स्वास्थ विभाग का काला सच: 338 पॉजिटिव मरीजों में 31 मरीजों को उठाने में फूलने लगी हैं स्वास्थ्य विभाग की सांसे - Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में कोरोना अपनी पूरी रफ्तार से दौड रहा है। पॉजीटिव मरीजो को निगेटिव करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की हैं। वर्तमान की बात करे तो जिले में 338 मरीज पॉजीटिव हैं जिनमे से 15 के लगभग कोरोना पॉजीटिव मरीज जिला अस्पताल के कोविड आईसीयू मे औरा 16 लोग कोविड वार्ड में भर्ती हैं,केवल 31 मरीजो की जिम्मेदारी उठाने में स्वास्थय विभाग की सांसे फूलने लगी है।

इस समय मेडिकली ईमरजैंसी का समय चल रहा है। हमे कोरोना को हराना हैं लेकिन सवाल बनता हैं कि कैसे। इन दोनो वार्डो की व्यवस्थाए वैंटी पर है। जो वार्ड संक्रमितों से भरा है उसमें संक्रमितों के स्वजन ही वार्ड बॉय का काम कर रहे हैं। वे लोग ही अंदर दवा देने जा रहे हैं, अपने स्वजनों को बाथरूम आदि ले जा रहे हैं। ऐसे में उनका भी संक्रमित होना तय है।

इनमें से अधिकांश को कोरोना के लक्षण भी आ रहे हैं,लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इनकी जांच तक नहीं करा रहा है। कई मरीजों के स्वजन जिला अस्पताल में चक्कर लगा रहे हैं कि जांच करा दें, क्योंकि हमारे अंदर भी कोरोना के लक्षण हैं। इसके बाद भी इनकी जांच नहीं की जा रही है। मरीज खाना भी घरों से ही मंगवा रहे हैं, क्योंकि यहां पर जो खाना मिल रहा है उसकी क्वालिटी बहुत घटिया है।

मरीजों के भागने से खुली व्यवस्थाओं की पोल

हाल ही में जिला अस्पताल से चार कोरोना संक्रमित भाग गए थे जिन पर प्रबंधन की ओर से एफआइआर भी दर्ज करा दी गई थी। इस घटना से भी यह स्पष्ट होता है कि जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं कितनी बदतर हैं कि मरीजों को भागना पड़ रहा है।

यह मरीज भागकर कहीं और नहीं, बल्कि अपने खुद के घर ही गए। वर्तमान में भर्ती मरीजों की स्थिति भी ऐसी है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है कि इस महामारी में जाएं तो जाएं कहां। स्वास्थ्य विभाग भी कागजों पर अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त बताने में जुटा हुआ है जबकि जमीनी स्तर पर मरीज अपनी दुर्दशा पर आसूं बहा रहे हैं।

कलेक्टर इधर ध्यान दें, ब्लैक में बिक रही हैं कोरोना की दवाए

मरीज बढ़ने के साथ मेडिकल स्टोर संचालकों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी भी शुरू कर दी है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को डॉक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन लिख रहे हैं। कई शहरों में तो यह इंजेक्शन पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, लेकिन शिवपुरी में मिल रहे हैं। इनकी बढ़ती मांग और कम उपलब्धता के चलते मेडिकल स्टोर संचालक मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

बाजार में यह इंजेक्शन चार से साढ़े चार हजार रुपये में बेचा जा रहा है। मरीजों के स्वजनों को मजबूरी में यह खरीदना भी पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो शहर के बाजारों से रेमडेसिविर को गायब होते देर नहीं लगेगी क्योंकि इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में यह इंजेक्शन पहले ही खत्म हो चुके हैं।

खुद कोविड वार्ड में जाकर करते हैं माता-पिता की मदद

मोनू भार्गव ने बताया कि उनके माता-पिता दोनों ही कोरोना संक्रमित हैं। पिता रामकुमार भार्गव को तीन दिन पहले और मां शिमला भार्गव को दो दिन पूर्व जिला अस्पताल में भर्ती किया। मोनू ने बताया कि मुझे और परिवार के एक अन्य सदस्य को कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं।

हर दिन जांच के लिए कह रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में अधिकारी दवाएं देकर कहते हैं कि जांच की जरूरत नहीं है यह दवाई खा लो, ठीक हो जाओगा। अंदर कोई वार्ड बॉय तक नहीं है। माता-पिता को बाथरूम कराने ले जाने के लिए खुद अंदर कोविड वार्ड में जाना पड़ता है। अब वहां जाकर संक्रमित तो होंगे ही। इसके बाद भी जांच नहीं कराई जा रही है।