पति की चप्पलों से पिटाई: धड़ीचा प्रथा के नाम पर होती है स्टांप पर शादी और तलाक, क्या है धड़ीचा प्रथा? - Shivpuri News

शिवपुरी। जिले में आज धडीचा प्रथा के नाम पर स्टांप पर शादी और तलाक का खेल आज भी जारी है। ऐसा ही मामला उस समय सामने आया जब एक पत्नी ने स्टांप पर तलाक लेने से मना किया और पति की जमकर लात और चप्पलों से धुनाई लगा डाली।

यह मामला सामने आने के बाद एक बात साफ हो गई है कि आज भी जिले में धडीचा प्रथा के नाम पर एंग्रीमेंट के तहत शादी और तलाक हो रहा है।

क्या है धड़ीचा प्रथा

धडीचा प्रथा आज भी कई जातियों में जारी है। जिसमें एक स्टांप पर एग्रीमेंंट होता है और उसके बाद महिला और पुरूष पति पत्नी की तरह रहते हैं। इतना ही नहीं जब पति का मन भर जाएं तो वह स्टांप पर ही एग्रीमेंट कर उसे तलाक भी दे देता है। यह खेल आज से नहीं बल्कि कई सालों से जारी है और कई जातियों में धडीचा प्रथा के नाम पर औरतों की खरीद का खुला खेल चल रहा है।

100 रूपए के स्टांप पर होती है लिखा पढी

धडीचा प्रथा में औरत और आदमी की लिखा पढी 100 रूपए के स्टांप पर होती है जिसमें लिखा होता है कि मैं फलां व्यक्ति के साथ अपनी मर्जी से रहना चाहती हूं। इसके बाद स्टांप पर उनकी शादी हो जाती है जिसमें न तो फेरे होते है और न ही अन्य रस्में सिर्फ एग्रीमेंट मैरिज हो जाती है।

महिला और उसके परिजनों को मिलती है राशि

धडीचा प्रथा के नाम पर महिला और उसके परिजनों व पुरूष के बीच जो एग्रीमेंट होता है उसमें कुछ रकम भी तय होती है जिसे एग्रीमेंट में खोला नहीं जाता है जिसके ऐवज में महिला के परिजनों और महिला को भी पैसा दिया जाता है।

पोहरी, सिरसौद सहित पिछोर के कई इलाकों में धडीचा

धडीचा प्रथा की बात करें तो यह सिरसौद, पोहरी व पिछोर खनियाधाना सहित कोलारस और बदरवास इलाके में अब भी होता है और कई लोग धडीचा के नाम पर ही शादी करते हैं और एग्रीमेंट के बाद तलाक भी ले लेते हैं।

कानूनी मान्यता नहीं

धडीचा प्रथा को किसी तरह की कोई कानूनी मान्यता नहीं है बल्कि यह तो स्टांप पर किया गया एक समझौता है। यह बात एडवोकेट दीपक भार्गव का कहना है। उनका कहना है कि कई जातियों में आज भी इस तरह की एग्रीमेंट मैरिज तो होती है लेकिन इसे कानूनी मान्यता नहीं हैं।