अब नारियल पानी 80 के पारः फल और सब्जी के भाव का भी ग्राफ बढ़ा - Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना को काबू में लाने के लिए प्रशासन बार-बार कोरोना काफ्र्यू को बढा रहा हैं,इसके कारण मार्केट में समान की किल्लत बनी हुई हैं। जिले में संक्रमण की रफ्तार लगातार फैल रही हैं। कोरोना मरीजो को नारियल पानी रामबाण साबित हो रहा हैं इस कारण मार्केट में नारियल पानी की मांग बनी हुई हैं।

वही घर-घर वायरल अपनी पकड बना रहा हैं,वायरल के साथ-साथ टाईफाईड भी कई लोगो को हो रहा हैं,टाईफाईड में ब्लड प्लेटगिर रही हैं इस कारण डाॅक्टर सबसे पहले नारियल पानी का सवेन बता रहे हैं। इस कारण नारियल पानी की रेट मं लगातार उछाल आ रहा हैं। वर्तमान समय की बात करे तो 80 रूपए के पार नारियल पानी पहुंच चुका हैं।

वही प्रशाासन भी नही कर रहा हैं माॅनिटिरिंग

बाजार पूरी तरह से बंद हैं। ऐसे में प्रशासन ने घर घर सब्जी और फल पहुंचाने की व्यवस्था करने की बात कही थी साथ ही हाथ ठेलों और दुकानों पर सामान की रेट लिस्ट चस्पा करने की भी बात कही थी लेकिन प्रशासन की हीला हवाली के चलते कालाबाजारी चरम पर हैं। लोगों के स्वास्थ्य को सेहतमंद बनाने वाले फलों के दाम भी आसमान छू रहे हैं ऐसे में लोग फलों के स्वाद को वाय वाय कह रहे हैं। आज शहर में जो नरियल पानी का भाव है उसे सुनकर आपके होश उड जाएंगे।

सेव और संतरे के दाम में उछाल

सेव और संतरे के दाम तो छोडिए 20 रूपए किलो में बिकने वाले केले का भाव भी 40 रूपए किलो हो गया है। ऐसे में लोगों का कहना है कि फल और सब्जी विक्रेता अपने हिसाब से दाम तय करते हैं और फल और सब्जी पर प्रशासन का कोई अंकुश नहीं हैं।

कहां गई कालाबाजारी रोकने वाली टीम

जिला प्रशासन ने भले ही कागजों में कालाबाजारी रोकने के लिए टीम बना दी हो लेकिन हकीकत यह है कि यह टीम एक भी दिन बाजारों में या सब्जी मंडी या फल मंडी नहीं पहुंची नतीजे में विक्रेताओं ने मनमाने भाव से सामान देना शुरू कर दिया है और इसके बीच पिस रही है मासूम जनता।

यह बोले लोग

शहर में आज नारियल पानी का भाव 80 रूपए सुन मेरे तो होश उड गए। पहले कभी 40 रूपए में मिलता था।
लल्ला अग्रवाल

फल तो छोडिए सब्जी और अन्य सामान की कालाबाजारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने दावे तो बडे किए थे लेकिन कहां है उनकी टीम हम कलेक्टर से पूछते हैं।
सुनील तिवारी

वाह रे भगवान जो फल लोगों की सेहत सुधारते लेकिन कोरोना काल में उन फलों के दाम भी आसमान छू रहे हैं ऐसे में मध्यमवर्गीय खाए तो क्या खाए।
सीता शर्मा