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अस्पताल में हत्या: अस्पताल में मिटाए गए सबूत, मृतक ने घटना से पहले आवेदन दिया था

शिवपुरी। जिले के सबसे बडे सरकारी अस्प्ताल में मंगलवार की दोपहर सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां पुरूष डी वार्ड जो टीबी मरीजों का वार्ड है। उसमें भर्ती मरीज सुरेश 65 पुत्र मांगीलाल कोली निवासी गौशाला लुधावली की गला रेती लाश पलंग पर पडी मिली। मृतक के कपड़े खून से सने हुए थे। स्टाफ ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। वहीं इस घटना से अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

जानकारी के अनुसार गौशाला निवासी सुरेश कोली 12 अगस्त को सुबह 9:15 बजे जिला अस्पताल में भर्ती हुआ। जहां उसका टीबी का उपचार किया जा रहा था। स्टाफ के मुताबिक 13 अगस्त को राउंड के दौरान मरीज पलंग पर नहीं था लेकिन दोपहर 3:15 बजे जब डयूटी पर तैनात नर्स की नजर पलंग पर पड़ी तो सुरेश की मौत हो चुकी थी और उसका गला कटा हुआ था तथा कपड़ों पर खून लगा था। 

पुलिस ने जिला अस्पताल में पहुंचकर मामले की पड़ताल की जिसमें प्रथम दृष्टया जिला अस्पताल प्रबंधन भी लापरवाही साफ रूप से दिखाई पड़ रही हैं क्योंकि जहां मृतक जिस पलंग पर लेटा हुआ था। हत्या के उपरांत फैले खून को किसके कहने पर साफ किया गया?

देहात थाने में कर चुका था मृतक शिकायत 

मृतक ने कुछ ही दिनों पहले देहात थाने में एक आवेदन के माध्यम से शिकायत की थी कि शुरूआती जांच में सामने आया है कि मृतक ने पिछले माह 25 जुलाई को देहात थाने में आवेदन देकर अपने भाई प्रकाश कोली पर आरोप लगाया था कि रात को सोते समय प्रकाश ने उसकी छाती पर पत्थर पटक दिया था और वह बेहोश हो गया। हालांकि इस मामले में पुलिस ने तत्समय कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। ऐसे में इस पत्र के सामने आने के बाद हत्या की आशंका को बल मिल रहा है।

मेडीकल कॉलेज की व्यवस्थाओं लगा सवालिया निशान

जिला चिकित्सालय के मेडीकल वार्ड को अभी हाल ही में मेडीकल कॉलेज के अधीन कर दिया गया हैं। अभी मेडीकल कॉलेज को इस भवन को दिए हुए ज्यादा समय नहीं हुआ हैं। आज मेडीकल वार्ड से लगे हुए टीबी वार्ड में सुरेश शाक्य नामक मरीज की दिन दहाड़े गला काट कर हत्या कर दी जाती हैं तब सवाल यह उठता है कि टीबी वार्ड में उक्त समय कोई भी कर्मचारी उपस्थित नहीं था। 

एक बाहरी व्यक्ति अस्पताल परिसर के मेडीकल वार्ड से लगे टीबी वार्ड में जाता हैं और वहां भर्ती सुरेश शाक्य नामक मरीज का गला काटकर हत्या करने के उपरांत आसानी से फरार हो जाता है। जिससे यह तथ्य स्पष्ट होता हैं कि जिला चिकित्सालय में कोई भी मरीज सुरक्षित नहीं है?