कृषि प्रशिक्षण केन्द्र पर शेरगढ़ के राजा साहब का कब्जा, भवन को खाली कराने में विभाग की फूली सांसे - Pichhore News

पवन पाठक@ पिछोर। खबर जिले के पिछोर अनुविभाग में स्थित राजघाट परियोजना क्षेत्र से आ रही हैं। पिछोर के मुख्य मार्ग पर स्थित शासकीय रेस्ट हाउस के नजदीक राजघाट बायीं नहर परियोजना वितरण संभाग खनियाधाना द्वारा एक भवन का निर्माण कराया था। इस भवन के निर्माण का उद्देश्य किसानों को प्रशिक्षण देना था,लेकिन पिछले 20 सालो से इस भवन पर स्थानीय ठाकुर को कब्जा हैं। इस भवन में आज तक एक बार भी किसानों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

किसानों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से बनाए गए इस भवन का नाम कृषि प्रशिक्षण केन्द्र हैं,इस भवन में रहने और प्रशिक्षण देने की पूरी सुविधाएं हैं। हॉल कमरे के साथ बरामदा और लेट बाथ भी है,सारी सुविधाओं से सुसज्जित इस भवन का निर्माण हुआ था,लेकिन बनने के बाद ही इस पर कब्जा कर लिया गया। इस कब्जो को लेकर इसे हटाने के लिए कई बार विभाग ने औपचारिकता के साथ नोटिस भी जारी किए लेकिन आज 20 साल बाद भी यह भवन अतिक्रमण का दंश झेल रहा है।

विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरु शुरु में तो कब्जे धारियों द्वारा राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते कब्जा बना रहा बाद में इसका किराया अधिकारियों की जेब में जाता रहा होगा हालांकि अधिकारी किराया न देने का भी नोटिस जारी कर चुके हैं।

जानकारी के अनुसार उस समय लगभग 20 लाख रुपए से अधिक राशि की लागत से निर्मित यह भवन जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया था उस उद्देश्य का पूरा होना तो दूर की बात है आज तक अवैध कब्जे से मुक्त ही नहीं हो पाया है और जर्जर होने की स्थिति में आ गया है जिसमें किसी भगवान सिंह परमार और शेरगढ़ के किसी राजा साहब के परिवार का कब्जा होना बताया जाता है इसमें दूसरी हैरान वाली बात विद्युत विभाग की आती हैं।

अवैधानिक रूप से कब्जा धारियों ने राजघाट नहर परियोजना के अधीन जल संसाधन विभाग की कॉलोनी के इस कृषक भवन और चौकीदार क्वार्टर पर बाकायदा विद्युत कनेक्शन भी ले लिया जबकि इसमें जल संसाधन एवं राजघाट नहर परियोजना से किसी भी तरह की कोई स्वीकृति भी नहीं ली गई अब सवाल यह है कि उस समय नई प्रशासकीय इमारत पर कब्जे धारियों को विद्युत विभाग ने कैसे कनेक्शन दे दिया पहले शुरू शुरू में तो कब्जा हटाने संबंधी विभाग ने कब्जा धारियों को पत्र व्यवहार किया भी था अब तो विद्युत कनेक्शन काटने या विद्युत विभाग से सवाल जवाब करने के साथ ही कब्जा हटाने का प्रयास करना भी बंद कर दिया है हालांकि ऐसे में लोग कब्जा धारियों और संबंधित विभाग की मिलीभगत बता रहे हैंं।