शिवपुरी की शान सेंड स्टोन नियमों के पिजंरे में कैद, विदेशों तक थी पहचान - Shivpuri news

शिवपुरी। शिवपुरी जिले की पत्थर खदानों को जीवन दायिनी कहा जाता था और यहां की पत्थर खदाने हर रोज हजारों परिवारों का भरण पोषण करती थी लेकिन वन संरक्षण अधिनियम के बहाने शिवपुरी की 22 पत्थर खदानों को बंद तो कर दिया गया क्योंकि यह माधव नेशनल पार्क के क्षेत्र में आ रही थी।

जिसके बाद कुछ खदानें ही चल रही थी जिनमें से एक मझेरा खदान भी थी लेकिन फोरलेन निर्माण के चलते इसे भी बंद कर दिया गया है। कभी विदेशों में दीवारों पर शोभा बढाने वाला यहां का ऐसिड प्रूफ पत्थर की खदान में अब मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और अब यहां छैनी हथौडे की गूंज नहीं सन्नाटा पसरा हुआ है।

विदेशों में जाता था यहां का पत्थर
मझेरा खदान का पत्थर शिवपुरी से विदेशों में जाता था और इस पतथर को खासकर उन समुद्री इलाकों में दीवारों पर लगाया जाता था जहां पर नमक कें कारण दीवारों का प्लास्टर या कलर जल्दी खराब हो जाता था जिसके बाद यहां इस ऐसिड प्रूफ पत्थर को लगाया जाने लगा। जिससे यहां से यह पत्थर विदेशों में भारी मात्रा में जाता था।

स्टोन पोलिसिंग फैक्ट्रियों पर भी संकट
स्टोन पोलिसिंग फेक्ट्रियों भी यहां काफी तादात में खुल गई थी क्योंकि शहर से पत्थ्ज्ञर विदेश जा रहा था ऐसे में पॉलिस किए हुए पत्थर की मांग अधिक थी जिसके चलते यहां 150 से अधिक फैक्ट्रियां भी खुली लेकिन अब सब बंद होने की कगार पर है। कई फॅैक्ट्रियों में तो ताले ही डल गए हैं।

मजदूरों के सामने खडा हुआ रोजगार का संकट
कभी खदानों में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मजदूरों के सामने भी रोजी रोटी का संकट खडा हो गया है और अब कई मजदूर तो जिले से पलायन कर दूसरे राज्यो में चले गए हैं।