पीएम आवास योजना: दीवाल तो खडी हो गई, छत नहीं डल पा रही, बिचौलिए रिश्वत मांग रहे है - Shivpuri News

शिवपुरी। इन दिनों जिले में भ्रष्टाचार पूरे चरम पर है। आज एक मात्र पिछोर क्षेत्र में शौचालय के नाम पर पूरे एक करोड रूपए का घोटाला सामने आया है। ऐसा ही घोटाला अब प्रधानमंत्री आवास योजना में सामने आ सकता है। यहां जिम्मेदार अपने अपने खास लोगों को इस योजना का लाभ दिला रहे है। जबकि जो हकीकत में इस योजना में पात्र है उन तक इस योजना का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

कोलारस की बात करेें तो यहां प्रधानमंत्री आवास योजना का काम सुस्त गति से चल रहा है। स्थिति यह है कि दो साल पहले पात्रता सूची में शामिल होने के बाद भी आवास का काम पूरा होना तो दूर अब तक कई पात्र हितग्राहियों को तीसरी किस्त मिलने का इंतजार है ।

सूत्रों के अनुसार 794 हितग्राहियों में से 583 हितग्राहियों के तीसरी किस्त के रूप में एक लाख रुपए के लिए नगर परिषद को अवेदन प्राप्त हुए थे दो किस्तों से हितग्राहियों ने जैसे-तैसे आवास का आधा-अधूरा काम तो करा चुके है।

लेकिन अब उसे पूरा करने के लिए शेष राशि मिलने का इंतजार

है, छत के लिए पैसे न डलने से हितग्राही नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे है, लेकिन वहां उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। छत न होने से जहां कई परिवारों को बरसात के दिनों में भारी परेशानी का सामना करने को मजबूर होना पड़ेगा।

बिचौलियों ने फिक्स की तीसरी किस्त डालने की रेट

योजना को लेकर परिषद कर्मचारियों के साथ बिचोलियों द्वारा पात्रों से अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं। तीसरी किस्त डलवाने के नाम पर 2 से 5 हजार रुपए मांगने की सूचना मिल रही है, लेकिन हितग्राही लाभ से वंचित होने के डर से खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे है।

इसी का बिचौलिये फायदा उठा रहे है। हितग्राहियों का आरोप है कि बिचौलियों द्वारा उन्हें फोन कर बताया जाता है कि अगर किस्त डलवाना हो तो पैसे तो देने ही पड़ेंगे।

आखिर कब तक करे किस्त का इंतजार

पक्के घर की आश में लोगो ने जहां 2 साल पहले अपने हाथों से स्वयं के आशियाने मिटाए थे। आवास का कार्य आधा अधूरा होने के कारण वह आज किराए से रह रहे हैं य फिर पास में ही टपरा बनाकर निवास कर रहे हैं

बावजूद इसके धन के लालची बिचौलिए गरीबों की किस्तों में बाधा बन रहे है,हितग्राही अपने घर का सपना साकार करने के लिए आवास निर्माण का कार्य कराने के लिए किस्त के इंतजार मे बैठे है । लेकिन धन के अभाव में छत नहीं करा पा रहे हैं।