80 साल की जिंदा वृद्धा की कागज में मौत, अब जिंदा होने के कागज के लिए लड रही हैं - Shivpuri News

शिवपुरी। नगर पालिका शिवपुरी के कर्मचारियो ने एक 80 साल की जिंदा वृद्धा को कागजो में मार दिया,अब कागजो में मरी वृद्ध कागज में जिंदा होने के लिए लड रही हैं। रिकार्ड में मृतक के रूप में दर्ज होने के कारण उसकी पेंशन नही मिल रही है। इस मामले को शिवपुरी की मीडिया ने उठाया,तो इस मामले को मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान में लिया हैं।

जानकारी के अनुसार नगर पालिका शिवपुरी क्षेत्र में मंदिरों की देखरेख कर भरण पोषण करने वाली गौना बाई की पेंशन रुक गई थी। कुछ दिन पहले मामला उजागर होने पर मानव अधिकार आयोग ने इसे लापरवाही मानते हुए संज्ञान में लिया है। अब तक वृद्धा गोनाबाई खुद को जीवित बताने रोज नगर पालिका के चक्कर लगा रही हैं। लेकिन उसकी स्टाफ से लेकर अधिकारी कहीं सुनवाई नहीं कर रहे हैं। इसलिए अभी तक गोना बाई की पेंशन बहाल नहीं हो पाई है। नगर पालिका के अधिकारी जिंदा महिला सामने होते हुए भी रिकार्ड में संशोधन नहीं कर रहे हैं।

मप्र मानव अधिकार आयोग ने दो सप्ताह में जवाब मांगा

80 साल की गोना बाई के इस मामले को संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन ने कलेक्टर शिवपुरी से दो सप्ताह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है। किस आधार पर गोना बाई का नाम काटकर पेंशन बंद की है, इसे लेकर आयोग जवाब मांग रहा है। मामले में नगर पालिका के जिस बाबू और अधिकारी ने पेंशन बंद की है, उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

सड़क हादसे में कमर टूट चुकी, भीख मांगना मंजूर नहीं, मंदिर पर काम करती हैं

गोना बाई के पति की, फिर बेटे की मौत हो गई। बहू द्वारा भगाने पर अब अपनी बेटी के आसरे जीवन काट रही हैं। एक सड़़क हादसे में गोनाबाई की कमर टूट चुकी है और वह झुककर चलती हैं, इसके बावजूद उन्हें भीख मांगना मंज़ूर नहीं है। यही कारण है कि उसने चौकसे के मंदिर पर सेवा करना शुरू कर दिया।

इस सेवा के एवज में उसे मंदिर प्रबंधक हर माह बतौर मदद 1500 रुपए देते हैं, ताकि वह अपना पेट पाल सकें। वृद्धा अपनी विधवा बेटी के संग बमुश्किलों से गुजर-बसर कर रही हैं।