शिवपुरी। लाडली बहना योजना से एक महिला का नाम हटाना रोजगार सहायक को इतना महंगा पड़ा कि जनसुनवाई में पहुंची शिकायत के बाद उसकी नौकरी ही चली गई। शिवपुरी जिले की ग्राम पंचायत भयावन में हुए इस मामले में जांच के दौरान खुलासा हुआ कि हितग्राही का नाम उसकी ही आईडी से हटाया गया था। जांच रिपोर्ट में मनमानी और लापरवाही साबित होने पर जिला प्रशासन रोजगार सहायक एवं प्रभारी सचिव पवन कर्ण की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब ग्राम भयावन निवासी नेहा चौधरी ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनका नाम जानबूझकर लाडली बहना योजना से हटा दिया गया, जिससे वे शासन की महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित हो गईं। शिकायत सामने आते ही मामले को गंभीरता से लिया गया और जांच के आदेश जारी कर दिए गए।
जनसुनवाई में पहुंची शिकायत, प्रशासन ने दिखाई सख्ती
महिला की शिकायत को कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने गंभीरता से लिया। उनके निर्देशन में पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई गई। जांच के लिए जनपद स्तर पर सेक्टर प्रभारी और प्रभारी खंड पंचायत अधिकारी की संयुक्त टीम गठित की गई, ताकि यह साफ हो सके कि नाम हटाने के पीछे तकनीकी गलती थी या फिर जानबूझकर की गई कार्रवाई।
अपनी ही आईडी से हटाया नाम, जांच में खुल गई पूरी कहानी
जब जांच टीम ने रिकॉर्ड और डिजिटल एंट्री खंगाली तो मामला और गंभीर निकलकर सामने आया।
जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट हुआ कि रोजगार सहायक पवन कर्ण ने अपनी आईडी का इस्तेमाल कर हितग्राही का नाम सूची से हटाया था। यानी यह कोई सिस्टम की गड़बड़ी या तकनीकी त्रुटि नहीं थी, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से मानवीय हस्तक्षेप का मामला निकला। प्रशासन ने जब उनसे इस पूरे प्रकरण पर जवाब मांगा, तो उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया। जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ स्वेच्छाचारिता, लापरवाही और अनुशासनहीनता जैसे गंभीर आरोप प्रमाणित हुए।
सीईओ जिला पंचायत ने जारी किए सेवा समाप्ति के आदेश
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने मामले में जीरो टॉलरेंस का संदेश देते हुए कड़ा कदम उठाया। जिला पंचायत सीईओ की ओर से पवन कर्ण की संविदा सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए गए। आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी। इस कार्रवाई को प्रशासन की ओर से हितग्राहियों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब ग्राम भयावन निवासी नेहा चौधरी ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनका नाम जानबूझकर लाडली बहना योजना से हटा दिया गया, जिससे वे शासन की महत्वपूर्ण योजना के लाभ से वंचित हो गईं। शिकायत सामने आते ही मामले को गंभीरता से लिया गया और जांच के आदेश जारी कर दिए गए।
जनसुनवाई में पहुंची शिकायत, प्रशासन ने दिखाई सख्ती
महिला की शिकायत को कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने गंभीरता से लिया। उनके निर्देशन में पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई गई। जांच के लिए जनपद स्तर पर सेक्टर प्रभारी और प्रभारी खंड पंचायत अधिकारी की संयुक्त टीम गठित की गई, ताकि यह साफ हो सके कि नाम हटाने के पीछे तकनीकी गलती थी या फिर जानबूझकर की गई कार्रवाई।
अपनी ही आईडी से हटाया नाम, जांच में खुल गई पूरी कहानी
जब जांच टीम ने रिकॉर्ड और डिजिटल एंट्री खंगाली तो मामला और गंभीर निकलकर सामने आया।
जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट हुआ कि रोजगार सहायक पवन कर्ण ने अपनी आईडी का इस्तेमाल कर हितग्राही का नाम सूची से हटाया था। यानी यह कोई सिस्टम की गड़बड़ी या तकनीकी त्रुटि नहीं थी, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से मानवीय हस्तक्षेप का मामला निकला। प्रशासन ने जब उनसे इस पूरे प्रकरण पर जवाब मांगा, तो उनका स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया। जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ स्वेच्छाचारिता, लापरवाही और अनुशासनहीनता जैसे गंभीर आरोप प्रमाणित हुए।
सीईओ जिला पंचायत ने जारी किए सेवा समाप्ति के आदेश
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने मामले में जीरो टॉलरेंस का संदेश देते हुए कड़ा कदम उठाया। जिला पंचायत सीईओ की ओर से पवन कर्ण की संविदा सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए गए। आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी। इस कार्रवाई को प्रशासन की ओर से हितग्राहियों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।