महाशिवरात्रि विशेष: शिवपुरी में सूखे पहाड से गिरती जलधारा करती है शिवजी का अभिषेक - karera News

करैरा। कल महाशिवरात्रि है और पूरे देश में इस दिन शिवजी की आराधना पूरी धूमधाम से मनाई जाती है। इसी के चलते हम आपको ऐसे तीर्थ स्थल के बारे में बता रहे है जो कि शिवपुरी शहर से महज 60 किमी दूर है। यह मंदिर पूरी तरह से प्राकृतिक सौंदर्य को बिखेरे हुए है। वह मंदिर है करैरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत उडवाहा के जंगलों में।

करैरा से 25 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत उड़वाहा के नजदीक जंगल में विशाल पहाड़ पर स्थित धनेश्वर महादेव प्राकृतिक सौंदर्य बिखेरे हैं। यहां उड़वाहा ग्राम से पांच किलोमीटर दूर लगभग 500 फीट ऊपर विशाल पहाड़ स्थित हैं। तलहटी पर मड़ीखेड़ा डैम के भराव का पानी भरा रहता है। इसके रख रखाव के लिए चारो ओर कच्ची सड़क बनी है। उसी सड़क का उपयोग कर पहाड़ पर जाने का रास्ता बना हुआ है।

वहीं पर पहाड़ से लगभग डेढ़ सौ फुट नीचे एक कुंड स्थित है। कुंड व पहाड़ के मध्य भगवान धनेश्वर महादेव विराजे हैं। धनेश्वर महादेव के ऊपर पहाड़ों से अनवरत जल गिरता रहता है, जबकि ऊपर पहाड़ सूखा हुआ है, कहां से जल आता है, किसी को नहीं पता। धनेश्वर महादेव की मूर्ति भी बहुत प्राचीन है। इसका इतिहास सैकड़ों वर्ष पूर्व का बताया जाता है। शिवरात्रि पर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

10 साल पहाड़ से नहीं उतरे धनेश्वर बाबा
यहां पर जो धनेश्वर बाबा मंदिर की देखरेख करते हैं, वो पहाड़ पर ही निवास करते हैं। धनेश्वर बाबा के बारे में कहा जाता है कि पिछले 25 वर्ष पहले यहां आए हुए थे, लेकिन 10 वर्ष तक लगातार पहाड़ पर ही रहे और नीचे नहीं उतरे। उनके एक भक्त कृपाल सिंह तोमर निवासी झंडा के बेटे की शादी में शिवपुरी गए थे, तभी पहाड़ से नीचे उतरे थे। इस स्थान पर दुर्गा माता व हनुमानजी महाराज का नवनिर्मित मंदिर भी स्थित है। यहां धनेश्वर बाबा के गुरु महाराज की भी प्रतिमा स्थित है। यहां जीव जंतुओं में बंदर बहुतायत संख्या में रहते हैं।

डकैतों का रहा है आंतक,अब जुटने लगी भीड

हर शिवरात्रि यहां दंगल का आयोजन भी होता है। सोमवार को आसपास के गांव के ग्रामीण महादेव के दर्शन करने आते रहते हैं। यह क्षेत्र दस्यु प्रभावित क्षेत्र था, इसलिए 15 से 20 वर्ष पहले यहां बहुत कम संख्या में लोग जाते थे। जबसे दस्यूओ का सफाया हो गया है, तब से लोगों का आना-जाना निरंतर बना रहता है।

टपकेश्वर महादेव पर पांडवों ने बिताया था अज्ञातवास

भौंती से करीब 12 किलोमीटर दूर मुहार के पहाड़ पर टपकेश्वर महादेवजी का प्राचीन मंदिर स्थापित है। इस मंदिर की खासियत है कि यहां पर पांडवों ने कुछ समय अज्ञातवास का व्यतीत किया था और यहां पर गुफा के अंदर शिव जी का मंदिर है। पहाड़ी के नीचे कुंड बना हुआ है जिसमें हमेशा निर्मल जल रहता है। यह जल चाहे, जितनी गर्मी हो सूखता नहीं है। यह मंदिर पहाड़ी पर होने के कारण आकर्षण का केंद्र है और यहां शिवरात्रि पर मेले का आयोजन होता है। इस मंदिर को सावन के महीने में दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्तगण आते हैं।