शिवपुरी। आम नागरिक बिजली कंपनी की लापरवाही और जुल्म को झेल रही है। यह विभाग शासकीय मान्यता प्राप्त लूटेरा विभाग है,अब खबर मिल रही है कि बिजली कंपनी ने अब नगर पालिका को 2 करोड़ का चूना लगा दिया है। नगर पालिका शिवपुरी इस करंट से मुक्ति के लिए चिट्ठी लिख रही है लेकिन बिजली कंपनी इन चिठ्ठीयो पर कार्यवाही नहीं कर रही है। इस कारण जनता का टैक्स के रूप में दिया गया पैसा जो विकास के नाम पर खर्च होता वह बिजली कंपनी नगर पालिका से लूट रही है। जैसा कि विदित है कि शहर में मड़ीखेड़ा जल आवर्धन योजना लागू होने के बाद जिन 65 बोरवेलों को डेढ़ साल पहले बंद कर दिया गया था, बिजली कंपनी आज भी उनका बिल वसूल रही है। नगर पालिका शिवपुरी ने करीब 18 महीने पहले बिजली कंपनी को उन 65 नलकूपों (बोरवेल) की सूची सौंपी थी, जो अब उपयोग में नहीं हैं या ड्राई हो चुके हैं। नियमतः इनके कनेक्शन कट जाने चाहिए थे, लेकिन विभाग की फाइलों में ये आज भी 'जीवित' हैं। बंद बोरवेलों का हर महीने करीब 12 लाख रुपए से अधिक का बिल बन रहा है। पिछले डेढ़ साल में बिजली कंपनी नगर पालिका के खाते से 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वसूल चुकी है।
सीधी कटौती: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह भुगतान नगर पालिका खुद नहीं करती, बल्कि भोपाल स्तर पर शासन से मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति (Octroi Compensation) राशि से सीधे काट लिया जाता है,इससे कर्मचारियों को वेतन के लाले पड रहे है। मार्च 2026 में ही नपा की 83.73 लाख रुपए की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि सीधे बिजली कंपनी के खाते में चली गई।
मुख्य समस्या: बिना रीडिंग के बन रहे बिल
नगर पालिका का आरोप है कि बिजली कंपनी के रिकॉर्ड में ये बोरवेल चालू दिखाए जा रहे हैं। चूंकि मौके पर कोई रीडिंग लेने नहीं जाता, इसलिए औसत (Average) या फिक्स चार्ज के आधार पर भारी-भरकम बिल जनरेट किए जा रहे हैं।
पत्र पर पत्र, फिर भी सिस्टम साइलेंट
नगर पालिका के एई सचिन चौहान के अनुसार,डेढ़ साल पहले सूची सौंप दी थी, कई बार पत्र लिख चुके हैं, फिर भी हर माह बिल जनरेट हो रहा है। वहीं बिजली कंपनी के डीजीएम श्रवण पटेल का कहना है कि अब संयुक्त टीम बनाकर बोरवेल का वेरीफिकेशन कराया जाएगा और उसके आधार पर कनेक्शन काटे जाएंगे।