मेडिकल काॅलेज ने अस्पताल से वापस बुलाए डाॅक्टर और स्टाफ, कलेक्टर ने CMHO आफिस से 43 कर्मचारी बुलाए

शिवपुरी। कोरोना महामारी में मेडिकल काॅलेज का अस्पताल शुरू हो चुका है। इस कारण मेडिकल कालेज ने जिला अस्पताल से अपना स्टाफ वापस बुला लिया है। काॅलेज का अस्पताल शुरू न होने के कारण मेडिकल काॅलेज का स्टाफ जिला चिकित्सायल में अपनी सेवाए दे रहा था,लेकिन सोमवार को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अधिकारिक रूप से अलग-अलग हो गए।

मेडिकल कॉलेज ने जिला अस्पताल में अटैच किया हुआ अपना पूरा स्टाफ वापस बुला लिया है। इससे जिला अस्पताल प्रबंधन चिंता में पड़ गया है कि आखिर कोरोना की आपदा में स्टाफ कहां से लेकर आएं। यहां का कोरोना आइसोलेशन वार्ड और आइसीयू के साथ कई अन्य विभाग भी मेडिकल कॉलेज द्वारा ही चलाया जाता था।

खुद की बिल्डिंग तैयार न होने पर 100 से ज्यादा डॉक्टरों सहित करीब 180 का स्टाफ मेडिकल कॉलेज का जिला अस्पताल में काम कर रहा था। अब मेडिकल कॉलेज में भी 100 बेड के साथ कोरोना का इलाज शुरू कर दिया गया है इसलिए उन्होंने अपना पूरा स्टाफ भी वापस बुला लिया है। मेडिकल कॉलेज की ही स्टाफ अभी तक जिला अस्पताल का कोविड आइसोलेशन वार्ड और आइसीयू देख रहा था जिसे वापस बुलाया गया है। जिला अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी सभी स्वास्थ्य संस्थाओं से स्टाफ को बुलाया है जिसमें से कई ने जॉइन भी कर लिया है।

मेडिकल कॉलेज की तुलना में आधे चिकत्सिक भी नहीं

जिला अस्पताल में करीब 45 चिकित्सक हैं जिसमें सर्जरी, गायनिक, ऑर्थोपेडिक, मेडिसिन, शिशुरोग आदि सभी विभाग शामिल हैं। मेडिसिन विशेषज्ञ भी जिला अस्पताल में काफी कम हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज के पास 120 से अधिक डॉक्टर हैं। जिला अस्पताल पहले से ही पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां की सेंट्रल लैबोरेटरी में 90 फीसद स्टाफ मेडिकल कॉलेज का ही था। स्वास्थ्य विभाग व्यवस्थाएं बनाने के लिए अस्थाई भर्तियां भी कर रहा है। मेडिकल कॉलेज का स्टाफ भी ज्यादा स्किल्ड माना जाता है। ऐसे में परेशानी बढ़ना तय है।

स्वास्थ्य संस्थाओं से बुलाया स्टाफ, हर शिफ्ट में 15 की जरूरत

जिला अस्पताल में ऊपर की मंजिल और ग्राउंड फ्लोर पर दो आइसीयू और तीन आइसोलेशन वार्ड संचालित किए जा रहे हैं। 30 आइसीयू के बेड, 62 ऑक्सीजन के बेड हैं। इन सभी में 5 डॉक्टर और 10 पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत एक शिफ्ट में रहेगी।

जिला अस्पताल को मिले 43 कर्मचारी

बेकाबू हुई कोरोना महामारी को देखते हुए कलेक्टर अब खुद ही व्यवस्था संभालते दिख रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अधीन काम करने वाले स्टाफ के 43 लोगों को सोमवार को तत्काल प्रभाव से सिविल सर्जन के अधीन कर दिया है। यह स्टाफ अब जिला अस्पताल में सिविल सर्जन के निर्देश में सेवाएं देगा।

कलेक्टर ने चेतावनी पत्र जारी किया है जिसमें 6 आयुष एमओ, 22 स्टाफ नर्स, 10 लैब टेक्नीशियन और 5 फार्मासिस्ट के नाम हैं जिन्हें जिला अस्पताल शिवपुरी में कार्य करने के लिए सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक शिवपुरी के अधीन कर दिया है। इसी के साथ संबंधितों की ड्यूटी बदलकर अलग-अलग जिम्मेदारी सौंप दी है।

सिविल सर्जन ने आदेश जारी किया है, जिसमें नेत्र अस्पताल के पीजीएमओ डॉ. दिनेश अग्रवाल को प्रशासकीय कार्य सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू का नोडल बना दिया है। डॉक्टर अग्रवाल भर्ती मरीज को दवा उपलब्ध कराने, जांच, इलाज संबंधी प्रोटोकॉल का पालन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की क्रियाशीलता के लिए व लिफ्ट संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इनका कहना है
जिला अस्पताल में कोविड का ट्रीटमेंट मेडिकल कॉलेज का स्टाफ देख रहा था जिसे वापस बुला लिया गया है। हमने दूसरी स्वास्थ्य संस्थाओं से स्टाफ बुलाया है। इनमें से कई ने ज्वॉइन कर लिया है और जिन्होंने नहीं किया है उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं।
डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर, सिविल सर्जन।