जिदंगी की रेस मे पिछड रहा हैं सरकारी सिस्टम में कैद रेमडेसिविर इंजेक्शन:अब यह है हमारी नेशनल ड्यूटी - Shivpuri News

ललित मुदगल@ शिवपुरी। शिवपुरी जिले के वायुमंडल में कोविड 19 का संक्रमण घुल गया हैं,शुक्रवार को कोविड 19 की जांच रिर्पोटो में पाॅजीटिव मरीजो का आंकडा डराने वाला हैं आरटीपीसीआर की जांच हर दूसरे व्यक्ति को पाॅजीटिव निकाल रही हैं। अस्पताल में अब बेड नही हैं।

सिस्टम चाहे पूरी ताकत झोक रहा हो इस संक्रमण से निबटने के लिए लेकिन रिजल्ट जीरो आ रहा हैं इस कारण हम सिस्टम को फैलीयर मानेगें। पिछले साल 2020 में लाॅकडाउन शब्द का उपयोग किया गया था।

इस बार कोरोना कफ्यू शब्द का उपयोग किया गया है। देश में मेंडिकल ईमरजैंसी हैं,हमे केवल अब स्वास्थय सुविधाए चाहिए,केवल स्वास्थय सुविधाए। अस्पताल के आईशोलेशन वार्ड का नाजारा बडा अजीव हैं दिन भर आईशोलेशन वार्ड लाश उगल रहा हैं।

अंदर और बहार खडे परिजन चिंता ग्रस्त नजर आते हैं,किसी के मरीज को आक्सीजन नही मिल रहा हैं,किसी को जीवन रक्षक रेमडीसिवर इंजेक्शन नही मिल रहा है। हालात यह हो गए है कि अब जिले में कोविड 19 के मरीज को बेड उपलब्ध कराना बडा ही चुनोतीपूर्ण कार्य हैं।

अब गरीब और असहाय लोगो की कोई सुनवाई नही हैं,केवल उन्ही लोगो की सुनवाई हैं जो पहुंच वाले है। आम आदमी को सिस्टम ने सुकुड दिया हैं। कोरोना से लडने में स्वास्थ्य विभाग की सांसे फूल रही हैं अब संक्रमण को घटाने का नही आकंडो को घटाने की जुगत लगानी शुरू कर दी है।

जिंदगी की रेस में पिछड रहा हैं जीवन रक्षक रेमसीसिवर

शिवपुरी निवासी रमेशचंद्र सेन पिछले 2 दिन से जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती हैं। सीअी स्कैन की रिर्पोट में उन्है 80 प्रतिशत इंफेक्शन बताया गया है। रमेश चंद्र के परिजनो के अनुसार पहले दिन से ही उन्है आॅक्सीजन और प्राथमिक उपचार के लिए सिस्टम से लडना पडा।

जैसे तैस बेड और आॅक्सीजन मिल गई। मरीज के बेटे नरेश के अनुसार डाॅक्टरो ने इंफेक्शन को देखते हुए मोखिक सलाह दी है कि इन्है रेमडेसिवर इंजेक्शन की आवश्यकता हैं,परंतु इंजेक्शन आपको बाजार से लाना पडेगा तभी हम लगा पाएंगें,क्यो की इंजेक्शन स्टाॅक में नही हैं।

अब सवाल यह उठता हैं कि जिस मरीज के 80 प्रतिशत फैफडे संक्रमित हो चुके हैंतो उसके पर्चे पर डाॅक्टर इंजेक्शन क्यो नही लिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन है तो इस गरीब की जीवन रक्षक आॅषधि को सरकारी पिंजरे में क्यो कैद कर रखा हैं,अगर इस मरीज की सांसो ने साथ छोड दिया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

संतो बाई की नही हो रही सुनवाई

ऐसा ही एक मामला पोहरी के ग्राम धामोद की संता वाई धाकड का सामने आया हैं। संतो को कोरोना पाॅजीटिव होने के चलते शुक्रवार की सुबह अस्पताल में कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया।

परंतु हालात यह बने की शाम 5 बजे तक संतो बाई कागजो में एडमिड थी,लेकिन धरातल पर संतो बाई को पलंग भी नसीब नही हुआ उपचार की बात तो बाद में करेंगेे। संतो बाई का आक्सीजन लेवल 80 तक जा पहुंचा। इसके बाबजूद संतो बाई की सांसो को आक्सीजन का सहारा नही मिला।

सवाल यह भी बनता है कि इस लेवल पर मरीज को आक्सीजन नही मिली तो फिर कब मिलेगी। क्या आक्सीजन पर भी गरीबो का हक नही हैं।

यहां निमय में फस गया जीवन को बचाने वाला इंजेक्शन

वही एक ओर मामला सामने आया हैं कि शहर के एक प्राईवेट हाॅस्पिटल में अशोक शर्मा नाम के मरीज भर्ती हैं कोविड 19 के कारण उनके फैफडे 40 प्रतिशत से अधिक संक्रमित हो चुके हैं,लेकिन उनकी कोरोना की जांच नही हुई हैं। अशोक शर्मा का ईजाज कर रहे डाॅक्टरो ने रेमेडसिवर इंजेक्शन लिखा हैं,लेकिन सरकारी सिस्टम में फसा यह जीवन रक्षक इंजेक्शन बहार नही निकल पा रहा हैं।

बताया जा रहा है कि नियमानुसार जब तक मरीज जांचो में पाॅजीटिव नही आऐगा तब तक उसे इंजेक्शन नही मिलेगा,अगर इन उखडती सांसो के साथ उसकी जांच कराने जांते हैं ओर मरीज की आक्सीजन हटाते हैं तो लेबल खतरनाक रूप से गिर रहा हैं,अब प्राईवेट में परिजन इंजेक्शन की तलाश कर रहे हैं।

हमे अब स्वयं को अपना 200 प्रतिशत देना होगा

यह शहर समझ ले कि स्थिती खबरनाक मोड पर हैं हमे अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी। यह समझ ले कि इस समय कोविड 19 के वायरस से हमे युद्ध करना होगा। हमे अपनी सुरक्षा स्वयं करनी हैं,कोविड 19 के नियमो का पालन करना हैं। अगर हमने अपने आपको और अपने परिवार को इस संक्रमण से बचा लिया तो मान ले कि आप एक सच्चे देश भक्त हैं,अगर आपके आस पडौस मे कोई व्यक्ति नियमो का पालन नही करता हैं तो उसे आप रोके और टोके अब यह आपकी नेशनल जिम्मेदारी हैं।