SHIVPURI NEWS- नाला करेगा सीवर लाइन को क्लीन, गुरुत्वाकर्षण शक्ति करेगी वर्क-मैनपावर रहित रहेगा सिस्टम

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शिवपुरी।
शिवपुरी में एक दशक से अधिक समय से चल रहे सीवर प्रोजेक्ट के क्रम में अब सीवर लाइन का साफ करने के लिए 'नाला-टैपिंग' तैयार किए जा रहे हैं। इस योजना के तहत सीवर लाइन को नाले के पानी से साफ किया जाएगा। इसके लिए शहर में आइस फैक्ट्री के पास और जाधव सागर के पास नाले के पानी को रोका जाएगा। इस पानी को सीवर लाइन में डाला जाएगा ताकि पानी का फ्लो तेज हो जाए और सीवर की पाइप लाइन स्वतः साफ होती रहे। यह पूरा सिस्टम गुरुत्वाकर्षण बल के आधार पर काम करेगा।

गर्मी में होगा सहायक ईई पीएचई एलपी सिंह के अनुसार सामान्यत नाला टैपिंग सिस्टम गर्मियों के दिनों में काफी सहायक होगा। उनके अनुसार इसका प्रमुख कारण यह है कि गर्मी के दिनों में घर में पानी काफी कम आता है। इस कारण लोग बाथरूम में भी काफी कम पानी उपयोग करते हैं। ऐसे में सीवर में पानी का फ्लो कम हो जाया करेगा। इन हालातों में नाले का जो पानी सीवर लाइन में जाएगा उसे पानी का फ्लो ढि बढ़ेगा और सीवर साफ होता रहेगा।

जीरो मेंटेनेंस पर होगा काम
बताया रजा है कि इस पूरे सिस्टम को फंक्शन करने में जीरी मेंटेनेंस कॉस्ट आऐगी। क्यों यहां ने तो किसी कर्मचारी को ड्यूटी लगाई जानी है। और न ही इसमें खराब होने वाला कोई उपकरण होगा। बात अगर मेंटेनेंस की करें तो सिस्टम में सिर्फ गेट अकेले ही मेंटेनेंस लायक होंगे। इसके अलावा मैन पावर का उपयोग सिर्फ नाला ओवर फ्लो होने की स्थिति में गेट खोलने के लिए होगा।

50 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा सिस्टम
ईई एलपी सिंह के अनुसार यह पूरा सिस्टम लगभग 50 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा है। एक जगह पर 22 लाख रुपये की लागत से नाला टैपिंग बना है जबकि आइस फैक्ट्री के पास करीब 25 लाख रुपये की लागत से सिस्टम तैयार हो रहा है। ऐसे में पूरे सिस्टम 50 लाख रुपये के अंदर ही फंक्शन में आ जाएगा।

गंदे पानी का होगा पुनः उपयोग
घरों में उपयोग किया गया पानी जब नाले में आएगा तो यहां इस सिस्टम के माध्यम से पानी को फिल्टर करके उसका पुनः सीवर की सफाई में उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार ऐसे में यह सिस्टम काफी मददगार साबित होने वाला है।

बीच नाले में बनेगा स्टाप डेम
नाले में स्टाप डेम की तरह पानी को रोका जाएगा। इस रोके गए पानी को एक चैंबर में एकत्रित किया जाएगा। चैंबर में जाली लगाई जाएगी जिससे पानी स्वतः फिल्टर होकर चैंबर में आएगा। चैंबर में से कनेक्शन कर कर पानी को सीवर लाइन में डाला जाएगा। ईई पीएचई के अनुसार सीवर लाइन की गहराई नाले से काफी अधिक है, ऐसे में पानी तेजी के साथ सीवर लाइन में जाएगा और इस पानी से सीवर लाइन में पानी का फ्लो और तेज हो जाएगा, जिससे सीवर स्वतः साफ होता रहेगा।

इस पूरे सिस्टम में जाधव सागर के पास बनाए जा रहे सिस्टम में एक गेट जबकि आइस फैक्ट्री के पास बनाए गए सिस्टम में तीन गेट लगाए जा रहे हैं। पीएचई के ईई एलपी सिंह का कहना है कि इन गेट का उपयोग उस स्थिति में किया जाएगा जब बारिश के दिनों में नाला ओवर फ्लो जाता है। उस समय इन गेट को खोला जाया करेगा ताकि पानी रुके नहीं।