मतदाता मौन+प्रत्याशी परेशान+विशेषज्ञो के विश्लेषण फैल = नगरीय निकाय चुनाव शिवपुरी Ex-Rey @ Lalit Mudgal- Shivpuri News

शिवपुरी। इस उमस भरे मौसम में चुनावी मौसम गर्माहट बड़ा रहा हैं। मतदान की अब उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है,और प्रत्याशियों ने अब मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पूरी ताकत लगा दी है लेकिन इस चुनाव मे मतदाता मौन है,इसलिए प्रत्याशी भी परेशान हो रहे हैं वह अपना गणित नहीं लगा पा रहे,विशेषज्ञों के विश्लेषण मतदाताओं के मौन होने के कारण फैल हो रहे है। आईए मतदाताओं के इस मौन मोड का एक्सरे करते है।

अध्यक्ष सामान्य और अप्रत्यक्ष प्रणाली ने बढ़ाई गर्मी

शिवपुरी में अप्रत्यक्ष प्रणाली के चुनाव में अध्यक्ष अनारक्षित महिला सीट होने के कारण चुनाव में रोचकता बडी हैं। इस बार नगर पालिका अध्यक्ष पर सामान्य महिला का चुना जाना तय हो गया,वही अध्यक्ष पार्षद वोटिंग के आधार पर चुनेगें। इस कारण पार्षद पद पर लडने वाले प्रत्याशियों के मन में लड्डू फूट रहे है। राजनीतिक गलियारो में चर्चा है कि इस बार पार्षदों की कीमत लाखों में पहुचेगी।

वार्डो में प्रत्याशियो की फौज, हर गली से प्रत्याशी

शिवपुरी के 39 वार्डो में लगभग प्रत्येक वार्ड से 10 प्रत्याशी खड़े हैं। वार्ड के हर गली मोहल्ले से एक प्रत्याशी पार्षद बनने के लिए संघर्ष कर रहा है। वार्ड का चुनाव छोटा और व्यक्तिगत माना जाता हैं। प्रत्याशी की संख्या अधिक होने के कारण मतदाता मौन हो गया हैं 39 वार्ड में एक या दो वार्ड को छोड दे तो सीधी फाइट की नही दिख रही हैं। प्रत्याशी की संख्या अधिक होने के कारण मतदाता मौन हो गया वह किसी के समर्थन में खुल कर नही आ रहा हैं।

प्रत्याशी परेशान: निर्दलीय और बागियों ने किया गणित

मतदाताओं के मौन होने के कारण प्रत्याशियों और और उनके समर्थकों के गणित फैल हो गए हैं। जिससे प्रत्याशी और उनके समर्थक परेशान दिख रहे। प्रत्याशी के चेहरे से रौनक गायब हो गई अब उन्होने भी हार जीत के भय को छोडकर सिर्फ अपने जनसंपर्क पर ध्यान दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के विश्लेषण भी फैल

वार्ड में प्रत्याशी की संख्या अधिक होने के कारण अब किसी भी प्रत्याशी का विश्लेषण नही हो रहा है,बागी भी मुकाबले में दम से डटे हैं,वह भी जीत की आस के कारण निरंतर मेहनत कर रहे हैं,शहर में निकाय चुनाव में जातिवाद भी फेक्टर बन कर नहीं उतर रहा हैं। पार्टी का मूल वोटर भी फेल हो रहा हैं। यह चुनाव व्यक्तिगत होता हैं और इस समय प्रत्याशियों से अधिक प्यार मतदाताओं से कोई नही कर रहा है इस कारण विशेषज्ञों के विश्लेषण भी फैल हो गए हैं।

अभी वोटर बदल रहा है अपने रंग

निकाय चुनाव में प्रत्येक वार्ड में लगभग 10 प्रत्याशी खड़े हुए है। प्रत्याशी अपने वोटरों से मिल रहा हैं,इस जनसंपर्क की बेला में वोटर भी अपने रंग बदल रहा हैं। एक प्रत्याशी के जाते ही दूसरा उम्मीदवार आता है तो वोटर बडी ही सफाई से कहता है कि भाई आप चिंता न करे हम आपके साथ है,तीसरा आता है तो कहने लगता है आप हम पर मेहनत न करे हम तो आपको ही वोट देंगे,आप और कहीं मेहनत करे।

तीसरा उम्मीदवार जाता है तो चौथा वोट मांगने आता है तो वही वोटर फिर रंग बदलता है और कहता हैं भाई साहब आप तो मेरी ही समाज भाई है आपके वोट तो हमारे वोटों की गिनती से ही शुरू होंगें। कई वोटरों ने तो प्रत्याशियों के नंबर अपने मोबाइल में मेंबर और पार्षद और विजयी पार्षद के नाम से सेव कर लिए।

जैसे ही यह प्रत्याशी आता है तो मोबाइल निकाल कर दिखा रहे हैं आपका नाम ही हमने पार्षद के नाम से सेव किया हैं आप टेंशन न लो। वोटर का भी पता है कि यह 15 दिन हमे रंग बदलना है फिर जीता हुआ प्रत्याशी पूरे 5 साल तक रंग बदलेगा।