हार को हरा कर बिना थके कोशिश करते रहेंगे तो आपकी जीत तय है:पुरानी शिवपुरी का लाल बना IFS- Shivpuri News

शिवपुरी। शहर की पुरानी शिवपुरी निवासी चंद्र कुमार पुत्र वीरेंद्र अग्रवाल का चयन आईएफएस के रूप में हुआ है। चंद्र कुमार अग्रवाल ने यह सफलता अपने चौथे प्रयास में हासिल की है। इससे पहले वह आईएफएस के लिए तीन बार प्रयास कर चुके हैं। इसके अलावा दो बार वह सिविल सर्विस के लिए इंटरव्यू तक तो पहुंचे लेकिन सफलता हासिल नहीं हो पाई। चंद्र कुमार अग्रवाल बताते हैं कि हर बार असफलता ने उन्हें हताश किया और हर हार के बार मन विचलित भी हुआ।

कई बार सोचा अब अपने सपने को पूरा करने का प्रयास छोड़ दूं, लेकिन तभी दोस्तों ने दम दिया। अगली बार तो पक्का हो जाएगा। बस इसी दम के चलते 2016 से लगातार प्रयास जारी रखे और मेरी संगत ने मेरी जिंदगी की रंगत बदल दी। चंद्र कुमार के अनुसार उन्हें उनके सीनियर्स ने बताया था कि कोचिंग पर पढ़ाई अच्छे से नहीं हो पाती है, लेकिन अगर अच्छे दोस्तों के साथ पढ़ाई करोगे तो उससे अच्छी तैयारी कहीं नहीं हो सकती।

बकौल अग्रवाल उन्होंने दिल्ली जाकर अच्छे दोस्त बनाए उनके साथ बिना कोचिंग तैयारी की। बीच-बीच में टेस्ट सीरीज के लिए कोचिंग जरूर गया। जिस कमी के कारण असफलता मिली उस कमी को अगली बार खत्म कर दिया। अग्रवाल के अनुसार अच्छे दोस्तों की हिम्मत और संगत ने आज मुझे मेरा मुकाम हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। चंद्र कुमार अग्रवाल के अनुसार बुजुर्गों ने जो कहावत कही है कि आपकी संगत और आपकी हिम्मत आपके भविष्य की दिशा और दशा तय करते हैं, वह पूरी तरह सही है।

ऐसे में मैं किसी भी कंपटीशन की तैयारी कर रहे युवाओं को यही कहना चाहूंगा कि आप अगर बिना थके कोशिश करते रहेंगे तो आपकी जीत तय है। बस आप अपने प्रयास ईमानदारी से करें और आपकी दोस्ती अच्छे लोगों के साथ हो, जो आपको लगातार प्रोत्साहित करते रहें। यहां बताना होगा कि चंद्र कुमार अग्रवाल ने बीएचयू से मैकेनिकल में आइआइटी की है।

इससे पहले उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा शिवपुरी के निजी स्कूल से तो बारहवीं तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से पूरी की। चंद्र कुमार अग्रवाल ने इस बार पांचवी बार यूपीपीएससी का एग्जाम दिया है। उनके अनुसार इस बार वह सिविल सर्विस के लिए परीक्षा में शामिल हुए हैं। उन्होंने प्री एग्जाम निकाल लिया है और अब वह मेन्स एग्जाम देंगे। इससे पहले वह दो बार सिविल सर्विस के इंटरव्यू तक पहुंच चुके हैं।

पिता मिठाई वाले, बड़ा चैलेंजिंग था टारगेट
चंद्र कुमार के अनुसार उनके पिता मिठाई की दुकान करते हैं। इसके अलावा उनके दोनों बड़े भाई भी उसी दुकान में पिता का सहयोग करते हैं। परिवार या रिश्तेदारों में कोई भी व्यक्ति सिविल सर्विस में नहीं है। ऐसे में उनके लिए यह टारगेट फिक्स करने के बाद इसे हासिल करना बहुत चैलेंजिंग था। हर असफलता के बाद जब भी वापिस लौटने का मन बनाया तो कदम वापिस खींचने से पहले यही सोचा कि जब मेरे साथ तैयारी करने वाला आइएएस और आइपीएस बन सकते हैं तो मैं क्यों सफल नहीं हो सकता। उनके अनुसार सात साल की मेहनत के बाद मिली सफलता से वह बेहद उत्साहित हैं।


सिविल सर्विस के लिए ऐसे हुए प्रेरित
चंद्र कुमार बताते हैं कि जब वह आइआइटी कर रहे थे तभी उन्होंने दिल्ली के रक्षक फाउंडेशन के साथ इंटर्नशिप की थी। वह उन्हें लेक्चर देने के लिए मंत्रालयों में पदस्थ बड़े-बड़े अधिकारी आते थे। बकौल चंद्र कुमार वहां उन्होंने देखा कि एक अधिकारी के फैसले किस तरह से समाज के लाखों-करोड़ों लोगों को प्रभावित करते हैं। अगर आप समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो इससके अच्छा माध्यम कोई नहीं है। चंद्र कुमार के अनुसार वहीं से उन्होंनें सिविल सर्विस में आने का सपना देखा और 2016 में कॉलेज कम्पलीट करने के बाद तैयारी के लिए दिल्ली चला गया। वहीं पर रह कर इतने साल तक प्रयास किया।