शिवपुरी। शहर सहित पूरे जिले में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि अब शहर की कोई भी गली, मोहल्ला या सड़क पूरी तरह सुरक्षित नहीं बची। सुबह स्कूल जाते बच्चे हों, शाम को टहलने निकले बुजुर्ग हों या दोपहिया वाहन से गुजरते राहगीर—हर कोई इन आवारा कुत्तों के डर में जी रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों में 859 लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं। यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा है। इसके अलावा सैकड़ों ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जिन्होंने निजी अस्पतालों या क्लीनिकों में इलाज करवाया हो।सबसे ज्यादा डॉग बाइट के मामले पुरानी शिवपुरी, कमालगंज, लाल माटी, लुधावली, सईसपुरा, तलैया मोहल्ला और गौशाला क्षेत्र से सामने आ रहे हैं। इन इलाकों में लोग अब बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं।
रोज अस्पताल पहुंच रहे 10 से 20 पीड़ित
जिला अस्पताल की स्थिति यह बता रही है कि शहर में यह समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है। लगभग हर दिन 10 से 20 लोग कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और बाइक सवार सबसे अधिक शामिल हैं। कई मामलों में कुत्ते झुंड बनाकर हमला कर रहे हैं। राह चलते लोगों को घेर लेना, बाइक के पीछे दौड़ना और बच्चों पर झपट पड़ना अब आम दृश्य बन चुके हैं। शहर में लोगों के बीच यह डर लगातार बढ़ रहा है कि कहीं अगला शिकार वे खुद या उनके परिवार का कोई सदस्य न बन जाए।
नगर पालिका की जिम्मेदारी, लेकिन जमीन पर असर कमजोर
नियमों के मुताबिक शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और जरूरत पड़ने पर उन्हें पकड़कर प्रबंधन करना नगर पालिका की जिम्मेदारी है। नगर पालिका का दावा है कि सूचना मिलने पर कुत्तों को पकड़ा जा रहा है, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। अगर कार्रवाई प्रभावी होती, तो शहर में हर रोज इतनी बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के हमले का शिकार होकर अस्पताल नहीं पहुंचते। शहरवासियों का सवाल साफ है—जब खतरा हर गली में दिख रहा है, तो समाधान सिर्फ कागजों में क्यों नजर आ रहा है?
जिला अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध, लेकिन अंचल में किल्लत
राहत की बात यह है कि फिलहाल जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है, जिससे पीड़ितों को तत्काल इलाज मिल पा रहा है। लेकिन चिंता की बात यह है कि जिले के कई ग्रामीण और अंचलीय स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन की भारी कमी बनी हुई है। कोलारस, बैराड़, करैरा, खनियाधाना, पिछोर, पोहरी जैसे कई इलाकों में वैक्सीन का स्टॉक बेहद कम है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को या तो जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है, या फिर बाजार से महंगी वैक्सीन खरीदकर लगवानी पड़ रही है।
कानून और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी 2025 में सख्त टिप्पणियां और निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि आक्रामक और जोखिम वाले कुत्तों के प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन को जनता की सुरक्षा और पशु नियमों के बीच संतुलन बनाना होगा। साथ ही स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने पर भी जोर दिया गया था। यानी अब यह सिर्फ स्थानीय शिकायत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है।
ये बोले जिम्मेदार
इशांक धाकड़, सीएमओ, नपा
हम जल्द ही कुत्तों के लिए कांजी हाउस में एबीसी सेंटर बना रहे हैं। डॉक्टर आदि की व्यवस्था हो चुकी है। इस महीने के अंत तक यह शुरू हो जाएगा। कुत्तों को पकड़कर वहां उनकी नसबंदी की जाएगी। इसके बाद उन्हें वहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया है।
डॉ. संजय ऋषिश्वर, सीएमएचओ शिवपुरी
हमारे यहां एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। जहां से डिमांड आती है, हम अनुपातिक आधार पर उपलब्ध करवा रहे हैं। बड़ी किल्लत जैसी स्थिति नहीं है।
आंकड़ों की जुबानी डॉग बाइट की कहानी
जनवरी फरवरी मार्च
कुत्ता 390 469
बिल्ली 21 26
बंदर 09 07
अन्य 08 19
इन आंकड़ों से साफ है कि फरवरी की तुलना में मार्च में कुत्तों के काटने के मामले और बढ़े हैं। यानी समस्या थमने के बजाय लगातार गंभीर होती जा रही है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों में 859 लोग कुत्तों के काटने के बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं। यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा है। इसके अलावा सैकड़ों ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जिन्होंने निजी अस्पतालों या क्लीनिकों में इलाज करवाया हो।सबसे ज्यादा डॉग बाइट के मामले पुरानी शिवपुरी, कमालगंज, लाल माटी, लुधावली, सईसपुरा, तलैया मोहल्ला और गौशाला क्षेत्र से सामने आ रहे हैं। इन इलाकों में लोग अब बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं।
रोज अस्पताल पहुंच रहे 10 से 20 पीड़ित
जिला अस्पताल की स्थिति यह बता रही है कि शहर में यह समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है। लगभग हर दिन 10 से 20 लोग कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और बाइक सवार सबसे अधिक शामिल हैं। कई मामलों में कुत्ते झुंड बनाकर हमला कर रहे हैं। राह चलते लोगों को घेर लेना, बाइक के पीछे दौड़ना और बच्चों पर झपट पड़ना अब आम दृश्य बन चुके हैं। शहर में लोगों के बीच यह डर लगातार बढ़ रहा है कि कहीं अगला शिकार वे खुद या उनके परिवार का कोई सदस्य न बन जाए।
नगर पालिका की जिम्मेदारी, लेकिन जमीन पर असर कमजोर
नियमों के मुताबिक शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और जरूरत पड़ने पर उन्हें पकड़कर प्रबंधन करना नगर पालिका की जिम्मेदारी है। नगर पालिका का दावा है कि सूचना मिलने पर कुत्तों को पकड़ा जा रहा है, लेकिन जमीन पर हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। अगर कार्रवाई प्रभावी होती, तो शहर में हर रोज इतनी बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के हमले का शिकार होकर अस्पताल नहीं पहुंचते। शहरवासियों का सवाल साफ है—जब खतरा हर गली में दिख रहा है, तो समाधान सिर्फ कागजों में क्यों नजर आ रहा है?
जिला अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध, लेकिन अंचल में किल्लत
राहत की बात यह है कि फिलहाल जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है, जिससे पीड़ितों को तत्काल इलाज मिल पा रहा है। लेकिन चिंता की बात यह है कि जिले के कई ग्रामीण और अंचलीय स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन की भारी कमी बनी हुई है। कोलारस, बैराड़, करैरा, खनियाधाना, पिछोर, पोहरी जैसे कई इलाकों में वैक्सीन का स्टॉक बेहद कम है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को या तो जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है, या फिर बाजार से महंगी वैक्सीन खरीदकर लगवानी पड़ रही है।
कानून और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी 2025 में सख्त टिप्पणियां और निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि आक्रामक और जोखिम वाले कुत्तों के प्रबंधन में स्थानीय प्रशासन को जनता की सुरक्षा और पशु नियमों के बीच संतुलन बनाना होगा। साथ ही स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने पर भी जोर दिया गया था। यानी अब यह सिर्फ स्थानीय शिकायत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है।
ये बोले जिम्मेदार
इशांक धाकड़, सीएमओ, नपा
हम जल्द ही कुत्तों के लिए कांजी हाउस में एबीसी सेंटर बना रहे हैं। डॉक्टर आदि की व्यवस्था हो चुकी है। इस महीने के अंत तक यह शुरू हो जाएगा। कुत्तों को पकड़कर वहां उनकी नसबंदी की जाएगी। इसके बाद उन्हें वहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया है।
डॉ. संजय ऋषिश्वर, सीएमएचओ शिवपुरी
हमारे यहां एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। जहां से डिमांड आती है, हम अनुपातिक आधार पर उपलब्ध करवा रहे हैं। बड़ी किल्लत जैसी स्थिति नहीं है।
आंकड़ों की जुबानी डॉग बाइट की कहानी
जनवरी फरवरी मार्च
कुत्ता 390 469
बिल्ली 21 26
बंदर 09 07
अन्य 08 19
इन आंकड़ों से साफ है कि फरवरी की तुलना में मार्च में कुत्तों के काटने के मामले और बढ़े हैं। यानी समस्या थमने के बजाय लगातार गंभीर होती जा रही है।