी,लेकिन सरकारी नौकरी करना था इस कारण मैं पढता रहा। मेरी जब पढाई पूरी हुई तो सरकारी जगह नही निकली। इस कारण मैने इंदौर में प्राईवट नौकरी की। प्राईवेट नौकरी में मेरा मन नही लगा तो ग्वालियर में मैने स्कूल मे पढाना शुरू कर दिया। इस तरह से में सन 2008 में शिक्षा के क्षेत्र में आ गया।

मैने ग्वालियर के कई स्कूलो में मैने पढाया। छोटे-बडें क्लासो के बच्चो को में पढाता था,मेरी पढाने में रूचि पैदा हो गई,मैं किताबो के ज्ञान की जडो में पहुचंने का प्रयास करता रहा,मैं बच्चे इस किताबी ज्ञान से कितना सीख रहे हैं,साथ ही उनकी बुद्धि् क्षमता और उनके आईक्यू का परीक्षण भी करता रहा। उनको सीखने के लिए उत्साहित करता रहा और सीखने के प्रति लग्न बनी रहे ऐसे पढाने की क्षमता को विकसित करते रहने का प्रयत्न करता रहा।

बच्चे को जितना पढा रहे हैं उतना सीख रहे हैं कि नही,इस बात पर विशेष गौर किया,बच्चे को जितना सीखा रहे हैं उतना सीखे इसके लिए विषय को रूचिकर बनना,सरल तकनीकि का पाठयक्रम तैयार करने का अनुसंधान करते रहने का मेरा मकसद रहा हैं। जिससे बच्चा काबिल बनकर स्वयं अपने पैरो पर खडा हो जिससे एक स्वस्थय समाज का निर्माण हो।

एक प्राईवेट टीचर से अपने स्कूल खोलने तक के सफर में आई परेशानी पर बात करते हुए कहा कि परेशानी तो बहुत आई। सबसे पहले तो में एक अच्छा टीचर कैसे बनू यह खोजा गया,अपने पेशे से किसी का जीवन बना सकू इस योग्य बनने के लिए अपने आप पर वर्क किया। इसी सूत्र पर चलते हुए मैने उद्देश्यो को नही छोडा और एक प्राईवेट टीचर से एक स्कूल डारेक्टर तक का सफर तय किया।  

शिक्षाविद सुरेन्द्र सिंह धाकड ने सफलता के मूल मंत्र पर बात करते हुए कहा कि अपने पेशे के प्रति ईमानदारी,अपने लक्ष्य तक पहुचने का प्लान बनाकार उस पर प्रतिदिन फोलों करना और अपने आप में पॉजीटिव सोच को रखना ही सफलता का मूल मंत्र हैं।

किस्मत पर विश्वास रखते है या कर्म पर इस प्रश्न पर सुरेन्द्र सिंह धाकड ने कहा कि कर्म ही जीवन में सबसे बडा होता हैं मनुष्य का जन्म भगवान देता हैं,लेकिन उसके जीवन का निर्माण उसके कर्म ही करते है। इस संसार का सबसे बडा शास्त्र गीता पूरा भगवान ने कर्म पर ही बोला हैं। कर्म ही अपने भाग्य का निर्माण करते हैं।

जीवन में प्रेरणास्त्रोत्र कोैन हैं,इस पर कहा कि मेरे जीवन में प्रेरणा देने का काम स्वामी विवेकानंद ने किया हैं। उनका जीवन से ही मैने सार्थकता,अपने पेशे के प्रति ईमानदारी ओर भगवान के प्रति झुकाव आया हैं। उनका साहित्य पढने पर मु्झे मेरी जीवन की समस्याओ को हल मिला हैं।

समाज कैसा होना चाहिए इस पर शिक्षाविद धाकड ने कहा कि समाज शिक्षित होना बहुत आवश्यक हैं,जब वह शिक्षित होगा तब ही अपने डिसीजन लेने योग्य होगा,शिक्षित होगा तो सभ्य भी होगा। शिक्षा आत्मनिर्भरता देती हैं और इस संसार के सभी व्यक्ति आत्मनिर्भर होंगें तो यह समाज सभ्य हो जाऐंगा।

आज की किताबी शिक्षा और नैतिक शिक्षा के विषय में कहा कि मैने शुरू में ही कहा था,शिक्षा में उच्चगुणत्ता होनी चाहिए। गुणवत्ता हमारी नैतिक शिक्ष्रा हैं। आज की शिक्षा से व्यक्ति अपने आप में इंटेलिजेंट तो हो सकता हैं लेकिन सभ्य जब ही कहलाऐगा जब उसमें नैतिकता होगी। हमारी नैतिक शिक्षा हमारे प्रति के साथ-साथ दूसरो के प्रति जीने के लिए भी प्रेरित करती हैं।