नमस्तक हुआ जानलेवा भ्रष्टाचार करने वाली RTO मधुसिंह के आगे राज्य सूचना आयोग: हाईकोर्ट पहुंचा मामला - Shivpuri News

शिवपुरी। जानलेवा भ्रष्टाचार के नाम का तमगा पा चुकी शिवपुरी आरटीओ मधुसिंह के आगे राज्य सूचना आयोग भी नमस्तक हो गया। मेडम के कार्यालय से आरटीआई के द्धवारा मांगी गई जानकारी के एक प्रकरण के निबटारे में मेडम के हक में फैसला कर दिया,जिसे आवेदक ने नियम विरूद्ध माना और न्यालयय की शरण ली हैं।

सरकारी विभागों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू किया था जिसके तहत कोई भी सरकारी कार्यालय से दस्तावेजों की प्रमाणित छायाप्रति ले सकता है।

इसके लिए शुल्क भी निर्धारित है। सरकार की मंशा यह थी कि काम में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। किंतु कुछ अधिकारी है सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी उपलब्ध ही नहीं कराते है।

ऐसा ही एक मामला जिला परिवहन विभाग में सामने आया है। जहां शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार केके दुबे को विभाग ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत चाही गई, लेकिन आरटीओ मधु सिंह ने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

इस मामले में प्रथम अपील व द्वितीय अपील भी की गई तब राज्य सूचना आयोग ने चाही गई जानकारी को लोक सूचना अधिकारी एवं जिला परिवहन अधिकारी के पत्र के आधार पर बृहद बता कर ख़ारिज कर दिया। जब मामला राज्य सूचना आयोग द्वारा ख़ारिज किया तो उसके बाद दुबे ने राज्य सूचना आयोग भोपाल के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट ग्वालियर में अपील कर दी है।

यह है मामला
1 जनवरी 2020 से 13 अगस्त 2020 कितने पुराने ट्रैक्टरों को ट्रांसफर किया गया उनकी प्रमाणित सूची व जो पुराने ट्रैक्टर ट्रांसफर किये गए उनकी पंजीयन व बीमा की प्रमाणित आरटीआइ के तहत मांगी गई थी। आवेदन 13 अगस्त 2020 को जिला परिवहन विभाग में दिया गया।

उसके जिलाधीश के यहां 16 सितम्बर 2020 को प्रथम अपील की गई। उनके द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं की गई उसके बाद 23 अक्टूबर 2020 को राज्य सूचना आयोग भोपाल में द्वितीय अपील की गई जिसमें 5 फरवरी 2021 को सुनवाई हुई और सूचना आयुक्त ने अपना निर्णय दिया।