Shivpuri News- टाइगर प्राजेक्ट का विरोध शुरू: आदिवासियो का कलेक्ट्रेट पर प्रर्दशन, 6 गांव बन रहे हैं बाधा

शिवपुरी। टाईगर विहिन हो चुके शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में टाईगर लाने की कवायाद शुरू हो चुकी हैं,पार्क प्रबंधन इसकी तैयारी कर रहा हैं,लेकिन इसकी आहट सुनकर ग्रामीणो ने इसका विरोध शुरू हो गया हैं। इस प्रोजेक्ट में 6 गावं के ग्रामीण बाधा बन रहे हैं। इसी क्रम में इन 6 गांव में से 1 गांव के आदिवासियो ने कलेक्ट्रेट आकर इस प्रोजेक्ट का विरोध किया।

माधव नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाले हरनगर गांव के आदिवासियों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए कहा कि अब से कुछ समय पहले कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह, एसपी राजेश सिंह चंदेल और डीएफओ सहित प्रशासनिक अमला नेशनल पार्क के वन क्षेत्र में पहुंचा था। जहां उन्होंने कहा था कि जिन लोगों को मुआवजा मिल गया है वह गांव खाली कर दें और जिनको मुआवजा नहीं मिला है उनकी व्यवस्था सरकार करेगी। ऐसे में हम प्रशासन को दो टूक कहने आए है कि हमारी मांग को सुन ले, हम किसी भी कीमत पर पार्क के लिए गांव खाली नहीं करेंगे।

पास के ही ग्राम राजगढ़ में जब लोगों को वहां से हटाया गया तो 10 लाख का मुआवजा दिया गया था। 10-10 बीघा जमीन मुआवजे के साथ हमें दी जाए ताकि हम अपना भरण-पोषण कर सकें। 50 साल से हम इस गांव में रह रहे हैं हमारे आजे, दादा इस गांव में रहते आए हैं। हम कहां काम करेंगे और कहां बच्चों को रखेंगे इसलिए अपनी परेशानी सुनाने कलेक्ट्रेट आए हैं। ग्रामीणों की इस परेशानी को सुनने वहां डिप्टी कलेक्टर पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों के आवेदन लेकर कहा कि आप सभी की बात को प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाएगा।

जहां तक गांव में मुआवजे की बात है तो अधिकांश लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है। आप लोगों में से कई लोगों को मुआवजा मिल भी गया होगा। जब वहां टाइगर लाने की कवायद शुरू हो गई है तो आप सब लोगों को उस जगह को खाली कर देना चाहिए, जिद नहीं करना चाहिए। इस पर ग्रामीण बोले हम गांव खाली नहीं करेंगे, हमें मुआवजा दो और दूसरी जगह खेती करने जमीन दो तब वहां से हटेंगे।

नेशनल पार्क के इन 6 गांव के बीच मुआवजे को लेकर है विवाद
दरअसल नेशनल पार्क की सीमा में लखनगवा, हरनगर, अर्जुनगवा, मामूनी, और डोंगर गांव आते हैं। वन्य अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पिछले दिनों जानकारी एकत्रित कर यह पाया था कि यहां के 468 परिवारों में से 393 को मुआवजा मिल चुका है और 75 परिवार ऐसे हैं जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है या उन्होंने मुआवजा नहीं दिया है।

इन परिवारों से बातचीत करने की पहल प्रशासन ने शुरू की थी, लेकिन उससे पहले ही अब ग्रामीणों ने नेशनल पार्क की जमीन को खाली न करने का इरादा कर लिया है। जिसके चलते अब विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं।

रविवार को ग्रामीणों ने पोलो ग्राउंड पर खड़े होकर कहा कि सरकार आदिवासियों को परेशान न करें। हमसे हमारा घर छीन लिया तो फिर हम रहने कहां जाएंगे इसलिए पहले हमें पूरा मुआवजा दें और खेती करने के लिए 10 बीघा जमीन भी दें।

ऐसा ही चलता रहा तो फिर टाइगर के पार्क में आने की कवायद पर लग सकता है विराम

दरअसल पार्क सीमा में टाइगर को लाकर छोड़ने की रणनीति वन विभाग ने बनाई है। वहां पूरी तरह से तार फेंसिंग और सुरक्षित एरिया होना चाहिए, लेकिन उस सीमा में कुछ गांव ऐसे आ रहे हैं जहां के लोग या तो वहां खेती कर रहे हैं या वहां झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं।

ऐसे में जब तक इन गांव वालों को शिफ्ट नहीं किया जाता तब तक वहां टाइगर लाने की कवायद नहीं हो सकेगी। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों के पास इन आदिवासियों को वहां से शिफ्ट करना एक बड़ा टास्क होगा।