संजीव जाट@बदरवास। एक प्रचचित शब्द स्कूल जिसमें हमारे और आपके बच्चे पढने जाते हैं,अगर इन स्कूलो के पीछे का इतिहास देखे तो इन्है गुरूकुल भी कहा जाता था,एक बच्चे को गुरू की शिक्षा ने भारत का सम्राट बनाया तो ऐसे स्कूलो को राष्ट्रनिर्माण शाला भी कहा जा सकता है। एक समान्य बालक ने अपने गुरू आचार्य चाणक्य की शिक्षा के बल पर सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्य कहलाया।
स्कूलो को शिक्षा का मंदिर भी कहा जाता हैं। जहां सक्षात देवी सरस्वती निवास करती हैं। प्राईवेट स्कूलो की बात करे तो अब शिक्षा की देवी के साथ धन की दैवी लक्ष्मी जी का भी निवास हैं। हम आज एक सरकारी स्कूल की बात कर रहे है। बच्चो को बेहत्तर भविष्य शिक्षा और संस्कार के लिए हम स्कूल भेजते हैं,ओर यही बच्चे फिर बडे होकर देश को चलाते हैं। इन राष्ट्र निर्माण शालाओ में भारत के भविष्य का निर्माण होता है। बदरवास विकासखण्ड का एक स्कूल अपने शिक्षा की गुणवत्ता ओर अन्य गतिविविधिया के कारण प्राइवेट स्कूलो को चुनौती देता है,और यह संभव हो सका हैं स्कूल के स्टाफ के कारण।
बदरवास विकासखण्ड बक्सपुर के विद्यालय में शिक्षकों के समर्पण भाव,मेहनत, श्रमदान तथा सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और विद्यालय की कायापलट की इच्छाशक्ति के चलते सरकारी विद्यालयों के प्रति लोगों के मन में बसी नकारात्मक छवि को इस विद्यालय ने पलटकर सकारात्मक बनाने का काम किया है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक गोविन्द अवस्थी ने बताया कि विद्यालय के विकास और छात्रों की पढ़ाई के साथ साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों में उन्हें संलग्न कर उनका सर्वांगीण विकास करने की सोच को विद्यालय के शिक्षकों ने ध्येय बनाकर काम किया और फलस्वरूप आज विद्यालय विद्यार्थियों और पालकों के बीच आकर्षण और सम्मान, विश्वास का केंद्र बन गया है।
शिक्षकों की मेहनत का ही परिणाम है कि कक्षा 1से 8 तक संचालित इस विद्यालय के छात्र छात्राएं ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में सम्मानित हो चुके हैं और स्कूल के पूर्व छात्र बोर्ड परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में आते रहे हैं। विद्यालय के शिक्षक गोविन्द अवस्थी भी जिला स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं।
ठेठ ग्रामीण परिवेश और सुविधाओं के अभाव और संसाधनों की कमी के बाबजूद बक्सपुर का यह विद्यालय अपने आप में एक उदाहरण है कि सकारात्मक सोच अगर हो तो संसाधनों के अभाव में भी बेहतरीन कार्य कर उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। अवस्थी ने बताया कि सरकारी स्कूल के प्रति लोगों की अवधारणाओं को बदलने के लिए विद्यालय के शिक्षक जितेंद्र शर्मा, रीना विश्वकर्मा और अनीस मोहम्मद कुरैशी के अथक सहयोग से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के साथ साथ ग्रामीणों का विश्वास हासिल कर विद्यालय के प्रति उनकी अच्छी सोच बनाने का कार्य किया गया है।
स्कूल का आकर्षक लुक, शैक्षिक पेंटिंग और सुसज्जित परिसर लुभाता है छात्रों को
विद्यालय के प्रधानाध्यापक गोविन्द अवस्थी ने बताया कि बच्चों और उनके पालकों को विद्यालय की ओर आकर्षित करने के लिए स्कूल परिसर और भवन को आकर्षक रूप दिया गया है। जहां साफ सुथरे परिसर में कई वर्षों की मेहनत के बाद विभिन्न छायादार,फूलदार और सुंदर आकर्षक पेड़ पौधे लगाए गए हैं जो विद्यालय को आकर्षण और सुंदरता प्रदान करते हैं।
साथ ही सम्पूर्ण विद्यालय को आकर्षक और विभिन्न रंगों से पुताई रंगाई कराई जाती है, स्कूल की बाहरी दीवारों और शिक्षणकक्षों में विद्यार्थियों को जानकारी उपलव्ध कराने हेतु अलग अलग तरह की पेंटिंग्स, सूक्तियां, ध्येयवाक्य ,जानकारियां के साथ ही ज्ञानप्रद चित्र बनवाये गए हैं जो खेल खेल में सहजता से बच्चों को शिक्षा देने के लिए आकर्षण का काम करते हैं।
विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हेतु किये जाते हैं नवाचार, शिक्षक करते हैं आर्थिक सहयोग
विद्यालय में विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों व नवाचारी प्रयोग से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने के साथ ही उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य सहित रहन सहन,साफ सफाई पर ध्यान देकर उनका मानसिक ,शारीरिक और बौद्धिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
विद्यार्थियों आसपास की ऐतिहासिक और अन्य स्थानों से परिचय कराने हेतु शैक्षिक भ्रमण कराया जाता है। विद्यालय संचालन हेतु विभाग द्वारा प्राप्त सहयोग के अलावा निजी तौर पर भी शिक्षक अपना आर्थिक सहयोग विद्यालय को करते हैं जिससे स्कूल की अलग पहचान है।
छात्रों में राष्ट्र एवं राष्ट्रभक्तों के प्रति जगाए जाते हैं आदरभाव
विद्यालय में विद्यार्थियों में अनुशासन, देशभक्ति के भाव जागृत करने, स्वयंसेवा, आत्मनिर्भरता और स्वच्छता के प्रति लगाव, राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीयता से जोड़ने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय त्यौहार, महापुरुषों की जयंतियां सहित अन्य गतिविधियां लगातार होती हैं जिससे राष्ट्र एवं देशभक्ति की भावना बनी रहे। बच्चों को महापुरुषों से परिचित कराने के उद्देश्य से विद्यालय के सभी कक्षों का नामकरण बिभिन्न महापुरुषों के नाम पर किया गया है जिससे छात्रों के मन में उनके प्रति आदरभाव आ सकें।
प्रतिभाओं के लिए होती हैं प्रतियोगिताएं, प्रोत्साहन हेतु मेधावी छात्रों को किया जाता है सम्मानित
बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं, पेंटिंग, रंगोली, चित्रकला, निबंध, भाषण और अन्य कई तरह की प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यर्थियों में विद्यालय के प्रति जुड़ाव का भाव विकसित किया जाता है।विद्यालय में बच्चों के उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन हेतु छात्रों को पुरस्कृत किया जाता है।
बक्सपुर विद्यालय में प्रतिवर्ष स्कूल के ऐसे पूर्व विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन के उद्देश्य से सम्मानित करने हेतु सम्मान कार्यक्रम रखा जाता है जो कक्षा 10 एवं कक्षा 12 में मेधावी होकर प्रावीण्य सूची में आते हैं। इस कार्यक्रम से विद्यालय में पहले अध्ययनरत रहे छात्रों के साथ ही वर्तमान में पढ़ रहे विद्यार्थियों को भी लक्ष्य मिलता है और उनके उत्साह में भी बढ़ोत्तरी होती है।
पालकों का फीडबैक करता है शिक्षकों को प्रोत्साहित
विद्यालय स्टाफ द्वारा विद्यार्थियों के पालकों से नियमित संपर्क कर उनके फीडबैक एवं सुझाव लिए जाते हैं जिससे विद्यालय के प्रति उनके मन में विश्वास और सम्मान का भाव पैदा हो सके।
बालिका शिक्षा एवं बालिकाओं पर बिशेष जोर, बेटी की पेटी बनी बालिकाओं की सहयोगी
विद्यालय में बालिका शिक्षा और बालिकाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है और विद्यालय की छात्राओं को अपनी बात और समस्या,सुझाव को लिखित में बताने हेतु बेटी की पेटी लगाई गई है जिसके माध्यम से बेटियां निश्चिन्त होकर अपनी बात कह सकें। फलस्वरूप छात्राओं का नामांकन विद्यालय में अच्छी संख्या में रहता है।
हराभरा परिसर बना है पर्यावरण संरक्षण का प्रहरी
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु विद्यालय परिसर को हराभरा करने के लिए बड़ी संख्या में फूलदार और छायादार पेड़ पौधे लगाकर विद्यार्थियों को इनकी देखभाल करने का जिम्मा दिया जाता है साथ ही सभी पेड़पौधों की सुरक्षा हेतु जालियां और ट्रीगार्ड लगाए गए हैं। ग्रामीणों का सहयोग पौधारोपण सहित सभी क्षेत्रों में विद्यालय को प्राप्त होता है।
मार्गदर्शन हेतु आमंत्रित किये जाते हैं विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्टजन
विद्यालय के शिक्षकों द्वारा पूरे मनोयोग से विद्याथियों को अध्यापन कराया जाता है फलस्वरूप कई बार विकासखंड स्तरीय जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में विद्यालय के छात्र छात्राओं की सहभागिता रहती हैं।
विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अनुभवी चिकित्सक, पुलिस अधिकारी,समाजसेवी एवं अन्य प्रमुख लोगों को विद्यालय में आमंत्रित कर बच्चों का मार्गदर्शन कराया जाता है।
छोटा पुस्तकालय बांट रहा बड़ा ज्ञान
सीमित संसाधन और उपलब्धता के बीच विद्यालय का अपना एक छोटा सा पुस्तकालय है जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न तरह की ज्ञानप्रद और शिक्षाप्रद पुस्तकें हैं जिनसे विद्यार्थी अपनी जिज्ञासाओं को शांत कर ज्ञानार्जन करते हैं। पुस्तकालय में बड़ी संख्या में शैक्षिक, मनोरंजनीय, राष्ट्रभक्ति, खेलों सहित कई तरह की पुस्तकें हैं जिनका उपयोग विद्यार्थी करते हैं।

