SHIVPURI NEWS - अस्पताल के गेट का टूटा है रास्ता,टूटा जाल में फंसता है ऑटो का पहिया

Bhopal Samachar

शिवपुरी। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार जिन महिलाओं की दम पर अपनी सरकार बनाकर बैठी है। आज उनी महिलाओं के लिए मुसीबत बनी हुई है। जिला अस्पताल के पिछले गेट के रास्ते से जब महिलाए नसबंदी के बाद इस गेट से होकर गुजरती है तो उन्हे असहनीय दर्द झेलना पडता है इस दर्द का कारण जिला अस्पताल का पिछला गेट का वह रास्ता है जो पिछले एक माह बीतने के बाद भी ठीक नहीं हुए है।

इस गेट के टूटे जाल में आटों का टायर भी फंस जाता है जिसे धक्का लगाकर निकालना पढता है। अस्पताल प्रबंधक के द्धारा अन्य सुविधाओं में लाखों रुपये खर्च किये गये है लेकिन दर्द का कारण बना इस गेट के रास्ते पर अभी लोहे का जाल नहीं लग सका है।

महिलाओं को यहां झेलना पडता है असहनीय दर्द

जिला चिकित्सालय का पिछला गेट कई दिनो से खराब पडा है इसको अस्पताल प्रबंधक अभी तक ठीक नहीं करवा सके है। जबकि इस गेट से दर्जनों महिलाओं का आना जाना होता है। जब जिला अस्पताल में किसी भी महिला को नसबंदी कराने के लिए लाया या ले जाया जाता है तो इस गेट से ही होकर उसे गुजरना पड़ता है।

नसबंदी उपरांत टांके लगवाने के बाद जब परिजन महिला को टैक्सी या अन्य वाहन से घर लेकर जाते है तो बहान को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है

जिससे महिला को असहनीय दर्द झेलना पडता है। कभी कभी तो टैक्सी का टायर इस जाल में फस जाता है जिसे महिला के परिजनों को ढक्का लगाकर निकालना पडता है। दरअसल इस गेट पर एक लोहे का जाल लगा हुआ है जिसमें लोह के गोल पाइप लगे है। लेकिन इस जाल में से कुछ पाइप बीच में से टूट गये है। जिससे अस्पताल में आने वाले वाहनों के टायर फंस जाते है। जिसे ऑटो में धक्का लगाकर बाहर निकाला जाता है।

पानी, बैठने व साफ सफाई की नहीं कोई व्यवस्था

जिला चिकित्सालय शिवपुरी में नसबंदी रूम के बाहर नसबंदी कराने आने वाली महिला के साथ आने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। सिस्टम ऐसा है कि नसबंदी कराने आने वाली महिलाओं के परिजन धरती पर बैठने और लेटने के लिए मजबूर होना पड़ता है। नसबंदी वाले रूप के बाहर लोगों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है।

परिजनों के साथ आने वाले छोटे - छोटे बच्चों को भी परिजन धरती पर सुलाने के लिए मजबूर है। यहां न तो पानी की कोई व्यवस्था है और ना ही कोई साफ सफाई की कोई व्यवस्था है। अस्पताल प्रबंधन ने मैनेजमेंट के नाम पर लाखो रुपये खत्म कर दिये लेकिन सवाल यहां पर यह भी उठता है कि अभी तक इन परेशानियों का समाधान क्यों नहीं हो सका है। इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए जिला अस्पताल सिविल सर्जन डॉ.बीएल यादव से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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