रियल कोरोना फाईटर: नवजात को दूध नहीं पिला सकती इसलिए नहीं कराई वैक्सीनेशन, फिर भी दे रही है कोरोना में ड्यूटी - Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना वॉरियर्स की यूं तो तमाम कहानियां हैं। लेकिन शिवपुरी मेडीकल कॉलेज में ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट के रूप में पदस्थ डॉ. नीलम्बरि चौकसे इस मायने में मिसाल है कि वैक्सीनेशन न कराने की बाध्यता के बावजूद भी उन्होंने कोरोना ड्यूटी से परहेज नहीं किया। उनकी जिंदादिली का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वह अपनी ड्यूटी भी कर रही हैं और घर में बच्चों को भी संभाल रही हैं।

डॉ. नीलम्बरि चौकसे ने बताया कि भगवान और माता पिता के आर्शीवाद से वह जब समूची मानवता संकट में है, तब उन्होंने इस यज्ञ में अपनी छोटी आहूति देने का निर्णय लिया है। उनके लिए यह काम के साथ-साथ मन का आनंद भी है और वह कहती हैं कि आत्म संतुष्टि से बढ़कर कुछ नहीं है।

डॉ. नीलम्बरि चौकसे इंदौर से हैं और उनकी शादी शिवपुरी के प्रतिष्ठित चौकसे परिवार में हुई है। शिवपुरी मेडीकल कॉलेज में वह पदस्थ हैं और जब उन्हें यह जानकारी मिली कि उनकी ड्यूटी कोविड में लगाई जा रही है। उस समय एक क्षण को तो वह संकोच में पड़ी क्योंकि उनके दो छोटे-छोटे बच्चें हैं। बड़ा ढ़ाई साल का और छोटे साहब एक वर्ष के हैं। जिसे वह फीडिंग भी कराती हैं।

आईसीएमआर की गाईडलाईन के मुताबिक वह वैक्सीनेशन नहीं करा सकती। ऐसी स्थिति में क्या उन्हें कोविड ड्यूटी करना चाहिए, यह एक बड़ा सवाल था। लेकिन सवाल जब मानवता और मानवीय मूल्यों को बचाने का हो तो बात कुछ अलग हो जाती है। यह विचार कर डॉ. नीलम्बरि चौकसे ऊहापोह से मुक्त हुईं और उन्होंने निर्णय लिया कि वह ड्यूटी भी करेंगी और बच्चों का काम भी करेंगी।

उन्होंने 4 साल पहले जिस ऑक्यूपेशनल थैरेपी की डिग्री पाने के लिए मेहनत की, उसे जाया नहीं जाने देंगी। तब उन्होंने भगवान का नाम लेकर और अपने माता-पिता के आर्शीवाद से इस काम को सेवा भावना के साथ करना स्वीकार किया। ऐसी मातृशक्ति को कोटि-कोटि नमन।