Shivpuri News- मुनि कुलदर्शन ने कहा कि संतो के विचार एनर्जी बूस्टर होते हैं,ऊर्जा का संचार होता है

शिवपुरी।
अपने सांसारिक  जीवन को स्वर्ग बनाना है तो संत और सज्जन व्यक्ति के संपर्क में रहो इससे जीवन में अच्छाइयों का प्रवेश होगा और जिसके जीवन में अच्छाइयों आ जाती है उसका जीवन स्वयमेव स्वर्ग बन जाता है। दूसरी ओर गलत साहित्य और गलत संसर्ग करने वाले व्यक्ति के जीवन को नारकीय होने से कोई बचा नहीं सकता।

यह कथन है जैन संत कुलदर्शन विजय जी के जो उन्होंने आराधना भवन में आयोजित धर्म सभा में व्यक्त किए। धर्म सभा में उन्होंने जीवन में अच्छाइयों का प्रवेश किस तरीके से हो इस पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया। प्रारंभ में जैनाचार्य कुलचंद्र सूरि जी ने धर्मावलंबियों को मांगलिक पाठ सुनाया।

अपने प्रवचन में केडी महाराज के नाम से विख्यात बाल मुनि कुलदर्शन विजय जी ने भिखारी के जीवन की एक कथा से अपनी बात प्रारंभ की। उन्होंने बताया कि भिखारी जिस जगह पर बैठकर जीवन भर एक.एक पैसे की भीख मांगता रहा और भीख मांगते.मांगते मर गया।

जब उस जगह की सफाई हेतु खुदाई की गई तो उसमें एक बहुत बड़ा खजाना मिला। इस प्रसंग से उन्होंने स्पष्ट किया कि इंसान खजाने की खोज में बाहर भटकता है। लेकिन सबसे बड़ा खजाना उसके भीतर है। कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे जग माहि। जीवन की सार्थकता उस आंतरिक खजाने को खोजने की है।

महाराज श्री ने कहा कि उस आंतरिक खजाने तक पहुंचने का मार्ग देव गुरु और धर्म ही बताते हैं। आंतरिक खजाने तक पहुंचने के लिए सबसे पहला सूत्र यह है कि संत और सज्जनों के सम्पर्क में रहो। इससे क्या लाभ हैं इसे भी उन्होंने स्पष्ट किया कि संतों के पास रहने से जीवन में अच्छी ऊर्जा का संचार होता है। इसे कहा जा सकता है इनर्जी का बूस्टर डोज। अच्छा वातावरण मिलता है और सलाह भी अच्छी मिलती है।

जबकि दुर्जनों के संसर्ग से भटकाव के अतिरिक्त और कुछ नहीं मिलता। संत कुलदर्शन विजय जी ने आंतरिक खजाने की खोज का दूसरा सूत्र यह दिया कि संतों की बाणी का श्रवण करना चाहिए। संतों की बाणी से कुछ न कुछ अच्छा मिलता है और इससे जीवन पथ सुगम होता है। जीवन में स्वर्ग उतारने के लिए तीसरा सूत्र है कि गुरूजनों का स्पर्श सानिध्य। उन्होंने कहा कि गुरू के स्पर्श से जो आर्शीवाद मिलता है उसका कोई मुकाबला नहीं है। स्पर्श सानिध्य का लाभ हमें जब भी मिले उठाना चाहिए।

आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी की जयंती मनी

पोषद भवन में आज स्थानकवासी जैन सम्प्रदाय के आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी महाराज साहब की जन्म जयंती मनाई गई। इस अवसर पर जैन धर्माबलंबियों ने नवकार महामंत्र का जाप किया और गुरूदेव के प्रति अपनी मंगल कामना व्यक्त की। जाप के पश्चात प्रभावना का लाभ राजेश कोचेटा ने उठाया।

आई की तपस्या के उपलक्ष्य में मंदिर में हुआ पूजन

सांखला परिवार की श्रीमती रूचि रितेश सांखला की अऋाई तपस्या के उपलक्ष्य में पार्श्वनाथ जैन मंदिर में धूमधाम से पंच कल्याणक पूजन का आयोजन किया गया। जिसमें पूर्ण भक्तिभाव के साथ भगवान की पूजा की गई और भजन गाये गए। कार्यक्रम में जैनाचार्य कुलचंद्र सूरि जी और पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी तथा साध्वी मंडल की प्रेरक तथा गरिमापूर्ण उपस्थिति से कार्यक्रम में चारचांद लग गए। पंच कल्याणक पूजन के पश्चात तेजमल सांखला परिवार द्वारा साधर्मिक वात्सल्य का लाभ लिया गया।