Shivpuri News- मिलिए पर्यावरण बाबा से: बंजर जमीन को बाबा ने बनाया स्वर्ग, सभी फल पक्षियों के लिए संरक्षित

शिवपुरी। इंसान चाहे तो क्या नहीं कर सकता इसकी मिसाल करैरा के पास मुंगावली करेठा रोड़ पर स्थित आनंद सागर धाम में देखी जा सकती है। यहां विराजित बाबा नारायणदास जी ने इस आश्रम को स्वर्ग में तब्दील कर दिया है।

जबकि 5 साल पहले तक आश्रम में स्थित 5 बीघा जमीन बंजर पड़ी हुई थी। लेकिन बाबा नारायणदास और उनके अनुयायी कैलाश आदिवासी तथा करैरा के कुछ नवयुवकोंं ने टीम भावना के साथ कार्य कर इस आश्रम को हराभरा बनाकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का परिचय दिया। खास बात यह है कि इस आश्रम में कई फलों के पेड़ लगे है और बाबा की हिदायत है कि सभी फल पक्षियों और चिडिय़ों के लिए संरक्षित रहें।

जिस कारण दिनभर इस आश्रम में पक्षियों का कलरव गूंजता रहता है। आए दिन इस आश्रम में भक्तों द्वारा भंडारे के आयोजन अनुशासित ढंग से किए जाते हैं। पर्यावरण की लंबी-लंबी बाते करने वालों के लिए करैरा से लगभग 2 किमी दूर स्थित यह आश्रम एक मिसाल है।

आश्रम में मौजूद बाबा नारायणदास ने बताया कि यहां तमाम फल वाले और औषधीय वृक्ष लगे हुए हैं। जिनमें कैला, अनार, जामून, आम, अमरूद, बेर आदि के अनेकों पेड़ हैं। आश्रम में पर्याप्त संख्या में नीम लगे हुए हैं। वृक्षों की बहुतायात के कारण गर्मी में भी इस आश्रम में ठंडी और सुगंधित हवा से तन मन प्रसन्न हो जाता है।

भक्तों को हिदायत दे रखी है कि आश्रम में लगे वृक्षों से कोई भी फल न तोड़ा जाए। सिर्फ वहीं फल उठाए जाते हैं, जो पक कर जमीन में गिर जाते हैं। शेष फल चिडियों और पक्षियों के लिए संरक्षित रहते हैं। पक्षियों के लिए आश्रम में पानी की भी विशेष व्यवस्था की गई है। आश्रम में साफ-सफाई के प्रति भी बाबा बहुत जागरूक हैं। बस कमी है तो यहां ट्यूबवेल की।

लेकिन यदि जनहित में इस आश्रम में ट्यूबवेल विधायक या अन्य किसी फंड से लगा दिया जाए तो इससे पर्यावरण को बहुत फायदा होगा। आश्रम में बाबा के नेतृत्व में रवि तिवारी और हेमंत शर्मा आदि नवयुवकों का गु्रप प्रति रविवार को सेवा कार्य करता है। भक्तों ने आनंद सागर धाम में स्थापित करने के लिए शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा भी मंगा ली है। लेकिन अनुमति न होने के कारण अभी प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है।

भाजपा के कारण माफिया से बचा यह आश्रम

इलाके के लोग बताते हैं कि इस आश्रम को बचाने में भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख भूमिका रही थी। कांग्रेस के एक पूर्व विधायक की इस आश्रम पर नजर थी और वह इसका पट्टा अपने नाम कराना चाहते थे। लेकिन स्थानीय नागरिकों और भाजपा के कारण आश्रम अब एक धाम के रूप मेें प्रसिद्ध हो चुका है और भक्तगण के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमी भी आश्रम की सुंदरता को निहारने यहां आते हैं।