चीतों के स्वागत को तैयार कूनो: Hi-Tech तकनीक से की जाऐगी निगरानी, पढ़िए पूरी जानकारी - Shivpuri News

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संतोष शर्मा@ शिवपुरी।
शिवपुरी श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित कूनो राष्ट़ीय उद्यान साउथ अफ्रीकी चीतों के लिए आधुनिक तकनीक के साथ स्वागत करने को पूरी तहर से तैयार है। चीतों की सुरक्षा हेतु हनीकॉम्ब फेंसिंग डीसी करेंट के साथ ही इन्फ्रारेड कैमरों को लगाने का कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है अब बस इंतजार है तो चीतों के आने का।

जानकारी के अनुसार कूनो पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में साउथअफ्रीका से चीतों को भारत में लाये जाने की योजना वर्ष 2009 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान बनाई जा रही थी, तब जयराम रमेश केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे और उन्होंने इसकी पहल की थी लेकिन एक दशक बाद यह योजना बन पाई, अब जाकर इस योजना में प्रगति हुई तथा इसके लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट के एक्सपर्ट द्वारा सहमति मिलने के बाद मप्र सरकार अपने प्रयास करने में पूरे जोरशोर से लगी हुई है।

चीतों को आने से पूर्व मप्र के अधिकारियों का दल दिसंबर 2021 में चीता प्रबंधन के प्रशिक्षण के लिए दक्षिण अफ्रीका जाना था, दल साउथअफ्रीका जाने के लिए इंदिरागांधी अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली तक पहुंच भी चुका था परंतु कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रान के चलते अंतराष्ट्रीय उडानों पर प्रतिबंध लगने के कारण दल को वापस आना पडा, लेकिन अब संभवत: 17 फरवरी को दल साउथअफ्रीका के लिए रवाना होगा।

चीतों को लाने से पूर्व उनके रहने, खाने एवं सुरक्षा के बंदोबस्त करने का कार्य युध्द स्तर पर किया जा रहा है, सुरक्षा की दृष्टी से बाडों का निर्माण भी किया गया है जो पूर्णता की ओर है साथ ही उनकी निगरानी व्यवस्था हेतु इन्फ्रारेड कैमरों का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है जिससे कंट्रोलरूम में बैठकर ही उन पर एवं उनके आसपास होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

कूनो के पर्यावास से अनुकूलता हेतु बाडों में रहेगें चीते

कूनों पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में लाये जा रहे चीतों को यहां के वातावरण अनुकूल होने में कुछ समय लगेगा जिसके लिए पॉच वर्ग किलामीटर जंगल की फेंसिंग का कार्य किया गया है, फेंसिंग में बारह किलोमीटर लंबी हनीकॉम्ब तारफेंसिंग का बाहर की ओर से डीसी करेंट के साथ निर्माण सात करोड रूपयों की लागत से कराया जा रहा है जो लगभग पूर्णता की ओर है। इस पॉच वर्ग किलोमीटर के जंगल में पॉच बाडों का निर्माण भी किया जायेगा जिसमें दो दो चीतों को रखकर कुछ महीनों तक निगरानी की जायेगी उसके बाद ही उन्हे खुले जंगल में छोडा जायेगा।

वॉच टावर एवं इन्फ्रारेड कैमरों से होगी चीतों की निगरानी

चीतोंं को लाने के बाद जिस पांच किमी के बाडों में रखा जायेगा उसकी निगरानी के लिए हाईडेफीनेशन इन्फ्रारेड कैमरों को लगाने का कार्य किया जा रहा है जिसमें से अभी तक तीन कैमरों को वॉच टावर पर लगा दिया गया है, कुछ और कैमरों को लगाने कार्य भी पूर्णता की ओर है। इन सभी कैमरों को वाईफाई के माध्यम से कंट्रोलरूम से जोडा गया है जहां से इन कैमरों को संचालित एवं नियंत्रण करने हेतु आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण भी वनकर्मियों को दिया जा रहा है।

कोरोना के कारण साउथअफ्रीका से चीतों के आने में कुछ बिलम्ब हुआ है परंतु चीतों को लाने से पूर्व सभी तैयारियां की जा रही हैं, हमारा कार्य पूर्णता की ओर है, जल्द ही चीतों के आने की उम्मीद है।
पीके वर्मा,वन मण्डलाधिकारी, कूनो श्योपुर
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