कैसे पढ़ेगा और बढ़ेगा शिवपुरी: आधा लाख वेतन लेने वाले शिक्षकों को कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी का नाम तक पता नही- Shivpuri News

काजल सिकरवार@ शिवपुरी। मप्र में शिक्षा का स्तर लगातार सुधरे इसलिए मप्र सरकार तमाम प्रयास कर रही हैं। देश के शिक्षा के सभी अधिकारियो और कर्मचारियो का मिला लिया जाए तो विश्व के किसी देश से अधिक जनसंख्या भारत के शिक्षा विभाग के कर्मचरियो और अधिकारियो की होगी। देश को साक्षर करने की जिम्मेदारी लेने वाले शिक्षा विभाग का 2020 का कुल बजट 93 लाख करोड है।

वही मप्र के 2020 के बजट की बात करे तो लगभग 15 हजार करोड रूपए है। मप्र सरकार लगातार मप्र में शिक्षा का स्तर सुधारने का प्रयास कर रही है। लेकिन जमीन पर शिक्षा का स्तर शून्य नजर आ रहा हैं। वर्तमान समय में भोपाल समाचार के संवाददाता मुकेश रघुवंशी के द्धवारा लगातार कोलारस क्षेत्र के स्कूलो की ग्राउंड रिर्पोटिंग जारी हैं। इस रिर्पोटिंग में चौकाने वाली जानकारी आ रही है,देश का निर्माण करने वाले शिक्षको को अपने जिला कलेक्टर का नाम भी पता नही हैं,साथ में अपने विभाग के मुखिया अर्थात डीईओ के नाम की भी जानकारी नही है।

थोमस सर नशे में टुन्न:मुखिया के नाम का पता नही

शासकीय प्राथमिक विदयालय पिपरौदा बसाई के शिक्षा थोमस लकडा शराब के नशे मे मिले। उनसे कई सवाल पूछे गए लेकिन सवाल के जबाब सिर्फ ना में थे इन थोमस लकडा साहब को जिला कलेक्टर का नाम की जानकारी नही थी इतना ही नही इनको अपने विभाग के मुखिया अर्थात जिला शिक्षा अधिकारी का नाम तक नही पता था। अब बच्चो को क्या ज्ञान देते होगें यह समझ से परे हैं।

मोदी भक्त हैं मेडम:एक बेरोजगार को दिया रोजगार, अब उनकी जगह पढाता हैं

शासकीय माध्यमिक विदयालय कुमराउआ का स्कूल का नाजरा इन स्कूलो से अलग थे यहां दो क्लासो में बच्चे मिले। एक ही शिक्षक दोनो ही क्लासो में एक ही शिक्षक मिले। इन शिक्षक का नाम गुंची था और यह इस स्कूल की एचएम ने 5 हजार रूपए के वेतन में रखा हैं। 50 हजार से अधिक वेतन लेने वाली महिला शिक्षक ने प्राइवेट स्तर पर एक 5 हजार का शिक्षक बच्चो का पढाने को रखा हैं। शायद मेडम मोदी भक्त हैं उन्होने अपनी वेतन में एक बेरोजगार को रोजगार दिया है।

झाडेल के माध्यमिक विदयालय की HM को कलेक्टर का नाम पता नही

झाडेल के माध्यमिक विदयालय हेडमास्टर सुनीता आर्य स्कूल में मिली,इनसे सवाल किया कि मध्यप्रदेश का शिक्षा मंत्री कौन है तो उन्होने जबाव दिया कि विश्वास सारंग, दूसरा सबाल राज्यपाल कौन है तो इसकी इसकी भी उन्हें जानकारी नहीं है।

जब उसने पूछा कि कलेक्टर तो है वह यह जबाब भी नहीं दे पाई। जब जिला पंचायत सीईओ का नाम पूछा तो वह भी नहीं बता पाई। जब एसडीएम का नाम पूछा तो वह यह भी नहीं बता पाई। जब उसने देश के राष्ट्रपति का नाम पूछा तो उन्होने बताया कि अमरनाथ कोली नाम बताया। जब पीएम का नमा पूुछा तो उन्होने नरेन्द्र मोदी बताया।

यह शिक्षक कर रहे है मोदी जी मदद बेरोजगारी कम करने में,प्रायवेट शिक्षक रखा

जब हमारी टीम शासकीय प्राथमिक विद्यालय मदनपुर पर दोपहर 1 बजे पहुंचे तो वहां बच्चे स्कूल में टीचर का इंतजार कर रहे थे। परंतु शिक्षक नदारद रहे। जब बच्चों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यहां शासकीय टीचर तो नहीं आते परंतु एक प्रायवेट टीचर आते है। जो शासकीय स्कूल में 300 रूपए प्रति छात्र लेकर ट्यूशन पढा रहे है।

जब वहां पदस्थ शिक्षक मुरारीलाल धाकड से संपर्क किया तो उन्होने बताया कि वह अपने खेत में मोटर डलबा रहे है। मेरी उंगली में लग गई। अभी हाल ही में जुगाड लगी है। स्कूल में अभी आ ही रहा हूं। अब शिक्षक की जिम्मेदारी आप समझ ही गए होगे। कुल मिलाकर जिले में शिक्षा विभाग का ठर्रा पूरी तरह से चरमरा गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन पर क्या कार्यवाही करता है।