हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए की व्यक्ति नशा करने की स्थिति में ही न पहुंचे: न्यायाधाीश कुमार | Shivpuri News

शिवपुरी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री आर.बी.कुमार ने कहा कि हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए कि व्यक्ति नशा करने की स्थिति में ही न पहुचें। इसके लिए हमें नशों के दुष्परिणामों से समाज के बीच जाकर लोगों को बताना होगा। जिससे नशा मुक्ति कार्यक्रमों की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री आर.बी.कुमार आज पुराना बस स्टेण्ड शिवपुरी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित नशा मुक्ति शिविर के कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश प्रमोद कुमार, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.पी.मिश्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राधाकिशन मालवीय सहित विशेष रूप से उपस्थित थे।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.बी.कुमार ने कहा कि शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि नशा करने के बाद मनुष्य का मानसिक संतुलन खराब हो जाता है। वह सोचने की स्थिति में नहीं रहता है। नशा करने वाले व्यक्ति का परिवार जहां विघठन होता है। वहीं समाज में अव्यवस्थाएं फैलती है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है।


श्री कुमार ने कहा कि कोई भी व्यक्ति शुरू में अपने पैसे से नशा नहीं करता है, बल्कि उसे उसके यार, दोस्त एवं संगे-संबंधी कराते है, जिससे धीरे-धीरे उसे नशे की लत बढ़़ जाती है। उन्होंने कहा कि स्मैक एवं इंजेक्शन के माध्यम से जो व्यक्ति नशा करते है, वह बहुत खतरनाक है, जिले में स्मैक के कारण एक युवती एवं कर्मचारी की भी मौत हो चुकी है। जो हम सभी को सोचने पर मजबूर करती है।

जिला चिकित्सालय में नशा करने वालों के उपचार के लिए चिकित्सक उपलब्ध

श्री कुमार ने कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति के परिवार को इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि नशे करने वाले व्यक्ति को नशा छोड़ने हेतु प्रेरित करें। उसे नशे के दुष्परिणाम बताए और उसे जिला चिकित्सालय में बनाए गए पुर्नवास केन्द्र पर ले जाकर उपचार भी कराए। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय शिवपुरी में स्थित रिहैबिलिटेशन केन्द्र पर वहां के द्वितीय एवं चैथे मंगलवार को ग्वालियर से चिकित्सक आकर नशे के मरीजों का उपचार करते है। उन्होंने कहा कि स्मेक बेचने वालों की सूचना पुलिस को दें। पुलिस द्वारा सूचना देने वालों का नाम एवं पता गोपनीय रखा जाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एडीजे आर.के.मिश्र ने कहा कि नशा व्यक्ति को शुन्य बनाता है। नशे को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यह अपराध व्यक्ति, परिवार एवं समाज को नष्ट करता है। नशा करने वाले व्यक्ति को पुलिस बिना बारंट जारी किए गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने नशे से होने वाले आर्थिक एवं सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति समाज के लिए परेशानी बनता है। नशा करने वाले व्यक्ति को हमें समझाईस देकर उसे नशा करने से रोकना होगा और समाज की मुख्य धारा में जोड़ने हेतु उसे नशा न करने की सलाह देनी होगी।

विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रमोद कुमार सिंह ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से आयोजित विधिक साक्षरता शिविर के द्वारा लोगों को जहां उनके अधिकारों की जानकारी दी जाती है, वहीं नशा न करने की जानकारी देने हेतु नशामुक्ति शिविर का आज आयोजन किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि नशे की प्रवत्ति बच्चों एवं युवाओं में तेजी के साथ बढ़ रही है।

जो चिंता का विषय है लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए इसके रोकथाम के भी प्रयास करने होगें। उन्होंने कहा कि नशे को रोकने में कानूनी कार्यवाही के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी बहुत जरूरी है। श्री सिंह ने बताया कि जिला चिकित्सालय में माह के द्वितीय एवं चैथे मंगलवार को डाॅ.अनिल दोहरे एवं अर्पित बंसल मनोचिकित्सक के रूप में नशे के आदि लोगों का इलाज कर सेवाए दे रहे है। अपनी सेवाए दे रहे हैं।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राधाकिशन मालवीय ने कहा कि नशा करने वाले व्यक्ति को भी नशे की लत को कैसे छोड़े इस पर उसे सोचना होगा। नशा करने वाले व्यक्ति को धीरे-धीरे नशे की लत को कम करना होगा। नशा करने वाले व्यक्ति को उसकी रूची के अनुरूप एक्टीविटी में लगाए। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा अधिकारी श्रीमती शिखा शर्मा ने किया।