अध्यक्ष की ना से नहीं रुकेगा शहर विकास, 10 दिन में मंजूरी नहीं तो CMO खुद करेगा काम

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image शिवपुरी। निकायों में अध्यक्ष और सीएमओ की आपसी खींचतान में शहर का विकास रुक जाता है। शिवपुरी निकाय की फाइले मे अध्यछ के घर में बंदी बना ली जाती हैं। इस कारण विकास पटरी से उतर जाता हैं। विकास पर ब्रेक लगने के कारण ही नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल द्वारा जनवरी 2026 में जारी नए आदेश के तहत अब नगर पालिका अध्यक्ष, महापौर या जनप्रतिनिधि यदि किसी शासकीय योजना से जुड़ी फाइल को 10 दिन के भीतर अनुमोदित नहीं करते, तो संबंधित CMO या आयुक्त उसे अपनी जिम्मेदारी पर आगे बढ़ाकर पूरा कर सकता है।

यह आदेश सीधे तौर पर उन नगर पालिका और नगर निगमों पर असर डालेगा, जहां फाइलें अनुमोदन के इंतजार में महीनों तक धूल खाती रहती हैं और विकास कार्य राजनीतिक खींचतान, व्यक्तिगत असहमति या प्रशासनिक टकराव के चलते अटक जाते हैं। शिवपुरी नगर पालिका में यह आदेश और भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत-2, सड़क निर्माण और पेयजल सप्लाई जैसे करोड़ों रुपए के कई विकास कार्य लंबे समय से फाइलों में फंसे पड़े हैं।

अध्यक्ष/महापौर को 10 दिन के भीतर संबंधित फाइल पर निर्णय देना होगा।
यदि वे किसी कारण से फाइल अनुमोदित नहीं करते, तो उन्हें लिखित में ठोस कारण बताना होगा। यदि 10 दिन तक न तो स्वीकृति दी जाती है और न ही कोई कारण बताया जाता है, तो CMO/आयुक्त खुद उस काम को अपनी जिम्मेदारी पर पूरा कर सकता है।
इसके बाद उस काम के लिए जनप्रतिनिधि की अनुमति जरूरी नहीं होगी।

शिवपुरी में अटकी फाइलों पर अब सीधा असर
इस आदेश का सबसे बड़ा असर शिवपुरी नगर पालिका में देखने को मिल सकता है, जहां लंबे समय से कई महत्वपूर्ण फाइलें अध्यक्ष की स्वीकृति के इंतजार में अटकी हुई बताई जा रही हैं। नगर पालिका सूत्रों के अनुसार, शहर विकास से जुड़े कई बड़े कामों की फाइलें महीनों से लंबित हैं, जिनमें करोड़ों रुपए के भुगतान और नई परियोजनाओं की स्वीकृति शामिल है। अब शासन के नए आदेश के बाद इन सभी फाइलों पर CMO को कार्रवाई का अधिकार मिल गया है, जिससे अटके कामों को गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

CMO इशांक धाकड़ ने अध्यक्ष को लिखा पत्र
शासन के निर्देशों के पालन में नगर पालिका CMO इशांक धाकड़ ने भी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में लंबित फाइलों और कार्यों को समय-सीमा में अनुमोदित करने का आग्रह किया गया है। CMO ने साफ संकेत दिया है कि यदि 10 दिन के भीतर लंबित कार्यों पर निर्णय नहीं होता, तो शासन के आदेश के अनुसार वे उन्हें स्वयं अनुमोदित कर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

शहर विकास के करोड़ों के काम फंसे, जनता भुगत रही देरी
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका में इस समय कई ऐसे काम हैं, जो अध्यक्ष की स्वीकृति के अभाव में या भुगतान लंबित होने के कारण रुके हुए हैं।

1. प्रधानमंत्री आवास योजना: 7 करोड़ का भुगतान लंबित
शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार का करीब 7 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। यह भुगतान फाइल अध्यक्ष के पास अनुमोदन के लिए भेजी गई, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इसका सीधा असर योजना की रफ्तार और आगे होने वाले निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है।

2. 39 वार्डों की सड़कें फाइलों में अटकी
मुख्यमंत्री नगरीय अधोसंरचना योजना के तहत शहर के 39 वार्डों में करीब 15 से 20 नई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। लेकिन इस योजना की वित्तीय स्वीकृति अब तक लंबित बताई जा रही है। यानी शहर की जिन सड़कों पर जनता चलने की उम्मीद कर रही है, वे अभी भी फाइलों में ही दौड़ रही हैं।

3. अमृत-2 योजना: 14 करोड़ का भुगतान अटका
शहर की पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए अमृत-2 योजना के तहत कई क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने, जलापूर्ति सिस्टम मजबूत करने और अन्य कार्य प्रस्तावित हैं। लेकिन इस योजना से जुड़े ठेकेदार का करीब 14 करोड़ रुपए का भुगतान अनुमोदन के अभाव में अटका हुआ है। यदि यह भुगतान जल्द नहीं हुआ, तो शहर की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़े कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है।

4. फिल्टर प्लांट पर भी अनुमोदन की मार
शहर के फिल्टर प्लांट में एलम और ब्लीचिंग जैसी जरूरी सामग्री की आपूर्ति के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया गया, उसका काम भी अनुमोदन के इंतजार में बताया जा रहा है। यह मामला सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि पेयजल की गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।

अब बढ़ेगी CMO की जवाबदेही भी
शासन के इस आदेश का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि अध्यक्ष की फाइल रोकने की ताकत सीमित हुई है, बल्कि इसके साथ ही CMO और आयुक्त की जवाबदेही भी बढ़ गई है। अब अधिकारी यह कहकर नहीं बच पाएंगे कि फाइल अध्यक्ष के पास पड़ी थी, इसलिए काम नहीं हो पाया।

नगर पालिका CMO इशांक धाकड़ ने कहा
वरिष्ठ कार्यालय से आए आदेश के क्रम में मैंने भी लंबित फाइलों के अनुमोदन के लिए अध्यक्ष को पत्र जारी कर दिया है। अगर 10 दिन में किसी काम को अनुमोदित नहीं किया जाता, तो उसके पीछे लिखित कारण देना होगा। अन्यथा सभी लंबित कार्य और भुगतान मेरे द्वारा ही संपादित कराए जाएंगे।

नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
हम शासन के सभी आदेशों का सम्मान करते हैं। हम तो खुद चाहते हैं कि जनता के सभी काम समय-सीमा में हों। हमने कभी किसी काम को नहीं रोका। अध्यक्ष के साथ CMO को भी समय पर काम करना चाहिए। बाकी शासन का यह आदेश अच्छा है। शहर विकास कार्य जितनी जल्द पूर्ण हों उतनी ही अच्छी बात है।