बदरवास BRC ऑफिस में हुए लाखों रुपए के कंटीजेंसी, BRC सहित कर्मचारियों को नोटिस जारी- Badarwas News

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शिवपुरी।
एक माह पूर्व बदरवास बीआरसी कार्यालय में बीआरसी अंगद सिंह तोमर सहित ऑफिस कर्मचारियों ने मिलकर बदरवास विकासखंड के जनपद शिक्षा केंद्र में विभिन्न स्कूलों में स्कूल कंटनजेंसी की राशि को लेकर घोटाला सुर्खियों में आया था इस घोटाले को शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने प्रमुखता से प्रकाशित कर उजागर किया था। इस घोटाले की जांच पूर्ण होकर कलेक्टर की टेबल तक पहुंच चुकी है। इसी क्रम में कलेक्टर शिवपुरी रविन्द्र कुमार चौधरी ने संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

बदरवास विकाखंड में कंटनजेंसी की राशि भुगतान के मामले में अनियमितता सामने आई थी जिसमें जनपद शिक्षा केंद्र के कुछ कर्मचारियों द्वारा शिक्षकों से ओटीपी लेकर चुनिंदा फर्मों को भुगतान कर दिया था। इस मामले में चार सदस्सीय जांच कमेटी गठित की गई थी, जिसमें डीपीसी के माध्यम से सीईओ जिला पंचायत उमराव सिंह मरावी को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर सीईओ ने भुगतान में गड़बड़ी पाए जाने की बात तत्समय स्वीकारी थी और कार्रवाई का प्रस्ताव कलेक्टर को प्रेषित कर दिया था।

कलेक्टर ने कमेटी की रिपोर्ट और सीईओ के प्रस्ताव के आधार पर शिकायतकर्ता शिक्षकों के अलावा जांच कमेटी द्वारा जांच की जद में लिए गए अन्य शिक्षकों सहित जनपद शिक्षा केंद्र बदरवास के भृत्य, लेखापाल सहित बीआरसीसी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सीईओ जिला पंचायत उमराव सिंह मरावी ने बताया कि नोटिस का जवाब निर्धारित समय सीमा में आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इससे पूर्व BRC अंगद पर खेल सामग्री घोटाले में भी है लिप्त

बदरवास BRC अंगद सिंह तोमर जब शिवपुरी बीआरसी थे जब खेल सामग्री खरीद के घोटाले के भी आरोप लगे थे। इस घोटाले की जांच भी जारी है,लेकिन इस घोटाले की जांच 1 साल से चल रही है उस जांच पर भी उंगली उठ रही है कि यह जांच कब पूरी होगी। अब बताया जा रहा है कि खेल घोटाले की जांच भी पुन:तेजी से शुरू कर दी है। इस जांच के बाद संबंधितो को नोटिस देने की तैयारी चल रही है।

6 साल तक स्कूल नही गए थे यह भी है एक उपस्थिती घोटाला

बदरवास बीआरसी अंगद सिंह तोमर शिवपुरी के प्रभारी बीआरसी 6 साल तक रहे। अपनी वाकपटुता के कारण यह 6 साल तक प्रभारी की कुर्सी पर डटे रहे। अंगद सिंह तोमर को जब शिवपुरी बीआरसी का प्रभारी के रूप में चार्ज दिया गया था,लेकिन इन सालो में इन्होने अपना मूल काम स्कूल जाकर बच्चों को अध्ययन करना नही किया,सीधे शब्दों मे लिखे तो मास्टर छोड अधिकारी की कुर्सी पर जमे रहे और स्कूल नही गए और वेतन अपने स्कूल के स्कुल से लेते रहे है। इस उपस्थिती घोटाले को लेकर शिक्षाविदो का कहना है कि 6 साल की उनका वेतन वापसी के आदेश भी होने चाहिए क्यो की उन्होंने एक भी दिन बच्चो को नही पढाया है।