103 करोड का महाघोटाला: 5 करोड के गबन के मामले में आरोपी बनाए गए कैशियर संम्पत्ति होगी अधिग्रहित

शिवपुरी। सहकारिता बैंक कोलारस के घोटाले की परतें अभी खुलती जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार शिवपुरी सहकारिता बैंक के घोटाले में 103 करोड़ रूपए के गबन का आरोप है। अभी तक तो 5 करोड़ रूपए से अधिक का घोटाला स्पष्ट हो चुका है। जिसमें भृत्य से कैशियर बने राकेश पाराशर सहित तीन लोगों पर गबन की कायमी कोलारस थाने में कर ली गई है।

सहकारिता बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी लता कृष्णन ने कोलारस ब्रांच के कैश्यिर आरोपी राकेश पाराशर की बेनामी सम्पत्ति को अधिग्रहण करने बावत पत्र जारी कर दिया है तथा उस पर साईन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। ताकि अधिग्रहण और कुर्की की कार्रवाई को अंजाम दिया जाए। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी भी जल्द होने के आसार हैं।

सृूत्रों के अनुसार इस पूरे गबन का मास्टरमाईंड आरोपी राकेश पाराशर को माना जा रहा है, जो कि भृत्य से बैंक अधिकारियों की कृपा के कारण कैशियर बना। सहकारिता बैंक कोलारस का खाता स्टेट बैंक में है और उक्त बैंक की राशि स्टेट बैंक में जमा न करते हुए आरोप है कि राकेश पाराशर ने अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी।

श्री पाराशर की कोलारस में समाजसेवी की छवि है और उसका पुत्र भाजपा का एक मंडल पदाधिकारी है। बताया जाता है कि श्री पाराशर के पास लगभग 70 से अधिक बसें और दो दर्जन से अधिक ट्रक हैं। अचानक आए इस पैसे के बारे में यह बताया जाता है कि पाराशर परिवार को जमीन की खुदाई में दफीना मिला है।

लेकिन बैंक घोटाले के बाद स्पष्ट हुआ कि उसे दफीना नहीं बल्कि भ्रष्टाचार कर यह अकूत सम्पत्ति एकत्रित की गई है। कोलारस में भी पाराशर परिवार का एक अलीशान मकान है। बैंक प्रबंधन ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 67 के अंतर्गत एक आदेशित पत्र कोलारस शाखा में इस बावत दिया है कि आरोपी राकेश पाराशर के समस्त बेनामी सम्पत्ति पर सहकारिता विभाग के साईन बोर्ड लगाकर अधिग्रहण और कुर्की की कार्रवाई सपंादित की जाए।

इसके बाद बताया जाता है कि राकेश पाराशर ने आनन-फानन में अपनी चल-अचल सम्पत्ति बेचना शुरू कर दिया है और एक दर्जन से अधिक उसके नजदीकियों ने उसकी बेनामी सम्पत्ति को औने पौने दामों पर श्री पाराशर के निर्देश पर विक्रय कर डाला। इसी तर्ज पर श्री पाराशर की गाडिय़ां भी बेची गई हैं। वहीं आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास भी तेज हो गए हैं। हालांकि अभी तक कोई घोटालेबाज पुलिस गिरफ्त में अभी तक नहीं आए हैं।