शिवपुरी। शिवपुरी जिला कृषि पर आधारित जिला है। शिवपुरी जिले की कई तहसील और विकासखंड में अलग अलग किस्म की फसल की पैदावार की जाती है,इसमें प्रमुख फसल है मूगफली,गुजराज की गिरनार मूंगफली की पैदावार शिवपुरी जिले में होने लगी है। इस कारण जिले में मूंगफली का उत्पादन आधारित होने के कारण इसे एक जिला, एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है।
अब मूंगफली की नई किस्में,गुजरात की मूल फसल गिरनार-4 और गिरनार-5, शिवपुरी जिले की नई पहचान बन गई हैं। मोहन सरकार ने भी मध्य प्रदेश के जिलों की विकास यात्रा में मूंगफली की इन किस्मों को उपलब्धि के रूप में शामिल किया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने जिलों की विकास यात्रा के तहत एक किताब प्रकाशित की है। इस किताब में संबंधित जिलों की उपलब्धियों को शामिल किया गया है। शिवपुरी जिले में सड़क, पुल, स्कूल बिल्डिंग, कॉलेज भवन, लैपटॉप जैसी अन्य सरकारी योजनाएं शामिल हैं। कृषि के क्षेत्र में मूंगफली की नई किस्में, गिरनार-4 और गिरनार-5, को भी शामिल किया गया है।
दरअसल, गुजरात के वैज्ञानिकों ने मूंगफली की ये नई किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों का बीज शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग के किसानों द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसलिए मूंगफली की दोनों किस्मों के बीज पूरे मध्य प्रदेश में केवल शिवपुरी जिले में तैयार हो रहे हैं। इस कारण मूंगफली की इन किस्मों से शिवपुरी जिले को नई पहचान मिली है।
स्वास्थ्य और आय का दोहरा लाभ:हृदय रोग में फायदेमंद मूंगफली
कृषि वैज्ञानिकों ने मूंगफली की किस्में, गिरनार-4 और गिरनार-5, विकसित की हैं। ये नई किस्में हृदय रोग में लाभप्रद हैं। सरकार ने भी माना है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उच्च कोलेस्ट्रॉल वाली गिरनार-4 और गिरनार-5 किस्मों के मूंगफली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। यानी हाई ओलिक एसिड की वजह से हृदय रोग की संभावना कम हो जाएगी।
2.50 करोड़ की लागत से शिवपुरी में बनेगा मूंगफली सीड हब
शिवपुरी जिले में मूंगफली का रकबा कुछ सालों में बढ़ चुका है। करैरा, पिछोर, खनियाधाना और नरवर में मूंगफली का उत्पादन सबसे ज़्यादा हो रहा है। शिवपुरी जिले की मूंगफली गुजरात और महाराष्ट्र को सप्लाई होती है। यहाँ से विदेशों में भी शिवपुरी की मूंगफली का निर्यात होता है। ऐसे में शिवपुरी में मूंगफली का सीड हब मंज़ूर हुआ है। 2.50 करोड़ की लागत से सीड हब प्रस्तावित है।
अब मूंगफली की नई किस्में,गुजरात की मूल फसल गिरनार-4 और गिरनार-5, शिवपुरी जिले की नई पहचान बन गई हैं। मोहन सरकार ने भी मध्य प्रदेश के जिलों की विकास यात्रा में मूंगफली की इन किस्मों को उपलब्धि के रूप में शामिल किया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने जिलों की विकास यात्रा के तहत एक किताब प्रकाशित की है। इस किताब में संबंधित जिलों की उपलब्धियों को शामिल किया गया है। शिवपुरी जिले में सड़क, पुल, स्कूल बिल्डिंग, कॉलेज भवन, लैपटॉप जैसी अन्य सरकारी योजनाएं शामिल हैं। कृषि के क्षेत्र में मूंगफली की नई किस्में, गिरनार-4 और गिरनार-5, को भी शामिल किया गया है।
दरअसल, गुजरात के वैज्ञानिकों ने मूंगफली की ये नई किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों का बीज शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग के किसानों द्वारा तैयार किया जा रहा है। इसलिए मूंगफली की दोनों किस्मों के बीज पूरे मध्य प्रदेश में केवल शिवपुरी जिले में तैयार हो रहे हैं। इस कारण मूंगफली की इन किस्मों से शिवपुरी जिले को नई पहचान मिली है।
स्वास्थ्य और आय का दोहरा लाभ:हृदय रोग में फायदेमंद मूंगफली
कृषि वैज्ञानिकों ने मूंगफली की किस्में, गिरनार-4 और गिरनार-5, विकसित की हैं। ये नई किस्में हृदय रोग में लाभप्रद हैं। सरकार ने भी माना है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उच्च कोलेस्ट्रॉल वाली गिरनार-4 और गिरनार-5 किस्मों के मूंगफली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। यानी हाई ओलिक एसिड की वजह से हृदय रोग की संभावना कम हो जाएगी।
2.50 करोड़ की लागत से शिवपुरी में बनेगा मूंगफली सीड हब
शिवपुरी जिले में मूंगफली का रकबा कुछ सालों में बढ़ चुका है। करैरा, पिछोर, खनियाधाना और नरवर में मूंगफली का उत्पादन सबसे ज़्यादा हो रहा है। शिवपुरी जिले की मूंगफली गुजरात और महाराष्ट्र को सप्लाई होती है। यहाँ से विदेशों में भी शिवपुरी की मूंगफली का निर्यात होता है। ऐसे में शिवपुरी में मूंगफली का सीड हब मंज़ूर हुआ है। 2.50 करोड़ की लागत से सीड हब प्रस्तावित है।
