सिंधिया के विजन शिवपुरी पर शनि का साया, देर से होंगे सड़क पर सुरवाया गढ़ी और जॉर्ज कैसल के दीदार

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image शिवपुरी। शिवपुरी शहर में सिंधिया के विजन शिवपुरी पर शनि की दृष्टि पड़ चुकी है,इस कारण ही इस प्रोजेक्ट के तहत दो भव्य प्रवेश द्वारो के लिए ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई और टेंडर प्रक्रिया में एक भी ठेकेदार ने भाग नहीं लिया है। शिवपुरी की कुंडली में विकास के गुण लगता है मित्र भाव मे नही है। इस कारण विकास की सांसे शुरू होने से पूर्व ही फूल जाती है।

Shani's shadow on Scindia's "Vision Shivpuri"

इससे पूर्व शिवपुरी का सीवर प्रोजेक्ट अपने निर्धारित समय से 10 साल लेट चल रहा था। शिवपुरी की लाइफ लाइन मानी जाने वाली सिंध जलावर्धन योजना अपनी पूर्णता से पूर्व ही एक्सपायर हो चुकी थी इस कारण शहर की जनता को पब्लिक पार्लियामेंट के बैनर के तले सड़कों पर उतरना पड़ा था। सिंधिया के इस विकास विजन का प्रथम प्रोजेक्ट भी अब समय की रुकावट का सामना कर रहा है।

शिवपुरी को ऐतिहासिक पहचान दिलाने के लिए कठमई (ग्वालियर मार्ग) पर 11वीं सदी की सुरवाया गढ़ी की तर्ज पर और ककरवाया (गुना मार्ग) पर जॉर्ज कैसल कोठी की डिजाइन वाले भव्य प्रवेश द्वार बनने थे। मुख्यमंत्री मॉनिट फंड से इसके लिए 1.54 करोड़ रुपए की राशि भी मंजूर हुई। लेकिन अफसोस! जब नगर पालिका ने टेंडर की बिसात बिछाई, तो एक भी ठेकेदार खेलने नहीं आया।

क्यों लग रही है देरी की नजर
दिसंबर 2025 में टेंडर जारी हुए, उम्मीद थी कि 2026 की शुरुआत में काम शुरू होगा, लेकिन खाली हाथ रही नपा को अब दोबारा निविदा प्रक्रिया दोहरानी होगी। शहर की जनता अब तंज कस रही है कि जिस शहर में सीवर के गड्ढे भरने में दशक लग गए, वहाँ स्वागत द्वार बनने में कितनी पीढ़ियां बीतेंगी?

अधिकारियों के विरोधाभासी सुर
एक तरफ विधायक देवेंद्र जैन ने फंड मंजूर कराया, वहीं नगर पालिका के एई सचिन चौहान के बयानों ने नई चर्चा छेड़ दी है। भोपाल की मीटिंग का हवाला देते हुए बताया गया कि प्रवेश द्वार के लिए सरकारी फंड शायद ही मिले और अब उम्मीद की सुई CSR फंड (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) पर टिक गई है।

कुल मिलाकर, विजन शिवपुरी की कुंडली में देरी का दोष अभी भी बरकरार है। जब तक नए टेंडर नहीं लगते और कोई ठेकेदार जिम्मेदारी नहीं लेता, तब तक शहर में आने वालों का स्वागत धूल और अधूरे वादों से ही होगा।