श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर कथा:नृत्य मुद्रा,ब्राह्मण रूप में है यह प्रतिमा,यह प्रमाण स्वयं देते है अतुलित बलधामा - Shivpuri News

ललित मुदगल@ शिवपुरी। शिवपुरी के प्रसिद्ध मंशापूर्ण हनुमान जी मंदिर आप सभी गए होंगे,लेकिन आपको यह जानकारी है क्या इस मंदिर का नाम मंशापूर्ण क्यों रखा गया या किसी चमत्कार के कारण इस मंदिर का नाम मंशापूर्ण हो गया। क्या खास है कि मंशापूर्ण हनुमान मंदिर की हनुमान जी की प्रतिमा में,शायद देश में ऐसी पहली प्रतिमा हैं,और कौन सी शर्त पर प्रकट हुए थे अतुलित बलधामा।

यह सत्य है कि नौहरी स्थित सिद्ध क्षेत्र प्रसिद्ध हनुमान मंदिर श्री मंशापूर्ण हनुमान जी की प्रतिमा स्वयभू हैं। यह प्रतिमा प्रकट हुई थी। मंदिर के पुजारी श्री अरुण शर्मा ने बताया कि आज से लगभग 250 वर्ष पूर्व मेरे दादाजी स्व:पंडित चतुर्भुज शर्मा के पिता स्व:श्री कुंजीलाल शर्मा को हनुमान जी ने स्वप्न दिया कि इस कुएं के पास मेरी प्रतिमा हैं और इसे बहार निकालो। सपने में हनुमान ने यह शर्त भी रखी की प्रतिमा को निकालते समय प्रतिमा को कोई क्षति नही पहुंचे।

स्व:श्री कुंजलाल शर्मा को जब सपना आया और वे गांव के लोगों को हनुमान जी के बताए गए स्थान एक कुंए पर गए तो वहां कोई हनुमान जी की प्रतिमा नही दिखी वे निराश होकर चले आए। फिर उसी रात फिर सपना आया कि आप सभी सही जगह पहुंच गए थे में एक चिरोल के पेड मे धसा हुआ हूं।

फिर गांव के सभी लोग उसी स्थान कुंए पर पहुंच गए और चिरोल के पेड़ की खोज की तो प्रतिमा का कंधा दिखाई दिया। शर्त के अनुसार उस प्रतिमा को ग्रामीणों ने इस प्रकार निकाला कि प्रतिमा कही से खंडित नही हो। उस प्रतिमा को निकाल कर उसे स्थापित किया गया। हम पाठकों को जानकारी के लिए बता दे की प्रतिमा का प्राकट्य स्थल मंदिर के पीछे हैं,अब उस कुएं को पाट दिया गया है।

वर्तमान में आपको अब मंशापूर्ण हनुमान जी का एक भव्य मंदिर दिखाई देता है लेकिन शुरुआत में पत्थरों से निर्मित एक कमरे में हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना की गई थी जिसे हम आम भाषा में मडिया कहते है।

इस प्रतिमा में शक्ति नहीं शक्ति का प्रदर्शन हैं:ब्राह्मण रूप में है प्रतिमा

अतुलित बलधामा नाम हैं हनुमान जी का। हनुमान मतलब शक्ति,आपने हनुमान जी की शक्ति की कई प्रसंग सुने होगें। आपने अभी तक हनुमान जी कई प्रतिमाओं के दर्शन किए होगें। लगभग सभी प्रतिमाओं में हनुमान जी के एक हाथ में उनका अस्त्र सोठा और एक हाथ में पर्वत होता है।

लेकिन मंशापूर्ण हनुमान जी के मंदिर की प्रतिमा में ऐसा नहीं हैं यह राम मिलन के प्रसंग को जीवंत करती हुई प्रतिमा है। इस प्रतिमा में हनुमान जी का एक हाथ कमर पर रखा हैं और एक हाथ आर्शीवाद की मुद्रा में हैं। यह जनेऊधारी प्रतिमा हैं यह प्रतिमा ब्राह्मण रूप में हैं।

कुछ लोगो का मत कि यह हनुमान जी की प्रतिमा नृत्य मुद्रा में हैं। हनुमान जी ने ब्राह्मण रूप जब रखा था जब वह सर्वप्रथम अपने आराध्य प्रभु श्री राम से मिले थे,और अपने आराध्य के प्रथम मिलन में खुशी के कारण हनुमान जी नृत्य करने लगे। ऐसी प्रतिमा भारत में और कहीं देखने को मिलती है। सीधे शब्दों में कहे तो यह शक्ति का नही बल्कि भक्ति की अविरल धारा को प्रदर्शित करती प्रतिमा हैं यह..........