खनियाधाना में 1 अप्रैल से मनेगा प्रवेशोत्सव, आंगनवाड़ियों में गूंजेगा विद्यारंभ का उल्लास

Adhiraj Awasthi

खनियाधाना। शिक्षा की अलख जगाने और नौनिहालों के भविष्य को गढ़ने के लिए खनियाधाना विकासखंड अब पूरी तरह तैयार है। स्कूल चले हम अभियान के तहत आगामी 1 अप्रैल से विकासखंड में शिक्षा का महापर्व यानी प्रवेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। बीआरसीसी संजय भदोरिया और महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर के नेतृत्व में शिक्षा और महिला बाल विकास विभाग ने हाथ मिलाया है, ताकि कोई भी बच्चा स्कूल की चौखट से महरूम न रहे। आंगनवाड़ियों में विद्यारंभ उत्सव की गूँज और स्कूलों में भविष्य से भेंट जैसे अभिनव कार्यक्रमों के जरिए इस बार खनियाधाना के शैक्षणिक परिदृश्य को एक नई ऊंचाई देने की तैयारी है।

इस दौरान ब्लॉक के समस्त शासकीय विद्यालयों में नए विद्यार्थियों के प्रवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा अनामांकित बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। शाला प्रबंधन समिति एवं शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की बैठक आयोजित कर शत-प्रतिशत नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु कार्ययोजना बनाई जाएगी।

साथ ही 04 अप्रैल को भविष्य से भेंट कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों पर "विद्यारंभ उत्सव" का आयोजन भी किया जा रहा है। शाला पूर्व शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत बच्चों के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

नगर के वार्ड क्रमांक 14 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर ने बच्चों एवं उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरित किए तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर पर्यवेक्षक वर्षा जैन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता स्वीटी पाण्डे, शाहीन फातिमा एवं रूबी जैन, सहायिकाएं, अभिभावक एवं बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा मनमोहक नृत्य, गीत एवं कविताओं की प्रस्तुतियां दी गईं।

इसी क्रम में आज खनियाधाना बीआरसी कार्यालय में बीआरसीसी संजय भदौरिया एवं महिला बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर द्वारा संयुक्त रूप से सीएसी एवं बीएसी साथियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रमों को सफल बनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस आयोजन से परिवार एवं समुदाय में शाला पूर्व शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा बच्चों के विद्यालय में प्रवेश और उनकी शैक्षणिक निरंतरता को बल मिलेगा।