राकेश जाटव की हत्या मामले में गवाह पहुंचा न्यायालय की शरण में,दरोगा धमकी दे रहा है

शिवपुरी। एक  बस कंडक्टर और ताकतवर थाना प्रभारी के बीच की यह कानूनी लड़ाई अब चर्चा का विषय बन गई है। ग्वालियर निवासी बस कंडक्टर इसरार मोहम्मद ने सतनवाड़ा थाना प्रभारी सुनील राजपूत के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रथम श्रेणी न्यायाधीश निहारिका ब्यास के न्यायालय में परिवाद दायर किया है।

Witness in Rakesh Jatav murder case seeks court protection, alleges threats from sub-inspector.

इसरार मोहम्मद ने प्रथम श्रेणी न्यायाधीश निहारिका ब्यास की अदालत में परिवाद पेश करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें एक पुराने हत्या मामले में जबरन फर्जी गवाह बनाने की कोशिश की गई। कंडक्टर का कहना है कि यह पूरी कहानी 12 फरवरी 2022 से शुरू होती है, जब उनकी बस सुभाषपुरा थाने के सामने खराब हो गई थी। उसी दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी सुनील राजपूत ने उनसे आधार कार्ड लेकर एक कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। उस समय उन्हें यह कहकर भरोसा दिलाया गया कि यह बस जांच की सामान्य प्रक्रिया है।

मामला यहीं शांत नहीं हुआ। करीब तीन साल बाद, जुलाई 2025 में, सुभाषपुरा थाने से इसरार को फोन आया और 2022 में करसेना निवासी राकेश जाटव की हत्या के मामले में गवाही देने के लिए बुलाया गया। इसरार के मुताबिक, जब उन्होंने गवाही देने से इंकार किया, तो उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई।

इधर, थाना प्रभारी सुनील राजपूत ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि यह शिकायत निराधार है। उनका कहना है कि पुलिस जांच के दौरान कई लोगों के बयान दर्ज किए जाते हैं और संभव है कि इसरार भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा रहे हों। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हत्या मामले के आरोपी उन्हें बदनाम करने के लिए इस तरह की शिकायतें करवा रहे हैं।