सांखला परिवार की तपस्या को देखकर उनकी साधना को नमन करने पहुंची जैन साध्वियां- Shivpuri news

शिवपुरी। पर्यूषण पर्व पर प्रतिवर्ष समाजसेवी तेजमल सांखला परिवार के सदस्यों द्वारा निराहर और निर्जल रहकर धर्म आराधना की जाती है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए लगातार 20 साल से आठों दिन पर्यूषण पर्व में निराहार रहने वाले रीतेश सांखला उनके छोटे भाई विपिन सांखला उनकी 13 वर्षीय पुत्री लव्धी सांखला और छोटे भाई नीलेश सांखला के 9 वर्षीय पुत्र अभिनंदन सांखला ने पूरे आठ दिन उपवास रखकर अपने कर्मो की निर्जरा की।

अपने जेठ रितेश सांखला की प्रेरणा से उनकी बहू अल्पा सांखला ने भी अक्षयनिधि तप किया। इसके साथ ही छोटी उम्र की श्रेया और निशिता सांखला ने तीन उपवास की तपस्या की। इसके अलावा परिवार के सभी सदस्यों ने पर्यूषण पर्व के प्रथम और अंतिम दिन उपवास किया। सांखला परिवार की तपस्या से प्रभावित होकर प्रसिद्ध जैन साध्वी शीलधर्मा श्रीजी ठाणा-4 उनके निवास स्थान पर पहुंची और उन्होंने उनकी साधना को नमन करते हुए सांखला परिवार को आर्शीवाद से निहाल किया।

जैन धर्म में उपवास करना बहुत कठिन होता है क्योंकि उपवास के दौरान दूसरे दिन सुबह 7 बजे तक कुछ भी आहार ग्रहण नहीं किया जाता और बहुत से लोग तो जल भी नहीं लेते हैं। जैन परम्परा में उपवास व्रत में जल दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक ही लिया जाता है।


लगातार 20 साल से पर्यूषण पर्व में पूरे 8 दिन निराहार रहने वाले रितेश सांखला ने बताया कि उन्हें सबसे पहले अठ्ठाई करने की प्रेरणा 20 वर्ष पूर्व उनकी मां रीता सांखला ने दी। जिन्होंने उपवास के दौरान उनका लगातार हौंसला बढ़ाया और उनका मनोबल मजबूत किया। जिससे वह हर वर्ष पर्यूषण पर्व में 8 उपवास करते हैं और इस दौरान सांसारिक कर्मो से दूर रहते हैं।

रितेश सांखला की तपस्या से प्रभावित होकर परिवार के अन्य सदस्य यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चे भी बड़ी-बड़ी तपस्या करने लगे। इतनी तपस्या करने के बाद भी पर्यूषण पर्व में पूरे परिवार में अपार उत्साह रहता है और उपवास के अंतिम दिन इस खुशी में नगर के प्रमुख मार्गों से तपस्वी भाईयों और बहनों का जुलूस निकला।

जिसे देखकर नगरवासियों ने उन्हें नमन किया। सांखला परिवार के अलावा जैन साध्वी शीलधर्मा श्रीजी महाराज साहब ठाणा -4 की दो जैन साध्वियां ने भी मोक्ष तप की आराधना की। जिसमें 55 दिन से वह  लगातार तपस्या कर रही हैं। सांखला परिवार की धर्म भावना को देखते हुए और उनकी तपस्या का अनुमोदन करने के लगे जैन साध्वियां उनके निवास स्थान पर पहुंची और उन्होंने वहीं पारणा ग्रहण किया तथा कहा कि सांखला परिवार की साधना सभी लोगों के लिए प्रेरणा की केन्द्र है।