यशोधरा राजे के जन्मदिन पर विशेष: राजनीति की सार्थकता का श्रेष्ठ उदाहरण है यशोधरा राजे सिंधिया- Shivpuri News

शिवपुरी। भौतिकता में उलझी हमारी नजरें भले ही सफलता और असफलता के पैमाने तक केन्द्रित रहती हैं। लेकिन जीवन का सत्य जो जानते हैं, उनके लिए सफलता और असफलता कोई मापदंड नहीं होती। उनके लिए तो जीवन की सार्थकता अधिक महत्वपूर्ण होती है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि जीवन के सीमित सफर में आप कहां तक पहुंचे।

बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आपकी यात्रा में गहराई कितनी है और उसमें सभी को समाहित करने की भावना और सार्थकता कितनी है। इस पैमाने पर यदि हम मूल्यांकन करें तो आज के राजनीतिज्ञों में यशोधरा राजे सिंधिया अव्वल नजर आती हैं। राजनेताओं की भीड़ में वह अलग से नजर आती हैं। अपनी मां की छायां उनमें स्पष्ट रूप से प्रतिविंवित होती है और जिस पर मां का आर्शीवाद हो उस पर ईश्वर का वरदहस्त होता ही है।

यहीं कारण है कि वह राजनैतिज्ञ से अधिक मानवीय प्रतीत होती हैं। इस बजह से समय-समय पर उन्हें राजनीति जैसे प्रतिष्ठा के क्षेत्र में दिक्कतों, बाधाओं और संघर्ष का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ ईश्वर की सहायता से ही वह अपने अस्तित्व को कायम रखने में सफल हो पाती हैं। शायद कोई अदृश्य शक्ति ही उनकी रक्षक बनती है।

जहां तक उनकी व्यक्तिगत खूबियों का सवाल है तो नेतृत्व क्षमता उनकी बेमिसाल है। साहस की उनके व्यक्तित्व में कोई कमी नहीं है और सबसे बड़ी बात यह है कि हार मानने में उनका विश्वास नहीं है और जुझारूपन उनका सबसे बड़ा गुण हैं। डर तो उनके व्यक्तित्व में लेशमात्र भी नहीं है। लेकिन राजनीति में उनका पारदर्शिता और साफ-साफ कहने का गुण अक्सर नुकसान पहुंचाता है।

जिससे कई बलाओं को वह स्वयं आमंत्रित कर लेंती हैं और अकारण ही दुश्मनों की फौज उनके इर्द गिर्द इकट्टा हो जाती है। यहीं कारण है कि स्थानीय स्तर और प्रदेश स्तर पर उनके समक्ष बाधाओं का पहाड़ खड़ा नजर आता है। जिससे जिस अद्भूत क्षमता की वह स्वामिनी हैं। उस स्तर से उन्हें राजनीति में ऊंचाई नहीं मिल पाती और इसकी वह परवाह भी नहीं करतीं।

उनकी दृष्टि में संवेदनशीलता, दूसरों के दुख दर्द को महसूस कर उन्हें दूर करना अधिक महत्वपूर्ण है। शिवपुरी में उन्होंने जिस विश्वास दृढ़ता और नेतृत्व के अद्वितीय गुणों से विकास कार्यों को अंजाम दिया है उसकी दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है। सिंध जलावर्धन योजना उनके ही प्रयासों का प्रतिफल है। जिसके कारण आज जल संकट से शिवपुरीवासी निश्चिंत हैं।

थीम रोड को आकर्षक स्वरूप देने में उनका अहम योगदान रहा है और अब इस रोड पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की पहल कर वह पर्यावरण की दृष्टि से अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं। यहीं कारण है कि अब तक अपने परफॉरमेंस से वह शिवपुरी की जनता की चहेती हैं। राजनीति को यशोधरा राजे अपनी मां की तरह एक सेवा का माध्यम मानती हैं और शिवपुरी की विकास योजनाओं को लाने तथा उन्हें क्रियान्वित करने में यशोधरा राजे ने विशेष दिलचस्पी दिखाई।

इसलिए यहां उनके बारे में कहा जाता है कि यशोधरा राजे हैं तो मुमकिन हैं। कोरोना काल में उनकी संवेदनशीलता, जीवटता और समर्पण की साक्षी इस क्षेत्र की जनता है। राजनीति में आने के बाद अक्सर राजनेता भावना शून्य हो जाते हैं और हर घटना को वह अपने लाभ हानि के नजरिए से देखते हैं। लेकिन यशोधरा राजे इस मायने में अपवाद हैं।

उन्होंने मानवीय मूल्यों से हटकर कभी अपने व्यक्तिगत फायदे के विषय में नहीं सोचा और उनकी संवेदनशीलता, सहदृयता, आत्मीयता और दूसरे के दुख में द्रवित हो जाने की भावना जस की तस है। उनके यशस्वी जन्मदिन पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं और कोटि-कोटि बधाईयां।