देखरेख के अभाव में खण्डर बनता जा रहा है तात्याटोपे स्मारक, दीवार गिरी, चित्रों पर चढी धूल - Shivpuri News

शिवपुरी। सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले वीर शहीद तात्या टोपे इस समय प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं। तात्या टोपे की याद में शिवपुरी जिला मुख्यालय पर कोठी नंबर 17 में जो स्मारक बनाया गया है वह बदहाल स्थिति में है।

यहां पर तात्या टोपे स्मारक के अंदर जो चित्रों के प्रदर्शन के लिए बॉक्स बनाए गए हैं वहां कई महीनों से सफाई नहीं हुई है। धूल और अव्यवस्था के बीच जहां पर तात्याटोपे के पत्र और उनसे जुड़े हुए ऐतिहासिक दस्तावेज रखे हुए हैं।

इसके अलावा स्मारक भवन की दीवार भी पिछले दिनों हुई तेज बारिश के बीच ढह गई है लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्मारक भवन के केयर टेकर द्वारा इसकी सूचना पुरातत्व अभिलेखागार संग्रहालय के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई गौर नहीं किया।

तात्याटोपे का यह स्मारक आज बदहाल स्थिति में है। केयर टेकर सुरेश बाथम ने बताया कि उन्होंने यहां पर स्मारक के चित्र लॉकर खराब होने और दीवार गिरने के बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया है।

ऐतिहासिक इमारत है कोठी नंबर 17

सन् 1857 की के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन जब तात्याटोपे को अंग्रेजों ने धोखे से पकड़ा तो इसके बाद शिवपुरी स्थित कोठी नंबर-17 में ही तात्याटोपे के खिलाफ अंग्रेजों ने मुकादमा चलाया था। इस मुकदमे की सुनवाई इस कोठी में ही हुई। बाद में इस ऐतिहासिक कोठी के महत्व को देखते हुए इस तात्याटोपे स्मारक में वर्ष 2015 में तब्दील कर दिया गया। इस स्मारक की देखरेख का काम मध्यप्रदेश पुरातत्व अभिलेखागार संग्रहालय किया जाता है लेकिन अफसरशाही की अनदेखी के चलते आज यह स्मारक बदहाल स्थिति में है।

एक केयरटेकर के सहारे संग्रहालय

कोठी नंबर-17 में चलाया जाना वाला तात्याटोपे स्मारक अव्यवस्था के बीच संचालित हो रहा है। इस वर्ष भारत सरकार के द्वारा आजादी के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद भी मध्यप्रदेश पुरातत्व अभिलेखागार संग्रहालय के जिम्मेदारों ने इस स्मारक की बदहाली पर गौर नहीं किया।

केवल एक केयर टेकर सुरेश बाथम के सहारा पूरा स्मारक संचालित किया जा रहा है। कर्मचारियों का अभाव होने से अव्यवस्था का आलम यहां पर है। लाखों रुपए का बजट इस स्मारक के नाम पर वर्ष 2015 में सरकार ने इस पर खर्च दिखा दिया जो जांच का विषय है। देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की इस उपेक्षा को लेकर लोगों में नाराजगी है।