अपने फर्ज से पीछे नही हटी राजे, हर क्षेत्र पर थी पैनी नजर: डिस्चार्ज मरीज कर रहे है राजे का गुणगान - Shivpuri News

शिवपुरी। एक योग्य जनप्रतिनिधि कैसा होता है, इसकी सही पहचान संकट के क्षण में होती है। आपदा के इस भीषण दौर में शिवपुरी विधायक और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने एक सच्चे जनप्रतिनिधि के फर्ज का निर्वहन किया। इस विपत्ति से संकट से उभारने के लिए जो भी प्रयास किया जा सकता था, वह उन्होंने किया।

उनके भागीरथ प्रयासों के कारण ही अन्य महानगरों में जहां कोरोना पैंशेंट बैड,ऑक्सीजन आदि के लिए भटकते देखे गए। वहीं शिवपुरी में यह स्थिति निर्मित नहीं हो पाई। मेडीकल कॉलेज और जिला अस्पताल में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था की गई। एक ओर जहां महानगरों में ऑक्सीजन का संकट गहराया। वहीं शिवपुरी में यशोधरा जी के प्रयासों से मरीजों को हर समय ऑक्सीजन मिलती रही।

मेडीकल सहायता से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की मदद देने के कार्यो में यशोधरा राजे पीछे नहीं रहीं। शिवपुरी जिला अस्पताल मेें आज उस समय भावुक दृश्य उत्पन्न हो गया। जब जिंदगी और मौत से जूझ चुके 10 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घरों के लिए रवाना हुए। इनमें 62 वर्षीय गायत्री मिश्रा भी थी।

जिनकी लगभग डेढ़ माह बाद अस्पताल से छुट्टी हुई और गंभीर स्थिति में यशोधरा राजे ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उनके लंग्स में 80 प्रतिशत इंफेक्शन था और ऑक्सीजन लेवल 60 रह गया था। इसके बाद दवाईयों से लेकर रेमडेसिविर इंजेक्शन तक की व्यवस्था यशोधरा राजे ने उनके लिए सुलभ कराई।

श्रीमति गायत्री मिश्रा कहती हैं कि मेरे पास महाराज साहब का आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं है। कोई अपना भी इतना नहीं करता जितना उन्होंने मेरे लिए किया है। इसके अलावा उन्होंने डॉ. दिनेश राजपूत और डॉ. संजय ऋषिश्वर के विशेष प्रयासों का भी जिक्र किया।

अन्य मरीजों ने भी यशोधरा राजे और डॉ. एएल शर्मा, डॉ. दिनेश अग्रवाल, डॉ. दिनेश राजपूत, सिविल सर्जन डॉ. संजय ऋषिश्वर का आभार व्यक्त किया। आज एक गरिमापूर्ण समारोह में सभी 10 मरीजों को डिस्चार्ज कर डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की राजनीति में अपनी एक अलग ही पहचान है। अपनी मां राजमाता विजयाराजे सिंधिया के राजनैतिक उत्तराधिकारी के रूप में वह राजनीति में सक्रिय हुई और उनका कहना है कि हर समय उनकी मां उन्हें अदृश्य रूप में सचेत करती रहती हैं।

इससे उन्हें हमेशा सदकार्य और जनता की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। यहीं कारण है कि यशोधरा राजे के व्यक्तित्व में संवेदनशीलता का बाहुल्य है और किसी के भी दुख को देखकर उन्हें पीड़ा होती है।

शिवपुरी में कई मौकों पर उनकी संवेदनशीलता के दीदार हुए हैं। पिछले कोराना काल में भी उनकी सक्रियता देखने को मिली थी। लेकिन इस बार तो यशोधरा राजे जनसेवा के लिए पूरे समय सक्रिय रहीं और सुबह से लेकर देर रात तक वह लोगों के मोबाइल फोन और व्हॉट्सएप मैसेज को चैक कर उन्हें सहायता सुलभ कराने में जुटी रहीं।

जिला अस्पताल में जब बैड का संकट उत्पन्न हुआ तो उन्होंने तुरंत मेडीकल कॉलेज में डॉक्टरों से परामर्श कर आईसीयू की व्यवस्था शुरू कराई और आज मेडीकल कॉलेज में लगभग 130 पैशेंट भर्ती हैं। जिनके उपचार से लेकर बेहतर खाने पीने की व्यवस्था की जा रही है। डॉक्टरों को इस कोरोना काल में किस तरह से जिम्मेदारी दी जाए, यह भी यशोधरा राजे ने सुनिश्चित किया।

जिस किसी ने भी यशोधरा राजे से मदद की मांग की उन्होंने कभी मना नहीं किया और देर रात तक वह लोगों की सहायता में जुटी हुई हैं। शिवपुरी में उनका कार्यालय उनके निर्देशानुसार पीडि़तों को हर संभव मदद दे रहा है और एक-एक मरीज की प्रोगे्रस रिपोर्ट वह ले रही हैं।

यह यशोधरा राजे ही थीं, जिन्होंने निष्कर्ष निकाला की शिवपुरी में कोरोना का बढ़ता संक्रमण अस्पताल से फैल रहा है। अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज के पास बिना किसी भय के उनके मिलने जुलने वाले हाल चाल जानने जा रहे थे और संक्रमण लेकर वह पूरे शहर में फैला रहे थे।

इसके बाद यशोधरा राजे ने डॉक्टरों से परामर्श कर कोरोना वार्ड में लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कराया और उसकी वैकल्पिक भी व्यवस्था भी की, कि मरीज के पास एक अटेंडर पीपीई किट पहनकर जा सके। ताकि मरीज अवसाद का शिकार न हो। उनके प्रयासों के कारण शिवपुरी में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी भी नहीं रही और जिस मरीज को भी डॉक्टरों ने इंजेक्शन सजेस्ट किया उसे इंजेक्शन लगा।