बलारपुर कथा: राजा नल के राज्य से भी पहले का है यह प्राचीन मंदिर, मां को लाखा बंजारा लेकर आया था, दिन में तीन रूप बदलती है मां - Shivpuri News

शिवपुरी। आज से देश में चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। हर कोई पूरी तन्मयता के साथ मां की आराधना में जुट गया है। इसी बीच शिवपुरी में प्राचीन मंदिरों में से एक बलारपुर मंदिर जो जंगलों में स्थिति है। यहां आस्था के चलते अब मां की आराधना के लिए भीड जाने लगी है। यहां भक्त अगर सच्चे मन से मां के दरबार में आराधना करने जाते है तो मां बलारी उनकी हर मनोकामना को पूरी करती है।

वैसे तो मां बलारपुर के दरवार को लेकर कई कहानियां क्षेत्र में प्रचलित है। परंतु सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी है कि मां बलारी के बाल रूप को बंजारा जाति के लाखा बंजारा भयावह जंगल में लेकर आया था। मंदिर को लेकर यह भी कथा प्रचलित है कि 900 साल पहले राजा नल के राज्य से पूर्व मां के मंदिर की स्थापना की गई थी। इसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग भी कर चुका है।

इस आशय की जानकारी मंदिर के मुख्य महंत प्रयाग भारती ने दी है। श्री भारती 1973 से मंदिर की सेवा में लगे हुए हैं। मंदिर से 2 किमी दूर मां का प्राकट्य स्थल भी मौजूद है, जहां आज भी पत्थरों के बीच में दरार है। बताया जाता है कि इसी स्थान से मां बलारी प्रकट हुईं थीं। मंदिर में लगी मूर्तियां उस प्राचीनतम समय की पुष्टि करती हैं।

मंदिर के महंत प्रयाग भारती बताते हैं कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार उनके गुरू स्व: महंत शिव भारती जी ने 1952 में किया था। इससे पहले मंदिर पूरी तरह ध्वस्त हो गया था, लेकिन उनके गुरू शिव भारती जी के अथक प्रयासों से मंदिर आज वैभव की ओर अग्रसर है। यह मंदिर शहर से 30 किमी दूर भयावह जंगल में स्थित है, जहां मां की भव्य मूर्ति मंदिर में स्थित है।

कहावत यह भी प्रचलित है कि मां एक दिन में अपने तीन रूप बदलती हैं, लेकिन अभी तक किसी ने ऐसा होते नहीं देखा है। इसका खण्डन करते हुए श्री भारती ने कहा है कि मां उन्हीं लोगों को अपने तीन रूपों में दर्शन देती हैं जो मां की भक्ति में उनके रूपों के दर्शन की सत्यता जानने की नियत से वहां आता है।

मां को बाल रूप में लाने को लेकर एक कथा प्रचलित है जिसे महंत प्रयाग भारती ने वर्णन करते हुए बताया कि गुजरात से बंजारा समुदाय के लोग व्यापार करने के लिए अन्यत्र प्रदेशों में पहुंचने के लिए जंगल के रास्तों का प्रयोग करते थे और कई स्थानों पर वह अपना डेरा डालते थे।

एक लाखा बंजारा नाम का व्यापारी अपने परिवार और जाति के लोगों के साथ गुजरात से उत्तर प्रदेश की ओर जाने के लिए बलारपुर ग्राम से कूच कर रहा था, बलारपुर से 2 किमी दूर झाला क्षेत्र में उसने अपना डेरा डाला।

जहां प्रतिदिन बंजारा समुदाय के बच्चे खेलते थे, वहीं एक बालिका भी उन बच्चों के साथ खेल में शामिल होती थी जिसे लाखा ने देख लिया और उसके बारे में जानकारी एकत्रित की, लेकिन उसका कोई भी पता उसे नहीं लग सका, वहीं वह बालिका भी वहां से गायब हो गइ।

और एक दिन रात्रि में लाखा को उस बालिका ने दर्शन दिया और उससे कहा कि वह उसे बैलगाड़ी में बैठाकर सुरवाया ले चले और लाखा को बालिका ने एक शर्त दी कि वह तब तक पीछे मुड़कर नहीं देखेगा जब सुरवाया न आ जाये अगर उसने उस शर्त का उल्लंघन किया तो वह उसी स्थान पर उतर जायेगी।

बालिका की शर्त मंजूर कर वह उसे बैलगाड़ी से सुरवाया की ओर कूच कर गयाए लेकिन रास्ते में उसके मन में संशय हुआ कि बालिका ने ऐसा क्यों कहा, कहीं इसके पीछे कोई रहस्य तो नहीं और उसने शर्त का उल्लंघन करते हुए मुड़कर देख लिया तभी बालिका बैलगाड़ी से उतरकर अंर्तध्यान हो गई।

जब वह बालिका अंतध्र्यान हो गई जो लाखा बंजारा समझ गया कि यह कोई देवी है मेरी एक गलती के कारण देवी अंतध्र्यान हो गई। लाखा एक चट्टान से पर अपना सर पटक-पटकर रोने लगा,बताया गया है मां का दिल पिघल गया और वह उसी चट्टान को फाड कर मुर्ति रूप में प्रकट हो गई।

बताया यह गया है कि जिस जगह मां प्रकट हुई उस जगह से लाखा ने मां की मूर्ति को ले जाकर एक मढिया बना दी और अब यह मंदिर बलारपुर के नाम से प्रसिद्ध है। पूर्व में यह मंदिर देखरेख के अभाव में ध्वस्त हो गया था क्योंकि उक्त जंगल में डकैतों का आंतक था जिस कारण कोई भी वहां नहीं जाता था। धीरे.धीरे उनके गुरू महंत शिव भारती जी ने उक्त मंदिर पर पहुंचकर वहां जीर्णोद्धार कराया और मंदिर पर पूजा अर्चन शुरू की गई।

एक समय रामबाबू गड़रिया का आतंक शिवपुरी सहित चंबल में व्याप्त था, लेकिन उनके गुरू शिव भारती जी अपने भक्तिभाव से मां की सेवा में लगे रहे। चैत्र नवरात्रि में यहां मेले की प्रथा शुरू हुई और धीरे-धीरे मंदिर की याति जिलेभर में फैल गई। लोगों ने डकैतों के डर को भी मन से निकालकर मां की भक्ति में लीन होकर दर्शनों के लिए यहां आने लगे। बीते चार साल पहले यह मंदिर फोरेस्ट की जमींन में होने के चलते फोरेस्ट ने इस मंदिर पर जाने से रोक लगा दी थी।

उसके बाद हजारों की संख्या में भक्त शिवपुरी आए और शिवपुरी कलेक्टर का घेराव करते हुए जमकर हंगामा किया। इस हंगामें की आग भोपाल तक पहुंची और भक्तों को जाने की परमीशन दे दी गई। विगत दो बर्षो से कोरोना के चलते यहां श्रृद्धालुओं को एकत्रित होने की परमीशन हीं दी। परंतु इस वर्ष कोरोना से राहत मिलते ही आज शिवपुरी कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह,एसपी राजेश सिंह चंदेल,एसडीएम गणेश जायसवाल मां के दरवार में पहुंचे और यहां आने बाले श्रृद्धालुओं को लेकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए बताया है कि इस बार बलारपुर पर मेला लगाया जाएगा। सभी धार्मिक आयोजन होगे। नेजे चढाए जा सकेगे। साथ ही भंडारें भी आयोजित किए जाएगे। बलारपुर में पहली बार इस बार रास्ते में महिलाओं को शौचालय भी प्रशासन ने बनवाए है।

एसडीएम गणेश जयासवाल ने बताया है कि मेले की व्यवास्थाओं को लेकर पहले ही बैठक कर चुके है। जिसमें फोरेस्ट विभाग के अधिकारीयों के साथ मिलकर निर्णय लिया गया है कि जंगल में वन्य प्राणी प्रभावित नहीं हो इसके लिए डीजे को पूर्णत प्रतिवंधित किया है। साथ ही मां बलारपुर में पशु बली को पूरी तरह से रोकने के आदेश दिए है। साथ ही अगर कोई आदेश की अव्हेलना करता है तो उसपर शक्त से शक्त कार्यवाही के निर्देश दिए है। इस दौरान भक्त डोलक और मजींरा आसानी से बजाकर आराधना कर सकते है।