अदभुत मंदिर की अदभुत कथा: यहां अपनी ससुराल छोडकर वापस नही गए श्रीकृष्ण, जमाता बनकर रूक गए यहां - Pohri News

पोहरी। आज जन्माष्टमी हैं आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य के रूप में धरती पर अवतार लिया था। वैसे तो श्रीकृष्ण ओर राधे के हजारो मंदिर भारत देश के साथ विदेश में भी हैं,लेकिन जिले के पोहरी तहसील के किले में स्थित मुरली मनोहर मंदिर को क्षेत्र में बुआ ओर फूफा के मंदिर के नाम से जाना जाता हैं।

वैसे तो भगवान श्रीकृष्ण के सैकडो नाम हैं लेकिन शायद बुआ और फूफा के नाम से पहचाना जाना वाला मंदिर भारत में यह इकलौता हो सकता हैं। पोहरी के पास के गांव के रहने वाले श्रीकृष्ण की बारात पोहरी के किले में अंदर की निवासी राधा रानी से शादी करने जब भगवान की बारात आई तो भगवान श्रीकृष्ण को अपनी ससुराल इतनी पंसद आई कि वह हमेशा के लिए यहा रूक गए। जब से यह पोहरी के बुआ और फूफा हो गए।

बडी ही रोचक कथा हैं भगवान गोविंद की। वैसे तो द्धापर में भगवान श्रीमाधव ने मनुष्य रूप में धरती पर अवतार लिया था अनेको लीलाए उन्होने की आपने शास्त्रो पुराणो में पडी होगी,लेकिन कहते हैं कि भगवान माधव कलयुग में भी अपने चमत्कार दिखाते हैं। ओर यह मंदिर जो बुआ फुफा के नाम से जाना जाता हैं यह भी एक भगवान की एक अदभुत और चमत्कारिक लीला है।

पोहरी के किले के अंदर स्थित मुरली मनोहर मंदिर में विराजमान राधेकृष्ण की प्रतिमाओ के मिलन की एक अदभुत और चमत्कारी कथा हैं। बताया जाता हैं कि विक्रम संवत 1589 में पोहरी के किले के निर्माण के समय खुदाई के दौरान राधा मैया की प्रतिमा निकली थी। जिसे तात्कालिक राजा ने धूमधाम से एक मंदिर में स्थापना करा कर विराजित करवा दिया।

पोहरी से करीब 50 किलोमीटर दूर गल्थूनी गांव में वहां के तत्कालीन जागीरदार जसवंत सिंह ने कृष्ण भगवान का मंदिर बनाने का संकल्प लिया था और कृष्ण भगवान की प्रतिमा के लिए जागीरदार और उनके साथ 5 लोग जयपुर पहुंचे। यह प्रतिमा वही है जो पोहरी के किले के अंदर मुरलीमनौहर मंदिर में श्रीकुष्ण की हैं।

श्रीकृष्ण की मुर्ति लेने पहुंचे इन ग्रामीणो की एक श्रीकृष्ण की प्रतिमा बेहद पंसद आई। उस मुर्ति को देखकर सभी ग्रामीण उस मोहित हो गए लेकिन उनकी जो न्योछावर मांगी गई थी वो 500 चांदोली थी जागीरदार और सभी लोगों को मिलाकर इन पर 300 चंदौली हो पाई, तब सभी लोगों के काफी विमर्श के बाद निर्णय लिया की प्रतिमा तो हम यही ले जाएंगे। रात के अंधेरे में 300 चांदी के सिक्के रखकर,एक पत्र जिसमें लिखा हुआ था कि गांव पहुंचकर आपके बाकी की जो 200 न्योछावर है भिजवा दी जाएगी।

रातों-रात भगवान की प्रतिमा को लेकर सभी पांच लोग गल्थूनी गांव के लिए निकल आए। गांव पहुचकर सबसे पहले 200 चंदोली के साथ एक व्यक्ति जयपुर भेजा गया। गांव में भगवान का छोटा सा मंदिर बनवा दिया गया था, लेकिन गांव में खुशहाली के लिए मंदिर का संकल्प लिया गया था, उसके उल्टा ही गांव में माहौल बनने लगा।

जो लोग कुंवारे थे उनका विवाह नहीं हो रहा था, गांव के जागीरदार को इस विषय में चिंता सताने लगी कि मैंने गांव की खुशहाली के लिए भगवान का मंदिर बनवाने का संकल्प लिया पर सब कुछ उल्टा हो गया। एक दिन भगवान श्री कृष्ण ने जागीरदार को सपना दिया कि गांव में जब तक खुशहाली नहीं आ सकती तब तक मेरी जोड़ी पूरी नहीं होगी, अर्थात कभी भी कृष्ण अपनी राधे के बिना अधूरे हैं। इधर पोहरी में राधा मैया की अकेली प्रतिमा थी और उधर गल्थूनी गांव में भगवान श्री कृष्ण की एकल प्रतिमा।

इस प्रकार पोहरी की राधा के लिए भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा की खोज हो रही थी और गल्थूनी के माधाव के लिए राधा की खोज हो रही थी। 1 दिन संयोगवश यह खोज पूरी हुई। तब गांव के जागीरदार एवं पोहरी के राजा ने भगवान श्री कृष्ण और राधा मैया का विवाह कराने का निर्णय लिया।

ग्राम गल्थूनी से माधव को सजाकर दूल्हा बनाकर बारात पोहरी पहुंची। पोहरी के राजा और उनकी प्रजा ने अपने जमाई के स्वागत के लिए पलक पावडे बिछा दिए। ग्राम गल्थूनी से आई माधव और उनकी बारात का स्वागत सत्कार बडे ही जोरो से किया गया।

शादी की तैयारियां शुरू की गई पूरे रस्मे संपन्न हुई। दूल्हा बने माधव को पान खिलाया गया। राधेमाई की गोद भराई की रस्म की गई। पोहरी में माधव की बारात को पूरे 8 दिन रोका गया। बताया गया हैं कि जहां आज पोहरी के किले में जो मुरली मनौहर का मंदिर हैं उस स्थान पर दूल्हा बने माधव को विवाह उपरांत विश्राम कराया था वहां भगवान श्रीकृष्ण और राधे माई का डोला रखा गया था।

जब सुबह पोहरी की जनता ने अपनी राधेरानी की बारात की बिदा करने की तैयारी की ओर प्रभु श्रीमाधव और उनकी प्रेयसी राधे सरकार का डोला उठाया गया वापस माधव के ग्राम गल्थूनी चलने के लिए तो वह डोला अपनी जगह से हिला ही नही। पूरी कोशिशो के बाद भी जब भगवान का डोला नही हिता तो पोहरी और ग्राम गल्थूनी के लोगो को चिंता होने लगी।

क्या गलती हो गई कया कारण हैं यह। लेकिन माधव तो लीलाधर हैं उन्होने अपनी लीला दिखा दी। रात में लोगो को स्वपन दिया कि में वापस लौटकर नही जाउंगा। मै तो यही रहुंगा। भगवान से सभी भक्तों ने भला बुरा कहा कि ससुराल में घर जमाई बनकर रहोगे क्या? और पता नहीं क्या-क्या बोला? पर भगवान का डोला अपनी स्थिति से नहीं हिला।

अतः सभी लोगों ने हार का निर्णय लिया तथा बरात खाली हाथ वापस चली गई। पोहरी में ही श्रीमुरली मनोहर सरकार का मंदिर बना। इस कारण ही इस मुरली मनौहर मंदिर को बुआ और फूफा का मंदिर कहा जाता हैं।