पेयजल पर दंगल शुरू: जनता के कंठो को प्यासा रख 8 करोड़ की बचत करने से नोटा भी विजयी होगा @Ex-ray Lalit mudgal

शिवपुरी। आसमान आग बरसाने लगा हैं शहर में पानी को लेकर दंगल शुरू हो चुका हैं। बीते रोज मंगलवार था कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई से 2 बड़ी खबरें जनसुनवाई से पेयजल की समस्या के लेकर आई एक महिलाओ ने पेयजल को लेकर कलह किया और दूसरी एक युवक ने कलेक्टर से पानी मांगा तो वह भडक गए इस घटना को कवर कर रहे मोबाइल को भी जब्त कर लिया गया।

वही पेयजल को लेकर एक खबर नगर पालिका शिवपुरी से आ रही हैं कि सीएमओ शैलेश अवस्थी ने नगर के विकास के लिए 8 करोड़ रुपए बचाने के लिए एक निर्णय लिया है। यह बजट आपके और हमारे कंठ सूखे रखकर निकाला जाएगा,आइए शहर के नागरिकों के कंठो को सूखे रख निकाले गए इन 8 करोड़ रूपयो का एक्सरे करते है।

नगर पालिका के द्वारा शहर के नागरिकों को प्यासा रख 8 करोड़ रुपए बचाने का प्रयास करने के इस मामले को कम शब्दों में लिखने का प्रयास करते है। नगर पालिका ने निर्णय लिया है कि इस गर्मी के मौसम में नगर पालिका पानी के टैंकर नहीं चलाएगी। शहर के वह क्षेत्र या वार्ड जिनमे मडीखेडा की पाइप लाइन बिछ चुकी हैं,वहां के 68 टयूबवेल नपा ने पहले ही बंद कर दिए है।

नपा के अफसरों ने दावा किया है कि इन टूयूबेल के बंद होने के कारण 52 लाख रुपए प्रतिमाह का बिजली के बिल में कमी आई है और इन बोरो के रखरखाव का खर्च लगभग 2 करोड़ रुपए होता है वह भी बच जाऐगा। कुल मिलाकर 8 करोड़ रुपए की सेविंग की जाएगी और यह 8 करोड़ रुपए शहर की सुविधाओं के लिए खर्च होगा।

वोटिंग कराई तो इस निर्णय से नोटा जीत जाऐगा

अब सबसे बड़ा सवाल अगर शहर में इस बात पर वोटिंग कराई जाए कि मडीखेडा के पाइपो पर कितना विश्वास,पहला बटन पूरा विश्वास की नियमित पानी आऐगा और पाइप नहीं टूटेंगे,दूसरा बटन मडीखेडा योजना पर फिलहाल विश्वास नही है लाइन की प्रतिदिन कही न कही टूटने की खबर आती हैं पानी नियमित नही आऐगा,तीसरा बटन हम नोटा जैसा मान लेते है कि हम निर्णय नहीं ले सकते।

आप यकीन मानिए नोटा जीत जाएगा नगर पालिका के इस निर्णय से कि पानी नियमित आएगा और टूयूबवैल बंद करने का निर्णय सही है और नपा के पानी के टैंकर न चलाने का निर्णय भी सार्थक हैं। इस पहले बटन से दूसरा तो हजारो से विजयी होगा यह तय हैं।

अप्रैल माह की शुरुआत से गर्मी मई और जून का अहसास देने लगी हैं,जैसे जैसे सूर्यदेव का पारा चढेगा,वैसे ही भूमि का जलस्तर घटेगा और शहर में चल रहे टूयूबवैल अपनी दम तोड देंगें। नपा ने टैंकर न चलाने का निर्णय लिया हैं ऐसे में अगर शहर के उस क्षेत्र के ट्यूबवेल दम तोडते हैं और वहां मडीखेडा की लाइन नहीं हैं वहां पानी कैसे पहुंचेगा। बचत करना अच्छी बात हैं इसमें कोई बुराई नही है लेकिन प्रशासन की यह भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि पब्लिक को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो। सरकार कर्म भी यह करता हैं और यही धर्म कहता है।

पुराने समय मे धर्म अर्जित करने के लिए आम रास्ते पर कुएं बाबडी खुदवाते थे कुल मिलाकर पानी पिलाना एक धर्म हैं। लेकिन शिवपुरी में अब पानी उपलब्ध कराने का धर्म समस्या बन गया हैं। यह निर्णय जनता के हित में नहीं है कि अब नपा टैंकर नही चलाएगी,पैसा और किसी और मद से भी बचाया जा सकता हैं शहर के प्यासे कंठो की प्यासा रख कर नही।